सोनियां गाँधी के जवाब से प्रसन्न हैं अन्ना. - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

Breaking

प्रबिसि नगर कीजै सब काजा । हृदय राखि कौशलपुर राजा।। -- मंगल भवन अमंगल हारी। द्रवहु सुदसरथ अजिर बिहारी ।। -- सब नर करहिं परस्पर प्रीति । चलहिं स्वधर्म निरत श्रुतिनीति ।। -- तेहि अवसर सुनि शिव धनु भंगा । आयउ भृगुकुल कमल पतंगा।। -- राजिव नयन धरैधनु सायक । भगत विपत्ति भंजनु सुखदायक।। -- अनुचित बहुत कहेउं अग्याता । छमहु क्षमा मंदिर दोउ भ्राता।। -- हरि अनन्त हरि कथा अनन्ता। कहहि सुनहि बहुविधि सब संता। -- साधक नाम जपहिं लय लाएं। होहिं सिद्ध अनिमादिक पाएं।। -- अतिथि पूज्य प्रियतम पुरारि के । कामद धन दारिद्र दवारिके।।

गुरुवार, 21 अप्रैल 2011

सोनियां गाँधी के जवाब से प्रसन्न हैं अन्ना.

सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के पत्र को लेकर खुशी जाहिर की है। सोनिया ने पत्र में उन्हें आश्वासन दिया है कि वह की आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति का समर्थन नहीं करतीं और लोकपाल संस्थान के लिए उनकी गहरी प्रतिबद्धता है।

हजारे ने कहा सोनिया गांधी ने मुझे पत्र लिखा है। पत्र पढ़ कर खुशी हुई कि उन्होंने उन लोगों का न तो समर्थन किया है और न ही करेंगी जो लोग मुझ पर हमले कर रहे हैं। हजारे ने सोनिया से एक पत्र के माध्यम से उनके सहयोगियों के खिलाफ शिकायत की थी, जो लोकपाल विधेयक पर संयुक्त प्रारूप समिति की प्रक्रिया को बाधित करने की कोशिश कर रहे हैं।

इस पर सोनिया ने हजारे को जवाब लिखा, जिसमें उन्होंने कहा है कि रिश्वतखोरी और भ्रष्टाचार से निपटना निहायत जरूरी है और हजारे की लड़ाई में मेरी प्रतिबद्धता पर कोई संदेह नहीं होना चाहिए।

1 टिप्पणी:

R K SINGH ने कहा…

अब अण्णा के आंदोलन के बाद क्या स्थिति बन गई है… रातोंरात मीडिया के चहेते और नीति निर्धारण में सर्वेसर्वा बन बैठे हैं, तो हम भी इतने “गये-बीते” तो नहीं हैं, कि हमें इसके पीछे चलने वाली साजिश नज़र न आये…।
मजे की बात तो यह है कि अण्णा हजारे को घेरे बैठी “सेकुलर चौकड़ी” कुछ दिन भी इंतज़ार न कर सकी… “सेकुलरिज़्म की गंदी बदबू” फ़ैलाने की दिशा में पहला कदम भी ताबड़तोड़ उठा लिया। हर्ष मन्दर और मल्लिका साराभाई सहित दिग्गी राजा ने अण्णा के मंच पर “भारत माता” के चित्र को संघ का आईकॉन बता दिया था, तो JNU छाप मोमबत्ती ब्रिगेड ने अब यह तय किया है कि अण्णा के मंच पर भारत माता का नहीं बल्कि तिरंगे का चित्र होगा, क्योंकि भारत माता का चित्र “साम्प्रदायिक” है। भारत माता का चित्र हटाने का फ़ैसला लेकर इस सेकुलर जमात ने “भविष्य में आने वाले जन-लोकपाल बिल का रंग” पहले ही दिखा दिये हैं। “सेकुलर चौकड़ी” ने यह फ़ैसला अण्णा को “बहला-फ़ुसला” कर लिया है या बाले-बाले ही लिया है, यह तो वे ही जानें, लेकिन भारत माता का चित्र भी साम्प्रदायिक हो सकता है, इसे सुनकर बंकिमचन्द्र जहाँ भी होंगे उनकी आत्मा निश्चित ही दुखेगी…

