खबर बेतिया, चम्पारण (बिहार) से (13 मई) - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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सोमवार, 13 मई 2013

खबर बेतिया, चम्पारण (बिहार) से (13 मई)


सीएम सचिवालय के आदेश पर भी नहीं बना ध्वस्त पुल 

बेतिया नगर परिषद अंतर्गत लालबाजार चैक से चर्च रोड जाने वाली सड़क का उच्चीकरण और ध्वस्त पुल का निर्माण अब तक नहीं हो सका है। जबकि रोज इस ध्वस्त पुल के गड्ढे में वाहन फसंते हैं और चार-पांच घंटे तक सड़क जाम की स्थिति बनी रहती है। वैसे इस मामले में मुख्यमंत्री सचिवालय के संदर्भ संख्या 0911120248 दिनांक 9 नवंबर 2012 को ही जनशिकायत पदाधिकारी नगर विकास एवं आवास विभाग बिहार पटना की ओर से एक पत्र नगर परिषद बेतिया के कार्यपालक पदाधिकारी के नाम से आया था। जिसमंे नियमानुसार त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करते हुए एक सप्ताह के अंदर कार्यान्वयन प्रतिवेदन सह जांच प्रतिवेदन मुख्यमंत्री सचिवालय, जनशिकायत कोषांग एवं आवेदक को प्रेषित करने की बात कही गई थी। बताते हैं कि बेतिया के प्रखंड बीस सूत्री सदस्य जहांगीर आलम ने इस मामले में मुख्यमंत्री को आवेदन देकर बताया था कि लालबाजार वार्ड 21 और 24 के बीच स्थित यह पुल सह सड़क लेबल से दो फीट नीचे हो चुका है। इसके खतरनाक स्थिति का अंदाजा इससे ही लगाया जा सकता है कि व्यवसायिक एवं अतिव्यस्त इस मार्ग से दर्जनों विद्यालयों के छात्र गुजरते हैं। जबकि हल्की बारिश में भी यह सड़क तालाब बन जाता है। 

नहीं मिला गायब नाजिर का सुराग, एक सप्ताह बीत गये
  • परिजन काट रहे पुलिस के आला अधिकारियों के कार्यालयों का चक्कर


आठ दिनों के बाद भी पुलिस को प.चम्पारण समाहरणालय से गायब हुए नाजिर का कोई सुराग नहीं मिल सका है। हालांकि पुलिस ने इस मामले में अपनी कार्रवाई तेज कर दी है। लेकिन अभी पुलिस हवा में तीर मार रही है। पुलिस अभी तक यह तय नहीं कर पाई है कि नाजिर गायब हो गए या गायब कर दिए गए। वैसे नाजिर के परिजनों ने नगर थाने में अपहरण का एक मामला दर्ज कराया है। जिसके आधार पर पुलिस विभिन्न ठिकानों पर अपना हाथ पांव मार रही है। लेकिन इस मामले में अब तक पुलिस को कोई ठोस सुराग हाथ नहीं लग सका है। बताते चलें कि गत छह मई को बेतिया समाहरणालय परिसर से नाजिर अरविंद कुमार वर्मा करीब दिन के दो बजे दोपहर में गायब हो गए थे। जबकि नाजिर का चश्मा, मोबाइल एवं चाबी भी उनके कार्यालय कक्ष के टेबुल पर ही पायी गई थी। कार्यालय कर्मियों के अनुसार नाजिर कार्यालय से यह कहकर बाहर गए थे कि वे सेविंग कराकर आ रहे हैं। उसके बाद से अब तक नाजिर का कोई अता-पता नहीं चल सका है। इस बात से पूरे समाहरणालय के कर्मी काफी चिंतित और भयभीत नजर आ रहे हैं। इधर पुलिस पदाधिकारियों का कहना है कि खोजबीन के क्रम में विभिन्न संभावित ठिकानों पर जिले से लेकर पटना तक छापेमारी की गई है, लेकिन अब तक कोई ठोस सबूत हाथ नहीं लग सका है। इधर नाजिर के परिजन पुलिस के आला अधिकारियों के कार्यालयों का चक्कर काट रहे हैं। 

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