चुनाव भ्रष्टाचार का सबसे बड़ा स्रोत : कुरैशी - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

Breaking

प्रबिसि नगर कीजै सब काजा । हृदय राखि कौशलपुर राजा।। -- मंगल भवन अमंगल हारी। द्रवहु सुदसरथ अजिर बिहारी ।। -- सब नर करहिं परस्पर प्रीति । चलहिं स्वधर्म निरत श्रुतिनीति ।। -- तेहि अवसर सुनि शिव धनु भंगा । आयउ भृगुकुल कमल पतंगा।। -- राजिव नयन धरैधनु सायक । भगत विपत्ति भंजनु सुखदायक।। -- अनुचित बहुत कहेउं अग्याता । छमहु क्षमा मंदिर दोउ भ्राता।। -- हरि अनन्त हरि कथा अनन्ता। कहहि सुनहि बहुविधि सब संता। -- साधक नाम जपहिं लय लाएं। होहिं सिद्ध अनिमादिक पाएं।। -- अतिथि पूज्य प्रियतम पुरारि के । कामद धन दारिद्र दवारिके।।

शनिवार, 18 मई 2013

चुनाव भ्रष्टाचार का सबसे बड़ा स्रोत : कुरैशी


पूर्व मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) एस. वाई. कुरैशी ने चुनाव सुधारों पर जोर देते हुए कहा है कि देश में चुनाव, भ्रष्टाचार का सबसे बड़ा स्रोत बन चुका है। कुरैशी ने यहां शुक्रवार को ब्रिटिश काउंसिल में एक व्याख्यान देते हुए कहा, "चुनाव इस समय देश में भ्रष्टाचार का सबसे बड़ा स्रोत बन चुका है।" कुरैशी ने कहा, "राजनीतिक सत्ता ताकतवर है और प्रतिस्पर्धा कड़वी है। चुनाव में अपराधियों का हस्तक्षेप और बूथ कैप्चरिंग सबसे बड़ी चुनौती है।" कुरैशी के अनुसार, राजनीतिज्ञों और नौकरशाहों के बीच मिलीभगत तब शुरू होती है, जब कोई राजनीतिज्ञ मंत्री बन जाता है और चुनाव के दौरान खर्च हुए धन को गलत तरीकों से हासिल करना शुरू करता है।

पूर्व निर्वाचन समिति के अध्यक्ष कुरैशी ने बताया कि वर्तमान लोकसभा के 543 सदस्यों में से 162 सदस्यों पर आपराधिक मामले चल रहे हैं। उन्होंने बताया कि इसमें पिछली लोकसभा की अपेक्षा वृद्धि ही हुई है, क्योंकि पूर्व की लोकसभा में 124 सदस्यों पर ही आपराधिक मामले दर्ज थे। कुरैशी ने कहा कि अपराधियों को चुनाव लड़ने से रोकने का राजनीति दल विरोध कर रहे हैं, क्योंकि इसके पीछे उनका तर्क है कि राजनेताओं पर विपक्षी दलों द्वारा मामला दर्ज कराया जा सकता है।

उन्होंने कहा, "हमारा कहना है कि जिनके खिलाफ मामला चल रहा है उन्हें या जिनके खिलाफ अदालत में आरोप तय कर लिए गए हों उन्हें चुनाव लड़ने से प्रतिबंधित किया जाए।" कुरैशी ने हालांकि भारतीय चुनाव के सकारात्मक पहलू भी बताए। उन्होंने कहा कि बेहतर प्रशासन के कारण लोग मत देने के प्रति आकर्षित हो रहे हैं। उन्होंने हालांकि यह भी कहा कि इसके कारण 'लोकलुभावनवाद' को बढ़ावा मिला है।

कुरैशी ने बताया, "राजनीतिक दल मतदाताओं को रंगीन टीवी, कपड़े धोने की मशीन, लैपटॉप आदि का लालच देते हैं।" उन्होंने देश में गरीबी के स्तर को देखते हुए हालांकि कहा कि अच्छा ही है कि गरीब लोगों को कुछ तो मिलता है। कुरैशी ने बताया, "हमारे यहां चुनाव में हिस्सा लेने वाले मतदाताओं की संख्या यूरोप के 50 देशों तथा अमेरिका के 56 देशों के बराबर है।"

कोई टिप्पणी नहीं: