इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने अपनी बेटी आरुषि और घरेलू नौकर हेमराज की हत्या के आरोपी दंतचिकित्सक दंपति राजेश और नूपुर तलवार की निचली अदालत में 14 गवाहों को बुलाने और उनके बयान दर्ज कराने की याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रखा।
न्यायमूर्ति राजेश दयाल खरे ने नोएडा आधारित दंपति की याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रखा। दंतचिकित्सक दंपति ने 15 मई को अपनी याचिका दायर की थी। तलवार दंपति ने सीबीआई अदालत के चार मई के आदेश को चुनौती दी है जिसमें शीर्ष आईपीएस अधिकारी अरुण कुमार समेत 14 गवाहों को अदालत में बुलाने और उनके बयान दर्ज कराने का उनका आग्रह ठुकरा दिया था। कुमार जांच के वक्त सीबीआई के संयुक्त निदेशक थे और अभी उत्तर प्रदेश के एडीजी कानून—व्यवस्था हैं।
आरुषि को 16 मई 2008 को मृत पाया गया था। उसका गला काट दिया गया था। शुरू में शक तलवार दंपति के घरेलू नौकर हेमराज पर किया गया। बाद में उसका शव भी नोएडा के जलवायु विहार स्थित तलवार दंपति के घर के टेरेस पर पाया गया।
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