अग्नि-5 मिसाइल परीक्षण साल के अंत तक. - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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शनिवार, 4 जून 2011

अग्नि-5 मिसाइल परीक्षण साल के अंत तक.

रक्षा मंत्री एके एंटनी द्वारा शुक्रवार को अग्नि-5 मिसाइल प्रणाली के विकास में तेजी लाए जाने का आग्रह किए जाने के बाद रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) के प्रमुख ने कहा कि वर्ष के अंत तक 5,000 किलोमीटर मारक क्षमता वाली अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल का परीक्षण कर लिया जाएगा। इस मिसाइल को 'चाइना किलर' की संज्ञा दी गई है, क्योंकि यह चीन के उत्तरी छोर तक मार करने की क्षमता रखती है। एंटनी ने डीआरडीओ में एक कार्यक्रम के दौरान कहा, "डीआरडीओ ने विभिन्न दूरी वाली और विस्फोटक क्षमता वाली मिसाइलों का विकास किया है। अब डीआरडीओ को जल्द से जल्द 5,000 किलोमीटर की मारक क्षमता वाली मिसाइल का विकास करने में अपनी क्षमता प्रदर्शित करनी चाहिए।"

इसपर डीआरडीओ के प्रमुख वीके सारस्वत ने कहा कि अग्नि-5 मिसाइल का परीक्षण इस वर्ष के अंत तक कर दिया जाएगा। सारस्वत एंटनी के बगल में ही बैठे हुए थे। एंटनी ने डीआरडीओ से एक विश्वसनीय बैलिस्टिक मिसाइल रक्षा प्रणाली विकसित करने के लिए भी कहा, ताकि भारत को निशाना कर दागी जाने वाली शत्रु पक्ष की मिसाइलों को रास्ते में ही ध्वस्त किया जा सके। एंटनी ने रक्षा वैज्ञानिकों के समूह को सम्बोधित करते हुए कहा, "मिसाइल भेदी मिसाइल विकास कार्यक्रम ने देश को उन राष्ट्रों के एक विशिष्ट समूह में शामिल कर दिया है, जिनके पास मिसाइल रक्षा प्रणाली की क्षमता है। डीआरडीओ को अब हमारे देश के लिए एक विश्वसनीय बैलिस्टिक मिसाइल रक्षा प्रणाली विकसित करने के लिए काम करना चाहिए।"

ज्ञात हो कि भारत अपने दम पर बैलिस्टिक मिसाइल रक्षा प्रणाली विकसित करने की प्रक्रिया में है और उसने दो वर्षो में छह परीक्षण भी किए हैं, जिनमें से चार सफल रहे हैं। बैलिस्टिक मिसाइल रक्षा कार्यक्रम में दो स्तरीय प्रणाली शामिल हैं - 50-60 किलोमीटर की अधिक ऊंचाई पर मिसाइल भेदने के लिए पृथ्वी एयर डिफेंस और 15-30 किलोमीटर की कम ऊंचाई पर मिसाइल भेदने के लिए एडवांस्ड एयर डिफेंस। भारत ने 3,000 किलोमीटर मारक क्षमता वाली अपनी आधुनिक अग्नि-3 मिसाइल को भी सेना में शामिल कर दिया है और इसका उत्पादन कार्य शुरू हो गया है। सारस्वत ने कहा कि अग्नि-3 मिसाइल को सेवा में शामिल कर दिया गया है। उन्होंने कहा, "इसलिए इसमें भ्रम की कोई स्थिति नहीं है कि इसे कम सेवा में शामिल किया जाएगा। इसका विकास कार्य पूरा हो गया है और इसका उत्पादन कार्य जारी है।"

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