अमरीकी वायु सेना ने 14 टन के वज़न वाले एक विशालकाय बम को अपने हथियारों में शामिल किया है जो फटने से पहले भूमिगत बंकरो और 60 मीटर तक के कॉनक्रीट को भेदने की क्षमता रखता है.
अमरीकी वायु सेना के लेफ़्टिनेंट कर्नल जैक मिलर ने कहा, ''मैसिव ऑर्डिनेंस पेनेट्रेटर (एमओपी) नाम का यह बम वायु सेना को सितंबर से मिलना शुरु हुआ.''
जैक मिलर ने बताया कि विमान बनाने वाली कंपनी बोइंग अमरीकी वायु सेना के लिए ऐसे आठ बम बनाएगी. इसके लिए बोइंग के साथ अगस्त में 3.20 करोड़ डॉलर का अनुबंध किया गया है. अमरीकी वायु सेना ने यह नहीं बताया है कि अभी तक कितने एमओपी बमों की आपूर्ती की जा चुकी है.
क़रीब 20 फ़ीट लंबा एमओपी बम 2.5 टन विस्फ़ोटकों से लैस है और सैटेलाइट (जीपीएस) प्रणाली से चलता है यानी ये उपग्रह संचालित है. ज़मीन के नीचे छिपाए गए परमाणु हथियारों को नष्ट करने के लिए इसे बी-2 बम वाहक लड़ाकू विमान के ज़रिए लक्ष्य तक पहुँचाया जा सकता है. पर्यवेक्षक मानते हैं कि एमओपी बमों को ईरान और उत्तर कोरिया के गहरे बंकरो और सुरंगो को ध्यान में रखते हुए बनाया गया है.
डिफ़ेंस थ्रैट रिडक्शन एजेंसी और यूएस स्ट्रैटेजिक कमांड की वेबसाइटों पर मौजूद जानकारी के मुताबिक़ यह बम ''विरोधियों के सामूहिक विनाश के हथियारों को उनके ज़मीन से छोड़े जाने से पहले ही नष्ट कर देगा.'' साल 2007 से ही अमरीका एमओपी बम बनाने में जुटा है. एमओपी बम को इस तरीके से बनाया गया है कि फटने से पहले यह 200 फ़ीट तक की ठोस दीवार को भेद सकता है.
अमरीकी वायु सेना में शामिल किए गए बम बीएलयू-109 से एमओपी क़रीब दस गुना ज़्यादा ताकतवर है. एमओपी का वज़न अफ़ग़ानिस्तान के तोरा बोरा और वियतनाम में इस्तेमाल किए गए बम 'डेज़ी कटर' से दोगुना है. डेज़ी कटर' को अब 'रिटायर' किया जा चुका है और उसकी जगह मैसिव ऑर्डिनेंस एयर ब्लास्ट (एमओएबी) बम को उपयोग के लिए रखा गया है.

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