केंद्र सरकार ने केंद्रीय जांच ब्यूरो को स्वतंत्रता और स्वायत्तता देने पर कानून बनाने के लिए मंगलवार को मंत्रियों के समूह का गठन कर दिया। कोयला ब्लॉक आवंटन की जांच से संबंधित जांच एजेंसी के शपथ पत्र पर सर्वोच्च न्यायालय की नाराजगी भरी टिप्पणी को देखते हुए सरकार ने यह कदम उठाया है।
मंत्रियों का समूह (जीओएम) कानून का मसौदा तैयार करने के साथ-साथ तीन सप्ताह के भीतर सरकार की ओर से दायर होने वाले शपथ पत्र का मसौदा भी तैयार करेगा। एक अधिकृत बयान में बताया गया है, ‘सीबीआई की स्वतंत्रता और उसके कामकाज को स्वायत्तता देने से संबंधित उपयुक्त कानून तैयार करने पर विचार करने के लिए प्रधानमंत्री ने जीओएम के गठन को मंजूरी दे दी है।’
जीओएम की अध्यक्षता केंद्रीय वित्त मंत्री पी. चिदंबरम करेंगे और केंद्रीय गृह मंत्री सुशीलकुमार शिंदे, संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री कपिल सिब्बल और विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद इसके सदस्य होंगे। प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री वी. नारायणसामी भी सदस्य होंगे। विज्ञप्ति में कहा गया है, ‘जीओएम कानून का मसौदा और याचिका (दीवानी) संख्या 120/2012 के आलोक में तीन सप्ताह के भीतर दायर किए जाने वाले शपथ पत्र का मसौदा तैयार करेगा।’ इसमें कहा गया है कि कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग बैठकों का विषय/कागजात/कार्य विवरण त्वरित रूप से प्रधानमंत्री कार्यालय और मंत्रिमंडल सचिवालय को अग्रसारित किया जाना सुनिश्चित करेगा।
सर्वोच्च न्यायालय ने पिछले सप्ताह सीबीआई को ‘मालिकों की भाषा बोलने वाला पिंजड़े में बंद तोता’ करार दिया था। सर्वोच्च न्यायालय ने सरकार से कहा था कि वह कब तक एजेंसी के कामकाज को स्वतंत्र करेगी। सीबीआई के निदेशक रंजीत सिन्हा ने दूसरे शपथ पत्र में स्वीकार किया था कि तत्कालीन कानून मंत्री अश्विनी कुमार और प्रधानमंत्री कार्यालय व कोयला मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने कोयला ब्लॉक आवंटन पर रिपोर्ट में कतिपय बदलाव कराए थे। इस शपथ पत्र के बाद अदालत ने टिप्पणी की थी।
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