बाबा और सरकार की बात पारदर्शी हो. - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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शनिवार, 4 जून 2011

बाबा और सरकार की बात पारदर्शी हो.

जब बाबा रामदेव का अनशन आम आदमी का भ्रष्टाचार के खिलाफ अनशन बन चुका हैं, तब बाबा और सरकारी प्रतिनिधियों की बात पारदर्शी तरीके से होने की अपेक्षा देश करता है। ऐसी ही मांग नीमच की एक आरटीआई एक्टिविस्ट और सामाजिक कार्यकर्ता कुसुम चंद्रशेखर गौड़ ने की है।

उनकी मांगें है कि -
सरकार से होने वाली बाबा रामदेव की सारी वार्ताएं पूर्ण रूप से पारदर्शी होकर कैमरे के सामने हों, ताकि जनता सरकार की मंशा को सीधे अपनी आंखों से देख सके। जब संसद की वार्ताओं को राष्ट्र सीधे देख सकता हैं तो इन वार्ताओं को बंद कमरों में करने का क्या औचित्य? पर्दे के सामने बात करने से परहेज कैसा?

राष्ट्र हित में ज्यादा अच्छा होगा कि बाबा रामदेव काले धन को राष्ट्रीय सम्पति घोषित करवाने से पहले मांग करें कि सरकार स्विस और अन्य विदेशी बैंको में भारतीयों द्वारा जमा काले धन की निकासी को तुरंत रोकने का प्रस्ताव सम्बंधित देशों को भेजे, उनके समस्त खाते तुरंत फ्रीज किए जाएं ताकि काले धन के जमाकर्ता धन की निकासी नहीं कर सके। अन्यथा कानून बनाने में लगी समय सीमा इनके धन को सुरक्षित ठिकाने पर पहुंचाने का गोल्डन आवर साबित होगी।

बाबा रामदेव ने कुछ दिनों पहले प्रेस वार्ता में ऐलान किया था कि मेरे पास कुछ सत्ता पक्ष और विपक्ष से जुड़ें लोगों के नाम हैं, जिनका काला धन विदेशी बैंकों में जमा हैं जिनको सही समय आने पर जांच पड़ताल कर देश को बता दिया जाएगा। आखिर वह शुभ समय कब आएगा? राष्ट्र को उन काले नामों को जानने के लिए और कितना इन्तजार करना पड़ेगा? आखिर बाबा रामदेव उन लोगों को सत्ता और समाज से रुखसत करने के बारे में कब दबाव बनाएंगे?

बाबा रामदेव कहते हैं कि मेरी लड़ाई सत्ता नहीं व्यस्था परिवर्तन के खिलाफ हैं, तो क्या वह ऐसी सत्ता के समर्थक हैं जिसके बेकाबू मंत्रियों ने लाखों-करोड़ों रुपयों की लूट-खसोट मचाई? क्या बिना भ्रष्ट सत्ता बदले व्यस्था बदलना संभव हैं?

बाबा कहते हैं भ्रष्ट मंत्रियों और अधिकारियों को फांसी की सजा मिलनी चाहिए, बाबा की नजर में वो भ्रष्ट मंत्री कौन-कौन हैं? क्या वो लॉबिस्ट, पत्रकार, राजनेता या मंत्री भ्रष्ट नहीं हैं जिनकी काली जुगाड़ों का खेल जनता ने राडिया टेपों में सुना है? क्या बाबा कि नजर में ये राडिया टीम के खिलाड़ी बाबा की भ्रष्टाचार की परिभाषा से दूर हैं? क्या ये कठोर सजा के हकदार नहीं हैं? जनता बाबा से अपेक्षा करती हैं कि अब खुलकर भ्रष्ट तत्वों पर हमला करें पूरा देश साथ उनके साथ होगा

1 टिप्पणी:

Udan Tashtari ने कहा…

पारदर्शिता नहीं होगी तो ऐसी चिट्ठियाँ सामने आती रहेंगी.