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गुरुवार, 21 अप्रैल 2011

भारत के 17 प्रतिशत लोग ही सम्पन्न.


विश्व के 124 देशों की खुशहाली का पता लगाने के वास्ते गैलअप की ओर से कराए गए सर्वेक्षण में भारत को 71वां स्थान मिला हैं जहां केवल 17 प्रतिशत लोग ही अपने को सम्पन्न मानते हैं। गैलअप 2010 की ओर से खुशहाली का पता लगाने के लिए किए सर्वेक्षणों को जोड़कर आए परिणामों के अनुसार बहुसंख्यक भारतीय (64 प्रतिशत) मानते हैं कि वे संघर्षरत हैं जबकि 19 प्रतिशत मानते हैं कि वे कष्ट में हैं।

सर्वेक्षण में लोगों को शून्य से 10 स्तर की स्तर में स्वयं को मूल्यांकित करने को कहा गया। इस सर्वेक्षण में ऐसे लोगों को सम्पन्न माना गया जिन लोगों ने स्वयं के जीवन को सात या इससे अधिक अंक दिए और जिन्होंने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि पांच वर्षों में उनकी स्थिति आठ या इससे अधिक स्तर की हो जाएगी। जिन लोगों ने अपने जीवन को चार या इससे कम अंक दिए उन्हें कष्ट में या संघर्षरत करार दिया गया। दिलचस्प बात है कि पाकिस्तान को विश्व का 40 सबसे खुशहाल देश करार दिया गया जो आतंकवाद से ग्रस्त होने के कारण उसकी अर्थव्यवस्था संकट की स्थिति में है। पाकिस्तान के 32 प्रतिशत नागरिकों का कहना है कि वे सम्पन्न हैं।

भारत के अन्य पड़ोसी देशों की खुशहाली की स्थिति सर्वेक्षण के अनुसार बेहतर है। बंगलादेश को इस सूची में 89वें स्थान पर रखा गया है। इस सर्वेक्षण में शामिल इसके केवल 13 प्रतिशत लोगों ने कहा कि वे सम्पन्न हैं। इसके साथ ही केवल 12 प्रतिशत लोगों ने कहा कि वे प्रसन्न हैं। चीन का इस सर्वेक्षण में 92वां स्थान है। श्रीलंका का इसमें 114वां स्थान है तथा इसके केवल पांच प्रतिशत लोगों ने कहा कि वे स्वयं को सम्पन्न मानते हैं। सर्वेक्षण में शामिल किए गए 124 देशों में डेनमार्क को पहला स्थान मिला जिसमें दो तिहाई निवासियों ने स्वयं को सम्पन्न बताया। केवल 69 प्रतिशत प्रसन्न लोगों वाले स्वीडन और कनाडा को दूसरा सबसे खुशहाल देश बताया गया। इसके बाद आस्ट्रेलिया 66 प्रतिशत, फिनलैंड और वेनेजुएला 64 प्रतिशत, इस्राइल और न्यूजीलैंड 63 प्रतिशत और नीदरलैंड और आयरलैंड के 62 प्रतिशत लोग प्रसन्न हैं।

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