ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर बढ़ती चिंता के बीच अमरीका, ब्रिटेन और कनाडा ने उस पर नए प्रतिबंध लगाने की घोषणा की है. अमरीकी विदेश मंत्री ने कहा है कि इससे ईरान पर पर्याप्त दबाव बढ़ेगा. ब्रिटेन ने कहा था कि वह ईरानी बैंकों के साथ सभी तरह के लेनदेन बंद कर रहा है वहीं कनाडा ने कहा है कि पेट्रोकेमिकल, तेल और गैस से जुड़े उद्योगों के लिए सभी तरह के निर्यात पर रोक लगा रहा है.
संयुक्त राष्ट्र ने अपनी ताज़ा रिपोर्ट में अब तक का सबसे पुख़्ता सबूत पेश किए हैं जिसमें संकेत मिलते हैं कि ईरान परमाणु हथियार बनाने में लगा हुआ था. हालांकि ईरान इससे इनकार करता है और कहता है कि उसका परमाणु कार्यक्रम शांति पूर्ण कार्यों के लिए ही है. इस रिपोर्ट के बाद भी ईरान का मामला संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद को नहीं भेजा गया क्योंकि रूस और चीन इस प्रस्ताव का विरोध करते हैं.
वॉशिंगटन में विदेश विभाग में पत्रकारों से चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि अमरीका उम्मीद कर रहा है कि और भी देश ईरान के ख़िलाफ़ प्रतिबंध लगाएँगे. इसके अलावा अमरीका ने चिंता जताई है कि ईरान कालेधन को सफ़ेद करने के उद्यम में लगा हुआ है. अमरीकी वित्तमंत्री तिमोथी गीथनर ने चेतावनी देते हुए कहा है कि किसी भी अंतरराष्ट्रीय बैंक को ईरान के साथ लेनदेन करते हुए एहतियात बरतना चाहिए क्योंकि इससे ईरान के परमाणु कार्यक्रम को सहायता मिल सकती है.
मंत्रालय की ओर से जारी एक बयान में कहा है, "ईरानी बैंक ईरान के परमाणु कार्यक्रम के लिए धन मुहैया कराने में अहम भूमिका निभाते हैं. परमाणु प्रसार में लगी कंपनियों को बैंकों की ज़रूरत पड़ती है. ईरानी बैंकों के साथ नाता तोड़कर हम ये सुनिश्चित करना चाहते हैं कि ईरानी बैंक ब्रितानी वित्तीय क्षेत्र का इस्तेमाल परमाणु प्रसार से जुड़ी किसी गतिविधि के लिए न कर पाए."
अमरीकी विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन ने कहा है कि नए प्रतिबंधों के तहत ईरान की पेट्रोकेमिकल, तेल और गैस कंपनियों और वित्तीय संस्थानों को निशाना बनाया जाएगा. हिलेरी क्लिंटन ने कहा, "संदेश साफ़ है. यदि ये प्रतिबंध जारी रहते हैं तो ईरान पर दबाव बढ़ेगा और वह अलग-थलग पड़ जाएगा. अमरीका इसके लिए नए क़दम उठा रहा है."

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