केंद्रीय कानून एवं न्याय मंत्री कपिल सिब्बल ने सोमवार को कहा कि न्यायाधीशों की नियुक्ति की मौजूदा कॉलेजियम प्रणाली 'अस्पष्ट' तथा 'अपारदर्शी' है, लेकिन इसमें रातों-रात बदलाव नहीं किया जा सकता। कानून एवं न्यायमंत्री के पद से अश्विनी कुमार के इस्तीफे के बाद इस मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार संभालने के बाद सिब्बल ने संवाददाताओं से कहा, "न्यायाधीशों की नियुक्ति पारदर्शी प्रक्रिया के तहत होनी चाहिए, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि ईमानदार और उच्च योग्यता वाले लोगों की नियुक्ति इस पद पर हो सके।"
कानून एवं न्याय मंत्रालय के लिए अपने एजेंडे के बारे में पूछे जाने पर सिब्बल ने कहा कि यह अगले दो सप्ताह में स्पष्ट हो जाएगा। सिब्बल ने न्यायिक सुधार के लिए 'क्रांतिकारी' एवं 'संरचनात्मक' सुधार पर बल दिया। लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि इसे एक दिन में नहीं किया जा सकता।
उन्होंने कहा, "करीब 10 लाख की आबादी पर हमारे पास 12-13 न्यायाधीश हैं। यदि दो से तीन करोड़ मामले लंबित हैं तो क्या मैं इसे एक दिन में बदल सकता हूं? राज्य सरकारों के साथ बातचीत की जरूरत है। नए तरीके से सोचने की जरूरत है। यह एक दिन में नहीं किया जा सकता।"

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