उल्लेखनीय है कि आंदोलन के शुरुआत में मंच पर भारत माता का जो चित्र लगाया जाने वाला था, वह भगवा ध्वज थामे, “अखण्ड भारत” के चित्र के साथ, शेर की सवारी करती हुई भारत माता का था अण्णा हजारे ने भारत माता के हाथों में तिरंगा थमाया और शेर भी हटा दिया, तथा अखण्ड भारत की जगह वर्तमान भारत का चित्र लगा दिया…। चलो यहाँ तक भी ठीक था, क्योंकि भ्रष्टाचार से लड़ाई के नाम पर, “मॉडर्न गाँधी” के नाम पर, और सबसे बड़ी बात कि जन-लोकपाल बिल के नाम पर “सेकुलरिज़्म” का यह प्रहार सहा भी जा सकता था। परन्तु भारत माता का यह चित्र भी “सेकुलरिज़्म के गंदे कीड़ों” को अच्छा नहीं लग रहा था, सो उसे भी साम्प्रदायिक बताकर हटा दिया गया और अब भविष्य में अण्णा के सभी कार्यक्रमों में मंच पर बैकग्राउण्ड में सिर्फ़ तिरंगा ही दिखाई देगा, भारत माता को बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है दरअसल हमारा देश एक विशिष्ट प्रकार के एड्स से ग्रसित है, भारतीय संस्कृति, हिन्दुत्व एवं सनातन धर्म से जुड़े किसी भी चिन्ह, किसी भी कृति से कांग्रेस-पोषित एवं मिशनरी द्वारा ब्रेन-वॉश किये जा चुके “सेकुलर”(?) परेशान हो जाते हैं। ऐसे ही “सेकुलर एड्सग्रसित” मानसिक विक्षिप्तों ने अब अण्णा को फ़ुसलाकर, भारत माता के चित्र को भी हटवा दिया है… और फ़िर भी ये चाहते हैं कि हम बाबा रामदेव और नरेन्द्र मोदी की बात क्यों करते हैं, भ्रष्टाचार को हटाने के “विशाल लक्ष्य”(?) में उनका साथ दें…।
“उल्टा चोर कोतवाल को डाँटे” की तर्ज पर, कांग्रेस और मीडिया की मिलीभगत द्वारा भ्रम फ़ैलाने का एक और प्रयास यह भी है कि अण्णा हजारे, संघ और भाजपा के करीबी हैं। अण्णा हजारे का तो पता नहीं, लेकिन उन्हें जो लोग “घेरे” हुए हैं उनके बारे में तो निश्चित रूप से कहा जा सकता है कि वे संघ-भाजपा के लोग नहीं हैं। फ़िलहाल सिर्फ़ इतना ही…… क्योंकि कहा जा रहा है, कि जन-लोकपाल बिल बनाने में “अड़ंगे” मत लगाईये, अण्णा की टाँग मत खींचिये, उन्हें कमजोर मत कीजिये… चलिये मान लेते हैं। अब इस सम्बन्ध में विस्तार से 15 अगस्त के बाद ही कुछ लिखेंगे… तब तक आप तेल देखिये और तेल की धार देखिये… दिल को खुश करने के लिये मान लेते हैं, कि जैसा बिल “जनता चाहती है”(?) वैसा बन भी गया, तो यह देखना दिलचस्प होगा कि लोकपाल नियुक्ति हेतु चयन समिति में बैठने वाले लोग कौन-कौन होंगे? असली “राजनैतिक कांग्रेसी खेल” तो उसके बाद ही होगा… और देखियेगा, कि उस समय सब के सब मुँह टापते रह जाएंगे, कि “अरे… यह लोकपाल बाबू भी सोनिया गाँधी के ही चमचे निकले…!!!” तब तक चिड़िया खेत चुग चुकी होगी…।

इसलिये हे अण्णा हजारे, जन-लोकपाल बिल हेतु हमारी ओर से आपको अनंत शुभकामनाएं, परन्तु जिस प्रकार आपकी “सेकुलर मण्डली” का "सो कॉल्ड" बड़ा लक्ष्य, सिर्फ़ जन-लोकपाल बिल है, उसी तरह हम जैसे “अनसिविलाइज़्ड आम आदमी की सोसायटी” का भी एक लक्ष्य है, देश में सनातन धर्म की विजय पताका पुनः फ़हराना, सेकुलर कीट-पतंगों एवं भारतीय संस्कृति के विरोधियों को परास्त करना… अण्णा जी, भले ही आप “बुरी सेकुलर संगत” में पड़कर राह भटक गये हों, हम नहीं भटके हैं… और न भटकेंगे…