फर्जी आई-डी पर बिक रहा है सिमकार्ड - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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सोमवार, 13 मई 2013

फर्जी आई-डी पर बिक रहा है सिमकार्ड


  • - गोली चलाने, अपहरण करने, बम फटने से पहले या यूं कहे कि अब हर अपराध के पहले सिमकार्ड बन गया है हथियार


मधेपुरा: ये देखने में भले ही छोटा है लेकिन इसका इस्तेमाल हर बड़ी वारदात में होता है। जी हां हम बात कर रहे हैं मोबाइल सिम की। बम ब्लास्ट हो या सुपारी किलिंग। डकैती हो या अपहरण हर अपराध में होता है इसका प्रयोग। अपराधी फर्जी आई-डी का सहारा लेकर इसे हासिल करते हैं और वारदात के बाद इसे नश्ट कर देते हैं। पुलिस सब कुछ जानती है समझती है फिर भी इसे रोकने में नाकाम है। आमतौर पर अमीर, गरीब हर आम और खास इसका प्रयोग करते हैं अपने संवादों का प्रचार प्रसार करते हैं, लेकिन ये सिमकार्ड बन चुका है अपराध की दुनिया का छोटा मगर खास हथियार। गोली चलाने, अपहरण करने, बम फटने से पहले या यूं कहे कि अब हर अपराध के पहले सिमकार्ड बन गया है हथियार। 

सेल्यूलर सेवाओं के लिए ईजाद किया गया छोटा सा सिमकार्ड दुनिया का सबसे बड़ा हथियार बनकर उभर रहा है। असलहों की तरह लाइसेंस की व्यवस्था न होने से इस घातक हथियार को आसानी से खरीदकर किसी भी संगीन वारदात को अंजाम दिया जा सकता है। ये छोटे से छोटे अपराधी का सबसे बड़ा हथियार और सुरक्षा कवच है। इसके बावजूद राजधानी में सिमकार्ड के विके्रता बिना किसी आईडी प्रूफ के ही इसे बेच रहे हैं। सिम के आसानी से मिलने की वजह से अपराध जगत में इसका प्रयोग धड़ल्ले से किया जा रहा है। इसकी कहानी भी एक्षन फिल्मों से कम नहीं होती। ये अपराधी का षुरु से आखिरी तक बफादार साथी होता है। जब तक ये पुलिस के हत्थे चढ़ता है तब तक इसका काम तमाम कर दिया जाता है। बड़ी बड़ी घटना के बाद अक्सर फर्जी सिम सामने आता है। जब देष के हर आदमी की मुट्ठी में दुनिया कर दी गई है तब से हर वारदात चुटकी में की जा रही है। 

ऐसे मिलता है सिम कार्ड: डीएल पर धड़ल्ले से दुकानदार दे रहे हैं सिम, एक आई-डी पर एक से दस तक सिम, सिम लेने के साथ ही कर दी जाती है एक्टिवेट। समय समय पर होती है कार्रवाई: फर्जी आई-डी पर सिमकार्ड देने के मामले में जब मधेपुरा सदर थानाध्यक्ष से बात की गई तो उन्होंने बताया कि समय समय पर कार्रवाई की जाती है। उन्होंने कहा कि इस संबंध में पहले ही गाइडलाइन जारी किए गए हैं और तमाम सिम विक्रेताओं को सख्त हिदायत भी दी गई है ताकि गलत तरीके से सिम जारी न हो सके। 

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