सुकना भूमि घोटाले में आर्मी कोर्ट मार्शल ने लेफ्टिनेंट जनरल पी के रथ को वरिष्ठता क्रम में दो साल पीछे कर दिया है। इसके अलावा उनकी पेशन भी 15 साल की सेवा कम करके तय की जाएगी। उन्हें शुक्रवार को दोषी करार दिया गया था। सेना के इतिहास में यह पहली बार है जब किसी लेफ्टिनेंट जनरल रैंक के सेवारत अफसर को भ्रष्टाचार के मामले में दोषी करार दिया गया है।
आज सुनाई गई सजा में दो साल की वरिष्ठता घटा दी गई है। अब वे अपने बैच के अन्य अफसरों से दो साल जूनियर हो जाएंगे। हालांकि लेफ्टिनेंट जनरल इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील करेंगे। पीके रथ के भाई प्रोफेसर प्रताप कुमार रथ ने कहा कि उनके भाई के साथ अन्याय हुआ है। उनके पास राहत पाने के लिए आर्म्ड फोर्सेज ट्रिब्यूनल का दरवाजा खटखटाने का विकल्प भी खुला है। जनरल कोर्ट मार्शल (जीसीएम) ने शुक्रवार को 33 कोर के पूर्व कमांडर रथ पर लगे चार में से तीन आरोपों को सही पाया। सूत्र ने बताया कि सुकना मामले में ही पूर्व सैन्य सचिव लेफ्टिनेंट जनरल अवधेश प्रकाश के खिलाफ एक महीने के भीतर कोर्ट मार्शल की कार्रवाई शुरू हो जाएगी।
यह मामला पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग में सुकना नामक सैन्य स्टेशन से सटी 70 एकड़ भूमि में एक निजी शिक्षण संस्थान खोलने के लिए एक बिल्डर को अनापत्ति प्रमाणपत्र देने का है। 2008 में मामले का खुलासा हुआ जिसमें अनेक शीर्ष सैन्य अधिकारियों के नाम सामने आए। सेना ने जांच के लिए कोर्ट ऑफ इनक्वायरी का गठन किया। इसकी जांच रिपोर्ट के आधार पर तत्कालीन सेना प्रमुख जनरल दीपक कपूर ने आरोपी अफसरों के खिलाफ मामूली प्रशासनिक कार्रवाई की सिफारिश की।
रक्षा मंत्री एके एंटनी के हस्तक्षेप के बाद सेना प्रमुख को ले. जनरल रथ और अवधेश प्रकाश के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई के आदेश देने पड़े। जिसके बाद दोनों के खिलाफ कोर्ट मार्शल की कार्रवाई का रास्ता साफ हो गया। सेना उपप्रमुख के रूप में नामित हो चुके ले. जनरल रथ की नियुक्ति भी मामला सामने आने के बाद रद्द कर दी गई। इसके बाद अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए उन्हें सेना में इधर-उधर संबद्घ किया जाता रहा है। घोटाले में अवधेश प्रकाश और पीके रथ के अलावा ले. जनरल रमेश हलगली और सुकना सैन्य स्टेशन के प्रशासनिक अधिकारी मेजर जनरल पीके सेन के नाम भी सामने आए। मामले में सीमित भूमिका के चलते इन दोनों के खिलाफ प्रशासनिक कार्रवाई की गई। ले. जनरल रथ ने जमीन के लिए बिल्डर दिलीप अग्रवाल को अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) दिया। साथ ही उसके साथ एक एमओयू (मेमोरंडम ऑफ अंडरस्टेंडिंग) भी किया। लेकिन इसकी सूचना अपने कमान मुख्यालय (कोलकाता स्थित पूर्वी सैन्य कमान) को नहीं दी। ले. जनरल रथ उस वक्त सुकना स्थित 33 कोर के कमांडर थे।
आज सुनाई गई सजा में दो साल की वरिष्ठता घटा दी गई है। अब वे अपने बैच के अन्य अफसरों से दो साल जूनियर हो जाएंगे। हालांकि लेफ्टिनेंट जनरल इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील करेंगे। पीके रथ के भाई प्रोफेसर प्रताप कुमार रथ ने कहा कि उनके भाई के साथ अन्याय हुआ है। उनके पास राहत पाने के लिए आर्म्ड फोर्सेज ट्रिब्यूनल का दरवाजा खटखटाने का विकल्प भी खुला है। जनरल कोर्ट मार्शल (जीसीएम) ने शुक्रवार को 33 कोर के पूर्व कमांडर रथ पर लगे चार में से तीन आरोपों को सही पाया। सूत्र ने बताया कि सुकना मामले में ही पूर्व सैन्य सचिव लेफ्टिनेंट जनरल अवधेश प्रकाश के खिलाफ एक महीने के भीतर कोर्ट मार्शल की कार्रवाई शुरू हो जाएगी।
यह मामला पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग में सुकना नामक सैन्य स्टेशन से सटी 70 एकड़ भूमि में एक निजी शिक्षण संस्थान खोलने के लिए एक बिल्डर को अनापत्ति प्रमाणपत्र देने का है। 2008 में मामले का खुलासा हुआ जिसमें अनेक शीर्ष सैन्य अधिकारियों के नाम सामने आए। सेना ने जांच के लिए कोर्ट ऑफ इनक्वायरी का गठन किया। इसकी जांच रिपोर्ट के आधार पर तत्कालीन सेना प्रमुख जनरल दीपक कपूर ने आरोपी अफसरों के खिलाफ मामूली प्रशासनिक कार्रवाई की सिफारिश की।
रक्षा मंत्री एके एंटनी के हस्तक्षेप के बाद सेना प्रमुख को ले. जनरल रथ और अवधेश प्रकाश के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई के आदेश देने पड़े। जिसके बाद दोनों के खिलाफ कोर्ट मार्शल की कार्रवाई का रास्ता साफ हो गया। सेना उपप्रमुख के रूप में नामित हो चुके ले. जनरल रथ की नियुक्ति भी मामला सामने आने के बाद रद्द कर दी गई। इसके बाद अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए उन्हें सेना में इधर-उधर संबद्घ किया जाता रहा है। घोटाले में अवधेश प्रकाश और पीके रथ के अलावा ले. जनरल रमेश हलगली और सुकना सैन्य स्टेशन के प्रशासनिक अधिकारी मेजर जनरल पीके सेन के नाम भी सामने आए। मामले में सीमित भूमिका के चलते इन दोनों के खिलाफ प्रशासनिक कार्रवाई की गई। ले. जनरल रथ ने जमीन के लिए बिल्डर दिलीप अग्रवाल को अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) दिया। साथ ही उसके साथ एक एमओयू (मेमोरंडम ऑफ अंडरस्टेंडिंग) भी किया। लेकिन इसकी सूचना अपने कमान मुख्यालय (कोलकाता स्थित पूर्वी सैन्य कमान) को नहीं दी। ले. जनरल रथ उस वक्त सुकना स्थित 33 कोर के कमांडर थे।

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