उल्फा के नेताओं को उनके दैनिक खर्च और परिवार चलाने के लिए केंद्र सरकार की ओर से 40 लाख रुपए दिए जा रहे हैं। गृह मंत्रालय ने उल्फा के अध्यक्ष अरविंद राजखोवा, उपाध्यक्ष प्रदीप गोगोई और अन्य नेताओं तथा संगठन के करीब 400 कैडरों की वित्तीय सहायता के लिए पहली किश्त जारी कर दी है। मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया हमने असम सरकार के माध्यम से उल्फा को धन दिया है। यह धन उल्फा सदस्यों के दैनिक खर्च और उनके परिवार की जरूरतों को पूरा करने के लिए दिया गया है।
केंद्र आने वाले दिनों में प्रतिबंधित समूह के लिए और धन जारी कर सकता है।
उल्फा पर हथियार और गोला-बारूद खरीदने तथा अपने कैडरों को प्रशिक्षण देने के लिए असम में करोड़ों रुपए की वसूली करने का आरोप है। इस समूह पर समीपवर्ती बांग्लादेश में कई कारोबार चलाने का भी आरोप है। वर्ष 2009 में भारत बांग्लादेश सीमा पर गिरफ्तार किए जाने के बाद जनवरी माह में पहली बार राजखोवा की अगुवाई में उल्फा नेताओं ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और गृह मंत्री पी चिदंबरम से मुलाकात की और उनकी सरकार के साथ शांति वार्ता शुरू हुई।
सरकार के प्रतिनिधियों और उल्फा नेताओं के बीच शांति वार्ता का अगला दौर जून में होने की उम्मीद है। इस प्रक्रिया में विलंब हो रहा है, क्योंकि समूह ने अब तक वार्ता से पहले हथियार सौंपने की केंद्र की शर्त पूरी नहीं की है। समझा जाता है कि उल्फा के हथियार उसके दो वरिष्ठ नेताओं के कब्जे में हैं लेकिन यह तय नहीं किया गया है कि डबल लॉकिंग व्यवस्था के तहत क्या हथियारों के एक सेट की चाभियां सरकार के पास और दूसरे की उग्रवादी समूह के पास रहेंगी।
बात चित के दौरान हथियार डालने वाले उग्रवादी समूहों के लिए सरकार की मानक प्रक्रिया रही है। इसमें एनएससीएन (आईएम) समूह अपवाद रहा है। नगा नेशनल काउंसिल के आग्नेयास्त्र ताले में बंद हैं और उसकी चाभियां 1964 से ही कोहिमा स्थित चाइडेमा शांति शिविर में हैं। हाल ही में, वार्ता समर्थक एनडीएफबी के हथियारों के एक सेट की चाभियां सरकार के पास और दूसरे की उग्रवादी समूह के पास रखी गईं। सरकार ने यही दलील औपचारिक वार्ता की शर्त के तौर पर उल्फा के समक्ष रखी। इस बीच, केंद्र और असम सरकार ने उल्फा कैडरों के लिए एक शिविर स्थापित करने की खातिर नलबाड़ी जिले में समूह को भूमि आवंटित करने पर सहमति जता दी है। अधिकारियों ने बताया कि यहां हथियार जमा किए जा सकते हैं।

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