
बिहार सरकार ने पर्यावरण संरक्षण के लिए नई पहल करते हुए हर साल 10 करोड़ पौधे लगाने का निर्णय लिया है। सदाबहार, फलदार और इमारती लकडि़यों के ये पौधे 'महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना' (मनरेगा) और 'छात्र वृक्षारोपण योजना' के तहत लगाए जाएंगे। कार्यक्रम की शुरुआत पर्यावरण दिवस के मौके पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पांच जून को करेंगे। आंकड़ों के मुताबिक, राज्य में कुल 9.8 फीसदी क्षेत्र में वन है। सरकार की योजना है कि अगले पांच वर्षों में इसे बढ़ाकर 15 फीसदी कर दिया जाए। हालांकि, इसके पहले भी सरकार वृक्षारोपण की कई योजनाएं चला चुकी है, लेकिन ये योजनाएं अपेक्षाओं के अनुरूप कारगर साबित नहीं सकीं। राज्य के वन एवं पर्यावरण विभाग के एक सीनियर अधिकारी ने बताया कि मनरेगा के तहत एक वर्ष में प्रत्येक पंचायत में कम से कम 6,000 पौधे लगाए जाने की योजना है। उन्होंने कहा कि तिरहुत प्रमंडल में इस तरह की योजना पहले ही प्रारंभ की गई है, जिसे मॉडल के रूप में पूरे राज्य में लागू किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि 200 पौधों के लिए एक समूह बनेगा। इन वृक्षों की देखभाल की जिम्मेदारी एक ही समुदाय के चार परिवारों पर होगी। इन्हें बारी-बारी से 100 दिन की मजदूरी प्रदान की जाएगी। सभी वृक्ष सड़क, नहर और तटबंधों के किनारे लगाए जाएंगे। सिंचाई के लिए प्रत्येक 200 वृक्षों पर एक हैंडपम्प लगाया जाएगा। प्रत्येक सप्ताह इन पौधों की जांच के बाद ही मजदूरी दी जाएगी। एक अन्य अधिकारी ने बताया कि छात्रों को भी अब वृक्षारोपण में पूरी तरह शामिल किया जा रहा है। हालांकि, स्कूली बच्चों के लिए 'छात्र पौधरोपण योजना' वर्ष 2006 से ही राज्य में चलाई जा रही है, लेकिन अब इसमें कई बदलाव किए गए हैं। उन्होंने बताया कि राज्य में करीब 8,000 सरकारी स्कूलों 'ईको क्लब' के सदस्य हैं। यहां के छात्र-छात्राओं को इसमें शामिल किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि इन विद्यालयों के छह से सात वर्ग के बच्चों को इसमें शामिल किया जाएगा। पांच लड़के-लड़कियों का समूह बनाकर इन्हें प्रत्येक वर्ष 0 पौधे लगाने की जिम्मेदारी होगी। ये पौधे वे स्कूल कैंपस में या इसके आसपास लगाए जाएंगे। बच्चों के उत्साहवर्द्धन के लिए प्रत्येक वर्ष सरकार वृक्षारोपण में आगे रहे तीन स्कूलों को पुरस्कृत भी करेगी। प्रत्येक स्कूल को इस मद में प्रत्येक वर्ष 2500 रुपये दिए जाएंगे। राज्य के वन एवं पर्यावरण मंत्री सुशील कुमार मोदी का मानना है कि इस योजना से जहां राज्य के सभी पंचायतों में हरियाली आएगी, वहीं फलदार वृक्ष पंचायत के लोगों के लिए कमाई का मुख्य जरिया साबित होंगे। वह कहते हैं कि इससे तटबंधों के कटाव और जल संकट से भी कुछ निजात और पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में मदद मिलेगी। सरकार का मानना है कि अगले पांच वर्षों में राज्य में 50 करोड़ पौधे लगाने का काम पूरा कर लिया जाएगा। मोदी ने कहा कि राज्य को मनरेगा के तहत 3,600 करोड़ रुपये का बजट है। इसका 40 प्रतिशत हिस्सा संसाधनों की खरीद पर खर्च किया जा सकता है। इस तरह योजना के लिए राशि की कोई कमी नहीं होगी। उन्होंने बताया कि योजना का प्रारंभ पांच जून को मुख्यमंत्री पटना में करेंगे।
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