भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी ने कर्नाटक विधानसभा चुनाव नतीजों को चौंकाने वाला नहीं, बल्कि स्वाभाविक बताया। उन्होंने रविवार को कहा कि बी.एस. येदियुरप्पा पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों का तत्काल माकूल जवाब देने में पार्टी चूक गई और राज्य में पार्टी की यह दशा निश्चित रूप से अवसरवाद का नतीजा है। पवन कुमार बंसल तथा अश्विनी कुमार से उनके केंद्रीय मंत्री के पदों से इस्तीफा मांगने के लिए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को उकसाए जाने की खबरों को सही बताते हुए आडवाणी ने प्रधानमंत्री के इस्तीफे की भी मांग की।
ब्लॉग पर अपने ताजा पोस्ट में आडवाणी ने कहा है कि कर्नाटक में पार्टी की हार का उन्हें खेद है, किंतु चुनाव के नतीजों से उन्हें कोई आश्चर्य नहीं हुआ। आडवाणी ने ब्लॉग पर कहा, "आश्चर्य तब होता जब हम जीत जाते।" आडवाणी ने कहा कि कर्नाटक चुनाव के नतीजे पार्टी के लिए गंभीर सबक हैं। हाल ही में संपन्न कर्नाटक विधानसभा चुनाव में भाजपा वर्ष 2008 की 110 सीटों की तुलना में इस बार मात्र 40 सीटों पर ही जीत दर्ज कर सकी। आडवाणी ने हालांकि इसे कांग्रेस के लिए भी सबक बताया।
आडवाणी ने अपने ब्लॉग में कहा, "हम दोनों के लिए ही इससे एक सबक मिला है कि आम आवाम को हल्के में नहीं लेना चाहिए.. अगर भ्रष्टाचार बेंगलुरू में सत्ता पलट सकता है तो दिल्ली में क्यों नहीं।" आडवाणी ने अपने ब्लॉग में दावा किया कि आम आदमी कुछ अवसरों पर नैतिक मूल्यों से डिग सकता है, लेकिन जब वह राष्ट्रीय स्तर पर लोगों को अनैतिक व्यवहार करता हुआ देखता है तो वह बेहद क्रोधित हो उठता है। उन्होंने कहा कि यही कारण है कि आजकल राजनीतिज्ञों को लोगों की घृणा का सामना करना पड़ रहा है।
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