दिल्ली का रास्ता लखनऊ से होकर. - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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शनिवार, 4 जून 2011

दिल्ली का रास्ता लखनऊ से होकर.



पार्टी अध्यक्ष नितिन गडकरी ने राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में अपने उदघाटन भाषण में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपयी के इस वाक्य को दोहराया कि दिल्ली का रास्ता लखनऊ से होकर जाता है. नितिन गडकरी ने कहा, "अगर 2014 में लोकसभा चुनाव जीतना है तो अगले साल उत्तर प्रदेश को जीतना होगा.''

गडकरी ने पार्टी के नेताओं को याद दिलाया कि भाजपा 1991 में उत्तर प्रदेश में अकेले बहुमत में आई और उसके बाद गठबंधन की सरकार चलाई, लेकिन पार्टी की ताकत लगातार गिरती गई. एक समय में उत्तर प्रदेश से भाजपा के साठ सांसद थे, जो अब घटकर दस रह गए है. कई प्रेक्षक और भाजपा नेता मानते हैं कि भारतीय जनता पार्टी उत्तर प्रदेश में मायावती के साथ गठबंधन सरकार चलाने के कारण लगातार कमजोर होती गई.


 गडकरी ने जोर देकर सफाई देते हुए कहा, "उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी का किसी के साथ भी किसी तरह के चुनावी तालमेल का कोई प्रश्न नही है. हमें यहां अकेले बढ़ना है.'' गडकरी ने आरोप लगाया कि बहुजन समाज पार्टी और समाजवादी पार्टी दोनों कांग्रेस से मिले हुए हैं. गडकरी ने कहा, ''उत्तर प्रदेश में हमारा लक्ष्य वर्तमान गुंडाराज और जंगलराज के स्थान पर रामराज्य लाना है. उत्तर प्रदेश में लोगों के सामने भाजपा के राष्ट्रवाद और सपा बसपा तथा कांग्रेस गठबंधन के अवसरवाद का विकल्प है.''

गडकरी ने अपने भाषण के प्रारम्भ में ही कह दिया कि भारतीय जनता पार्टी, ''अयोध्या में भव्य राम मंदिर के निर्माण के लिए प्रतिबद्ध है. हम उत्तर प्रदेश और समूचे भारत में राम राज्य की स्थापना के लिए स्वयं को प्रतिबद्ध करते हैं.'' साथ ही गडकरी ने इस बात का भी जिक्र किया कि, ''हाल ही में संपन्न विधान सभा चुनावों में हमारा प्रदर्शन हमारी उम्मीदों से कम रहा है. हमें निराशा हुई है और हम इन परिणामों का विश्लेषण कर रहे हैं.'' साथ ही गडकरी ने अगले साल उत्तराखंड, पंजाब, मणिपुर, उत्तर प्रदेश और गोवा विधान सभा चुनावों की चुनौती का भी ज़िक्र किया. दूसरे पहर राजनीतिक प्रस्ताव में सारा फोकस दिल्ली की संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकार के कथित भ्रष्टाचार और घोटालों पर था. भाजपा प्रवक्ता प्रकाश जावडेकर का कहना था कि भ्रष्टाचार के लिए केवल डीएमके या गठबंधन दलों के नेता जिम्मेदार नही हैं. उन्होंने आरोप लगाया, ''प्रधानमंत्री डाक्टर मनमोहन सिंह भ्रष्टाचार के लिए स्वयं जिम्मेदार हैं और उन्होंने शासन में बने रहने का नैतिक अधिकार खो दिया है.''

  बैठक में शामिल एक भाजपा नेता का कहना था कि अध्यक्ष गडकरी के भाषण अथवा राजनीतिक प्रस्ताव में आगे के लिए कोई राजनीतिक दिशा स्पष्ट नही हुई, इससे पार्टी नेताओं में बैठक में अब तक की कार्यवाही से निराशा हुई है. इस नेता का कहना था कि अभी तक केवल लंबे और उबाऊ भाषण हुए हैं, जिनसे पार्टी के आम कार्यकर्ताओं अथवा समर्थकों को ये समझ में नही आता कि अगले साल उत्तर प्रदेश विधान सभा के चुनाव और 2014 के लोक सभा चुनाव में भाजपा अपनी खोई हुई जमीन वापस कैसे पाएगी..

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