हरियाणा के पूर्व मंत्री गोपाल कांडा की जमानत अर्जी को अदालत ने आज खारिज कर दिया। इससे पहले उनकी सहयोगी अरुणा चडढा को अदालत ने दो दिनों की पुलिस हिरासत में भेज दिया था।
इससे पहले हरियाणा के पूर्व मंत्री गोपाल गोयल कांडा ने पूर्व एयरहोस्टेस गीतिका शर्मा आत्महत्या मामले में अपनी गिरफ्तारी की आशंका को देखते हुए यहां दिल्ली की एक अदालत में अग्रिम जमानत याचिका दायर की थी। याचिका पर सत्र न्यायाधीश ने गुरुवार को शाम चार बजे तक के लिये अपना आदेश सुरक्षित कर लिया।
कांडा के वकील के टी एस तुलसी ने अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश रजनीश भटनागर की अदालत में याचिका दायर करते हुए कहा कि गीतिका के आत्महत्या से पहले लिखे गये पत्र से पता चलता है कि उसके मन में जलन और उनके मुवक्किल के खिलाफ प्यार और घृणा की मिली जुली भावना थी। याचिका में कांडा की ओर से कहा गया है कि गीतिका ने कहीं भी यह नहीं कहा कि मैंने उसे आत्महत्या के लिये उकसाया था। तुलसी ने गीतिका के चार अगस्त के नोट का हवाला देते हुए कहा कि उसमें उसने कहा है कि वह भीतर तक हिल गयी है, क्योंकि उसके साथ विश्वासघात किया गया है और कांडा धोखेबाज है। गीतिका ने कांडा तथा उसकी सहायक अरुणा चडढा को उसकी मौत के लिये जिम्मेदार ठहराया है।
तुलसी ने कहा कि नोट से पता चलता है कि वह मानसिक रूप से अशांत थी। तुलसी ने गीतिका के एक अन्य पत्र का हवाला दिया जिसमें उसने कहा है कि गोपाल धोखेबाज है। उसकी हमेशा लड़कियों पर बुरी नजर रहती है। उसे शर्मिंदगी का कोई अहसास नहीं है और न ही कोई अपराधबोध है, उसके एक और लड़की से नाजायज संबन्ध हैं और उससे एक बच्चा भी है। तुलसी ने कहा कि इससे पता चलता है कि कांडा के अन्य लड़कियों से ताल्लुकात से गीतिका को जलन होती थी और पीड़िता का उनसे भावनात्मक लगाव था और उससे संबन्ध बनाना चाहती थी लेकिन वह इच्छुक नहीं था। कांडा की फर्म में काम कर चुकी गीतिका का जिक्र करते हुए तुलसी ने कहा कि हो सकता है कि उसने अपने को ठुकराया हुआ महसूस किया हो।
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