बहुब्रांड खुदरा में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) के मुद्दे पर शुक्रवार को राज्यसभा में भी सरकार जीत गई। लोकसभा में दो दिन पहले ही सरकार ने इस मुद्दे पर जीत हासिल कर ली थी। इसके साथ ही देश के बहुब्रांड खुदरा क्षेत्र में एफडीआई का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है। इस कदम को प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की आर्थिक सुधार प्रक्रिया में एक बड़े कदम के रूप में देखा जा रहा है।
मुलायम सिंह यादव की समाजवादी पार्टी (सपा) और मायावती की बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की मदद से सरकार ने राज्यसभा में एफडीआई के मुद्दे पर 14 मतों के अंतर से जीत दर्ज कराई। सदन में विपक्ष द्वारा पेश प्रस्ताव के समर्थन में 109 वोट पड़े, जबकि सरकार को 123 वोट प्राप्त हुए। एक सदस्य सचिन तेंदुलकर कोलकाता में इंग्लैंड के खिलाफ क्रिकेट मैच में व्यस्त होने के कारण सदन में अनुपस्थित थे।
मतदान प्रक्रिया शुरू होने के चंद मिनट पहले सपा ने अपने नौ सांसदों सहित सदन का बहिर्गमन किया, जैसा कि उसने बुधवार को लोकसभा में मतदान से पहले किया था। राज्यसभा में इस मुद्दे पर बहस के पहले दिन गुरुवार को मायावती ने सदन में कहा था कि उनकी पार्टी के 15 सांसद सरकार के पक्ष में मतदान करेंगे।
सपा, बसपा, सरकार को बाहर से समर्थन देते हैं। सरकार की इस जीत के साथ ही बहुब्रांड खुदरा में 51 प्रतिशत प्रत्यक्ष विदेशी निवेश लाने का रास्ता साफ हो गया है। इस विवादास्पद मुद्दे को लेकर संसद के शीतकालीन सत्र का प्रथम दो सप्ताह पूरी तरह बाधित रहा था।
अब कैरेफोर, टेस्को और वाल-मार्ट जैसे वैश्विक ब्रांड भारत में अपने स्टोर खोल सकेंगे। बहस के दौरान सदन को सम्बोधित करते हुए वाणिज्य मंत्री आनंद शर्मा ने विपक्ष पर हमला किया और कहा कि सरकार ने इस मुद्दे पर किसानों, व्यापारियों, उपभोक्ताओं, राज्यों, हर किसी से बातचीत की। शर्मा ने कहा कि सरकार ने इस मुद्दे पर अंतर मंत्रालयी चर्चा भी की, सिफारिशों को सुना और उसके बाद निर्णय लिया गया।
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