पाकिस्तान में हिंसक घटनाओं और धांधली के आरोपों के बीच आम चुनावों के लिए वोट डाले जा रहे हैं. पाकिस्तान के सबसे बड़े शहर कराची में पुलिस ने कहा है कि आवामी नेशनल पार्टी के दफ्तर के बाहर हुए धमाके में 11 लोग मारे गए हैं जबकि 40 से ज्यादा घायल बताए जाते हैं. तालिबान ने इस हमले की ज़िम्मेदारी स्वीकार की है.
तालिबान के प्रवक्ता एहसानुल्लाह एहसान ने कहा है, "हम बहुत फ़ख़्र के साथ इस हमले की ज़िम्मेदारी क़बूल करते है, इस हमले को हमने अंजाम दिया है और हम इसी तरह के और हमले करेंगे." दूसरी तरफ जमाते इस्लामी ने कराची और हैदराबाद में चुनाव का बहिष्कार किया है जबकि मुत्तेहिदा कौमी मूवमेंट (एमक्यूएम) ने चुनावों में धांधली के आरोप लगाया है.
एमक्यूएम का कहना है कि सौ से अधिक मतदान केंद्रों ने मतदान पेटियां जानबूझ कर देर से पहुंचाई गईं. एमक्यूएम का कहना है कि ये वही इलाके हैं जहां उसका सबसे ज्यादा असर है. अफ़गानिस्तान की सीमा से लगने वाले इलाके में एक मतदान केंद्र पर हुई गोलीबारी में कम से कम एक व्यक्ति की मौत हो गई है. इसके अलावा पेशावर में भी एक हमला हुआ है जिसमें कई लोगों के घायल होने की खबर है. बलूचिस्तान के बारखान क्षेत्र में एक मतदान केंद्र पर राकेट दाग़े गए हैं. कई इलाकों में हिंसक घटनाओं के बावजूद देश भर में आम लोग बढ़ चढ़ कर चुनावों में हिस्सा ले रहे हैं. हालांकि तालिबान समेत कुछ चरमपंथी संगठनों ने लोगों को चुनाव प्रक्रिया से अलग रहने को कहा था.
इस बार के चुनाव प्रचार में कई पार्टियों और उनके उम्मीदवारों को निशाना बनाया गया जिसमें कम से कम 110 लोग मारे गए और सैकड़ों घायल हो गए. चुनावों में मुख्य मुकाबला पीएमएल(एन) और क्रिकेटर से राजनेता बने इमरान खान की पार्टी तहरीके इंसाफ के बीच बताया जाता है. यूरोपीय संघ से आए चुनाव पर्यवेक्षकों ने कहा है कि इंतज़ाम पहले की तुलना में बेहतर हैं.
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