मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की महत्वपूर्ण बैठक. - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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शनिवार, 23 अप्रैल 2011

मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की महत्वपूर्ण बैठक.


  ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की कार्यकारणी की एक महत्वपूर्ण बैठक शनिवार से हैदराबाद में शुरू हो रही है. दो दिनों तक चलने वाली इस बैठक में बाबरी मस्जिद मामले सहित कई ऐसे अहम मुद्दों पर विचार किया जाएगा जिनका संबंध शरियत और मुस्लिम समुदाय के संवैधानिक और क़ानूनी अधिकारों से है. इस बैठक से पहले ही बाबरी मस्जिद मामले पर कोर्ट में 12 करोड़ खर्च करने का फ़ैसला कर लिया गया है. भारत में मुसलमानों के सबसे बड़े धार्मिक मंच समझे जाने वाले इस बोर्ड की बैठक में देश भर से 100 से ज़्यादा धर्म गुरु और अन्य प्रमुख हस्तियाँ भाग लेंगी.

 बोर्ड ने इस मामले में लखनऊ हाई कोर्ट के फ़ैसले के विरुद्ध सुप्रीम कोर्ट में नौ याचिकाएं दाखिल करने का फैसला किया है. इनमें से चार याचिकाएं दाखिल की जा चुकी हैं और शेष याचिकाएं जल्द ही दाखिल कर दी जाएँगी. बोर्ड ने यह मुक़दमा लड़ने के लिए कई बड़े कानूनी विशेषज्ञों की सेवा लेने का फ़ैसला किया है जिनमें राजीव धवन और पीपी राव शामिल हैं. मौलाना ने कहा, "हम समझते हैं कि इस कानूनी लड़ाई पर 10 से 12 करोड़ का खर्च आएगा और यह खर्च पूरा मुस्लिम समुदाय बर्दाश्त करेगा. बाबरी मस्जिद से जुड़े फैसले में जजों ने कई ऐसी बातें कहीं हैं जिनको अगर चुनौती नहीं दी गई तो उसका आगे चल कर मुसलमानों पर बुरा असर पड़ेगा.इस कानूनी लड़ाई पर 10० से 12 करोड़ का खर्च आएगा और यह खर्च पूरा मुस्लिम समुदाय बर्दाश्त करेगा

क़ानूनी मामलों के अलावा मुस्लमानों में बढ़ती सामाजिक बुराइयों के विरुद्ध अभियान तेज़ करने पर भी बैठक में विचार करेगा जिसमें दहेज की रसम और माँ के पेट में ही लड़कियों को मार देना शामिल है. इस बैठक में ऐसे कई दूसरे अदालती फैसलों और कुछ नए कानूनों पर भी विचार किया जाएगा जो बोर्ड के अनुसार शरियत के खिलाफ़ हैं. इनमें सुप्रीम कोर्ट के तीन ऐसे आदेश हैं जिनमें कहा गया है कि तलाक़ के बाद भी पति को अपनी पूर्व पत्नी को गुज़र बसर का खर्च देना होगा. मौलाना ने कहा कि बोर्ड ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है कि वो इन फैसलों पर पुनः विचार करे. याचिका के खिलाफ़ भी लड़ने का फैसला किया है जिसमें मांग की गई है कि इस्लामी विरासत कानून को भारत में लागू न होने दिया जाए क्योंकि इसमें महिलाओं और पुरषों को बराबर का अधिकार नहीं दिया गया है. इसके अलावा बोर्ड ने केरल हाई कोर्ट में दाखिल की गई उस याचिका के खिलाफ़ भी लड़ने का फैसला किया है जिसमें मांग की गई है कि इस्लामी विरासत कानून को भारत में लागू न होने दिया जाए क्योंकि इसमें महिलाओं और पुरषों को बराबर का अधिकार नहीं दिया गया है.

बैठक में जिन नए कानूनों पर विचार किया जाएगा उनमें नया वक़्फ़ कानून और बच्चों के लिए शिक्षा का अधिकार भी शामिल है. बोर्ड का कहना है कि शिक्षा का अधिकार कानून का मकसद बहुत अच्छा है लेकिन इसमें कुछ संशोधन ज़रूरी है क्योंकि कानून में कहा गया है कि पहली से आठवीं कक्षा तक केवल सरकारी पाठ्यक्रम की शिक्षा होगी. इससे मुसलमानों के मदरसे और दूसरे समुदायों के शिक्षा संस्थान अवैध बन जाएँगे.

मौलाना क़ुरैशी ने कहा कि अगले वर्ष से जो टैक्स कोड लागू होने वाला है वो तमाम समुदायों के धार्मिक संस्थानों के लिए हानिकारक है. उनके अनुसार नए कोड के अंतर्गत तमाम धर्म स्थलों को टैक्स देना होगा और धार्मिक संस्थानों और खैराती काम करने वाले संस्थानों को 80 जी के अंतर्गत टैक्स से छूट ख़त्म हो जाएगी. बोर्ड अपनी बैठक के बाद रविवार की शाम अपने फैसलों की घोषणा करेगा.

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