कैबिनेट सुरक्षा समिति ने इसरो-देवास डील रद्द करने का फैसला किया है। सरकार ने एस-बैंड डील रद्द की। यह डील कई आरोपों से घिरी हुई थी। रक्षा मंत्री ने भी कहा था कि किसी भी तरह की हेराफेरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। आज सुबह से ही इस डील को लेकर मीटिंग चल रही थी।
इसरो ने जनवरी, 2005में देवास मल्टीमीडिया के साथ हुए एस बैंड करार की जानकारी चार महीने बाद मई, 2005 में अंतरिक्ष आयोग और कैबिनेट को नहीं दी थी। एक निजी समाचार चैनल ने दावा किया था कि मई, 2005 में कैबिनेट मीटिंग के नोट के मुताबिक इसरो ने कहा था कि एस बैंड स्पेक्ट्रम को लेकर एक सर्विस प्रोवाइडर उनके संज्ञान में है। जबकि हकीकत यह है कि इस नोट के लिखे जाने से चार महीने पहले ही इसरो की कारोबारी ईकाई एंट्रिक्स और देवास मल्टीमीडिया के बीच समझौता हो चुका था।
अंतरिक्ष विभाग उन दिनों प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के पास था। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या इस मामले की जानकारी प्रधानमंत्री कार्यालय को नहीं थी? क्या देश की बेशकीमती बैंड से जुड़े इस मामले में किसी कैबिनेट मंत्री की इजाजत नहीं ली गई? भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संस्थान (इसरो) की मार्केटिंग ईकाई के तौर पर 1992 में अंतरिक्ष कॉरपोरेशन लिमिटेड की स्थापना की गई थी। देवास मल्टीमीडिया के साथ एंट्रिक्स ने ही एस बैंड स्पेक्ट्रम के लिए समझौता किया था। एंट्रिक्स इसरो द्वारा तैयार स्पेस प्रॉडक्ट और तकनीकी सलाह को व्यावसायिक फायदे के लिए बेचती है। इसरो द्वारा तैयार तकनीक के व्यावसायिक इस्तेमाल का काम भी एंट्रिक्स के पास है। एंट्रिक्स और इसरो के चेयरमैन के. राधाकृष्णन हैं।
इसरो ने जनवरी, 2005में देवास मल्टीमीडिया के साथ हुए एस बैंड करार की जानकारी चार महीने बाद मई, 2005 में अंतरिक्ष आयोग और कैबिनेट को नहीं दी थी। एक निजी समाचार चैनल ने दावा किया था कि मई, 2005 में कैबिनेट मीटिंग के नोट के मुताबिक इसरो ने कहा था कि एस बैंड स्पेक्ट्रम को लेकर एक सर्विस प्रोवाइडर उनके संज्ञान में है। जबकि हकीकत यह है कि इस नोट के लिखे जाने से चार महीने पहले ही इसरो की कारोबारी ईकाई एंट्रिक्स और देवास मल्टीमीडिया के बीच समझौता हो चुका था।
अंतरिक्ष विभाग उन दिनों प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के पास था। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या इस मामले की जानकारी प्रधानमंत्री कार्यालय को नहीं थी? क्या देश की बेशकीमती बैंड से जुड़े इस मामले में किसी कैबिनेट मंत्री की इजाजत नहीं ली गई? भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संस्थान (इसरो) की मार्केटिंग ईकाई के तौर पर 1992 में अंतरिक्ष कॉरपोरेशन लिमिटेड की स्थापना की गई थी। देवास मल्टीमीडिया के साथ एंट्रिक्स ने ही एस बैंड स्पेक्ट्रम के लिए समझौता किया था। एंट्रिक्स इसरो द्वारा तैयार स्पेस प्रॉडक्ट और तकनीकी सलाह को व्यावसायिक फायदे के लिए बेचती है। इसरो द्वारा तैयार तकनीक के व्यावसायिक इस्तेमाल का काम भी एंट्रिक्स के पास है। एंट्रिक्स और इसरो के चेयरमैन के. राधाकृष्णन हैं।

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