कभी भी क्रोध पूर्ण तरीके से और बदले की भावना से मत बोलो।
जब आपको कोई परेशान करदे या उनमें छिपी बुराई आप पर
आघात करे तब भी आप एक फूल की तरह कोमलता की पंखुड़ियां
बिखेर दो। आत्म नियंत्रण और अच्छे व्यवहार से आप को निश्चित
रूप से यह आभास हो जायेगा कि आप सनातन अच्छाई का हिस्सा
हो और आप का संसार के गलत रास्तो से कोई लेना देना नही है।
(श्री परमहंस योगानंद)
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