भारत-बांग्ला सीमा विवाद सुलझाने के प्रयास. - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

Breaking

प्रबिसि नगर कीजै सब काजा । हृदय राखि कौशलपुर राजा।। -- मंगल भवन अमंगल हारी। द्रवहु सुदसरथ अजिर बिहारी ।। -- सब नर करहिं परस्पर प्रीति । चलहिं स्वधर्म निरत श्रुतिनीति ।। -- तेहि अवसर सुनि शिव धनु भंगा । आयउ भृगुकुल कमल पतंगा।। -- राजिव नयन धरैधनु सायक । भगत विपत्ति भंजनु सुखदायक।। -- अनुचित बहुत कहेउं अग्याता । छमहु क्षमा मंदिर दोउ भ्राता।। -- हरि अनन्त हरि कथा अनन्ता। कहहि सुनहि बहुविधि सब संता। -- साधक नाम जपहिं लय लाएं। होहिं सिद्ध अनिमादिक पाएं।। -- अतिथि पूज्य प्रियतम पुरारि के । कामद धन दारिद्र दवारिके।।

शनिवार, 23 अप्रैल 2011

भारत-बांग्ला सीमा विवाद सुलझाने के प्रयास.

सीमा विवाद सुलझाने के प्रयास को तेज करते हुए भारत-बांग्लादेश ने अपनी संयुक्त सीमा वाले अस्सी प्रतिशत क्षेत्र का सर्वेक्षण पूरा कर लिया है। अब दोनों ही देश उन क्षेत्रों की पहचान करेंगे जिन पर उनका दावा है और वह दूसरे की सीमा में है। उम्मीद की जा रही है कि यह काम अगले एक से डेढ़ महीने में संपन्न कर लिया जाएगा।

केंद्रीय गृह मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा, ‘दोनों देश की 4098 किमी लंबी संयुक्त सीमा में ऐसे 130 या उससे कुछ अधिक क्षेत्र हैं जो भारत का हिस्सा हैं लेकिन वह बांग्लादेश में है। इसी तरह 95 बांग्लादेशी इलाके भारत में बताए जाते हैं।’ एक अन्य अधिकारी ने कहा कि मई 15 तक दोनों देश के अधिकारी ऐसे क्षेत्र में रहने वाले लोगों की संख्या का आकलन करेंगे। उसके पश्चात दोनों देश के बीच इन क्षेत्रों को एक-दूसरे को सौंपने पर चर्चा होगी। इस अधिकारी ने कहा, ‘यह कोई बहुत बड़ा मसला नहीं है बशर्ते कोई राजनीतिक पेंच सामने न आए। दोनों देश एक दूसरे के साथ मित्रवत हैं और एक दूसरे की मदद करना चाहते हैं। यह आदान-प्रदान दक्षिण एशिया क्षेत्र में एक नया कूटनीतिक संतुलन भी लाने में सहायक हो सकता है।’ एक अन्य अधिकारी ने कहा कि जहां तक 80 प्रतिशत क्षेत्र की बात है तो उसको लेकर दोनों देश एक दूसरे के दावा से लगभग संतुष्ट है। जो 20 प्रतिशत क्षेत्र बचा है वह मेघालय में है।

11 ऐसे इलाके हैं जिसको लेकर दोनों देश के बीच मतांतर है। सबसे बड़ी चुनौती इस मतांतर को दूर करना ही है। एक अधिकारी ने कहा, ‘भारत को उम्मीद है कि यह मामला सुलझ जाएगा।’ सूत्रों के मुताबिक एक बार यह मसला सुलझ जाता है तो फिर केंद्रीय गृह मंत्री पी चिदंबरम की प्रस्तावित ढाका यात्रा के दौरान इस मसले पर आगे की कार्रवाई को लेकर दोनों देश के बीच संवाद हो सकता है। माना जा रहा है कि चिदंबरम या फिर प्रधानमंत्री (उनका भी वर्ष अंत तक बांग्लादेश दौरा प्रस्तावित है) की ओर से इन क्षेत्रों के आदान-प्रदान को लेकर पड़ोसी मुल्क के साथ समझौता पत्र पर हस्ताक्षर किए जा सकते हैं। यह समझौता वर्ष 1974 के भूमि सीमा समझौता के तहत किया जाएगा। दोनों देश के बीच इस दिशा में बढ़ने का फैसला इस साल ढाका में हुई गृह सचिव स्तरीय वार्ता में किया गया।

भारतीय गृह सचिव जीके पिल्लै और उनके बांग्लादेशी समकक्ष अबदुश सो बहन सिकंदर अपनी वार्ता के दौरान इस मसले पर सहमत हुए कि दोनों देशों को अपने सीमा विवाद को सुलझाना चाहिए। दोनों ने माना कि इससे दोनों देशों के बीच व्यापारिक और वाणिज्यिक सहयोग बढ़ेगा, जिसका लाभ अंतत: मुल्क की जनता को होगा।

3 टिप्‍पणियां:

Kajal Kumar's Cartoons काजल कुमार के कार्टून ने कहा…

अच्छी खबर है. आशा है प्रयास सफल होंगे.

बेनामी ने कहा…

कुछ सही हो तो बात भी है

Unknown ने कहा…

Isase dosti aur majgut hogi.