बहिष्कार विपक्ष का लोकतांत्रिक अधिकार. - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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मंगलवार, 22 नवंबर 2011

बहिष्कार विपक्ष का लोकतांत्रिक अधिकार.

संसद के शीतकालीन सत्र में राजग द्वारा गृह मंत्री पी चिदंबरम का बहिष्कार करने के फैसले को पूरी तरह से जायज ठहराते हुए भाजपा ने कहा कि यह विपक्ष का लोकतांत्रिक अधिकार है। उसने कहा कि 2जी स्पेक्ट्रम मामले में प्रधानमंत्री के नाम लिखे वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी के नोट के सार्वजनिक होने के मद्देनजर ऐसा किया जाना स्वभाविक कदम है।

संसद भवन परिसर में भाजपा के वरिष्ठ नेता वेंकैया नायडू ने संवाददाताओं से कहा कि प्रधानमंत्री के नाम प्रणब के नोट को पढ़ने के बाद कोई भी चिदंबरम से इस्तीफा देने के लिए कहे बिना नहीं रह सकता है। हमने भी ऐसा ही किया है। कांग्रेस पूर्व में जॉर्ज फर्नांडिस के साथ ऐसा कर चुकी है जब निर्दोष जार्ज को उन्होंने छह महीने तक बोलने नहीं दिया था।

राजग के फैसले के तहत शीतकालीन सत्र के पहले ही दिन लोकसभा में मंगलवार को प्रश्नकाल के दौरान विपक्ष ने चिदंबरम को गृह मंत्रालय से संबंधित प्रश्न का उत्तर नहीं देने दिया। यह पूछे जाने पर कि क्या विपक्ष इस मामले में राजनीति कर रही है, भाजपा नेता ने कहा कि इसमें राजनीति जैसी कोई बात नहीं है, हम अपने लोकतांत्रिक अधिकारों का उपयोग कर रहे हैं। यह कोई व्यक्तिगत विषय नहीं है क्योंकि प्रणब के पत्र में कहा गया है कि तत्कालीन वित्त मंत्री (चिदंबरम) ने पहल की होती तो यह घोटाला रोका जा सकता था।

नायडू ने कहा कि हमारी संसद की कार्यवाही बाधित करने में कोई रुचि नहीं है। हमने महंगाई, कालाधन पर कार्यस्थगन का नोटिस दिया है, अब देखना है कि लोकसभा अध्यक्ष इस पर क्या व्यवस्था देती हैं। भाजपा नेता बलवीर पुंज ने भी चिदंबरम के बहिष्कार को सही ठहराते हुए उनके इस्तीफे की मांग की। 2जी स्पेक्ट्रम आवंटन मामले में चिदंबरम के इस्तीफे की मांग करते हुए राजग ने शीतकालीन सत्र के दौरान गृह मंत्री का बहिष्कार करने का निर्णय किया है। राजग ने सोमवार को फैसला किया था कि चिदंबरम के इस्तीफे तक संसद में उन्हें बोलने नहीं दिया जाएगा।

लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार द्वारा प्रश्नकाल शुरू करने के निर्देश के बाद राजद के रघुवंश प्रसाद सिंह ने बिहार समेत देश में विभिन्न क्षेत्रों में नक्सल समस्या एवं प्रभाव के बारे में प्रश्न पूछा। गृह मंत्रालय से संबंधित इस प्रश्न का उत्तर देने जैसे चिदंबरम खड़े हुए राजग सदस्यों ने इसका जबर्दस्त विरोध किया और उन्हें अपने स्थान पर बैठने को मजबूर होना पड़ा। राजग ने फैसला किया है कि चिदंबरम के साथ वैसा ही व्यवहार किया जायेगा, जैसा जार्ज फर्नांडिस के साथ किया गया था। राजग शासन के दौरान ताबूत घोटाले को लेकर कांग्रेस ने तत्कालीन रक्षा मंत्री फर्नांडिस का बहिष्कार किया था।

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