बिहार के कहलगांव की दो यूनिटें दस दिनों से बंद होने से राज्य में बिजली संकट पैदा हो गया है. तालचर की एक इकाई में उत्पादन बंद होते ही प्रदेश भीषण बिजली संकट की चपेट में आ गया है. प्रदेश की बिजली आपूर्ति व्यवस्था चरमरा गयी है.
पहले से कहलगांव और फरक्का की दो-दो इकाइयों से बिजली उत्पादन बंद है. मंगलवार को प्रदेश को कुल 1160 मेगावाट बिजली मिली. इसमें से मार्केट से खरीद की गयी 200 मेगावाट बिजली शामिल है. जबकि मांग 2500 मेगावाट से अधिक की हो रही है. बिजली संकट के चलते पटना छोड़कर राज्य के सभी शहरी क्षेत्रों में बिजली कटौती जारी है।
केन्द्रीय सेक्टर से 1833 मेगावाट के बदले मात्र 960 मेगावाट बिजली मिल रही है. केन्द्रीय सेक्टर से हिस्सेदारी की आधी बिजली ही बिहार को मिल रही है. बिहार के तापघरों में राज्य की करीब 1363 मेगावाट हिस्सेदारी है. इन तापघरों से मात्र 490 मेगावाट बिजली मिली.
बिहार राज्य विद्युत बोर्ड के जनसंपर्क निदेशक हरेराम पाण्डेय ने बताया कि केन्द्रीय सेक्टर की पांच इकाइयों से उत्पादन ठप होने का प्रभाव प्रदेश की बिजली आपूर्ति व्यवस्था पर पड़ रहा है. गौरतलब है कि कहलगांव स्थित एनटीपीसी की 7 इकाइयों में से 3 इकाइयों में कम कोयला आपूर्ति के कारण बिजली उत्पादन पहले से ठप है. 2340 मेगावाट क्षमतावाली कहलगांव सुपर ताप बिजली परियोजना चालू 4 इकाइयों को काफी कम लोड पर चलाया जा रहा है और उनसे फिलहाल मात्र 750 से 800 मेगावाट बिजली का ही उत्पादन हो पा रहा है.
परियोजना के पहले चरण की 210 मेगावाट वाली तीसरी इकाई, दूसरे चरण की 500 मेगावाट वाली पांचवीं और छठी इकाई को कोयला संकट के कारण बंद कर देना पडा था. पहले चरण की पहली, दूसरी और चौथी इकाइयों से ही करीब 400 मेगावाट तथा दूसरे चरण की सातवीं इकाई से मात्र 350 मेगावाट बिजली उत्पादन हो रहा है. राज्य के पास 1200 मेगावाट बिजली है. इसमें एनटीपीसी, कहलागांव से करीब 450 की अपेक्षा सिर्फ 220 मेगावाट बिजली मिल रही है. इस वजह से भागलपुर को कोटे की बिजली आपूर्ति करने में हाथ खड़े कर दिये है.
एनटीपीसी, कहलागांव के सूत्र के अनुसार उत्पादन में कमी के कारण राज्य को कोटे की बिजली नहीं मिल रही है. अचानक बिजली आने के साथ लोड बढ़ने के कारण सीएस सब स्टेशन के पावर ट्रांसफारमर का जंफर कट गया. इससे भीखनपुर व घंटा घर फीडर के आपूर्ति क्षेत्र को तीन में से एक फेज को बिजली नहीं मिल सकी.
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