मानवाधिकार कार्यकर्ता विनायक सेन को दक्षिण कोरिया का 2011 का प्रतिष्ठित ग्वांगजू पुरस्कार दिया जाएगा। यह पुरस्कार एशिया में मानवाधिकार, शांति, लोकतंत्र और न्याय के लिए काम करने वाले व्यक्तियों या संस्थाओं को दिया जाता है। सिओल में गुरुवार को इसकी घोषणा करते हुए ग्वांगजू प्राइज कमेटी ने बताया कि पुरस्कार के लिए एशिया से 32 नामांकन मिले थे।
विजेता को पुरस्कार के रूप में 50,000 डॉलर (करीब 22 लाख रुपए) दिए जाते हैं। यह पुरस्कार वर्ष 2000 में शुरू हुआ था।प्रत्येक वर्ष 18 मई को यह तारीख 1980 में ग्वांगजू में हुई लोकतांत्रिक बगावत की याद दिलाती है।
मई 18 मेमोरियल फाउंडेशन की वेबसाइट पर कहा गया है कि डॉ. सेन एक जानेमाने मेडिकल प्रैक्टिसनर हैं। उन्होंने गरीबों के लिए स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया कराके और मानवाधिकारों के उल्लंघन के खिलाफ आवाज उठाकर अपनी अलग पहचान बनाई है। वे पीपुल्स यूनियन फॉर सिविल लिबर्टीज से भी जुड़े रहे हैं। यह संगठन नक्सल विरोधी संघर्ष के दौरान मानवाधिकारों का उल्लंघन रोकने के लिए सक्रिय है। पूर्वी तिमूर की आजादी के संघर्ष करने वाले नेता झनाना गुसामो इससे पुरस्कृत होने वाले पहले व्यक्ति थे। मणिपुर की मानवाधिकार कार्यकर्ता इरोम शर्मिला इससे पुरस्कृत होने वाली पहली भारतीय थीं।

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