पेड न्यूज के मुद्दे पर निर्वाचन आयोग गंभीर - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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गुरुवार, 20 जून 2013

पेड न्यूज के मुद्दे पर निर्वाचन आयोग गंभीर


भारत निर्वाचन आयोग के लिए पेड न्यूज एक चुनौती बन गया है। मुद्रण एवं दृश्य-श्रव्य माध्यम में चुनाव के दौरान मतदाताओं को लुभाने के लिए जारी किए जाने वाले 'पेड न्यूज' (प्रायोजित समाचार) को रोकने के लिए आयोग ने दिशा-निर्देश बनाए हैं और चुनाव में सोशल साइटों के उपयोग को लेकर भी गंभीर है। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में आयोजित मीडिया कार्यशाला में आयोग के प्रतिनिधियों ने पेड न्यूज को रोकने और मतदाताओं को जागरूक करने के लिए चल रही कोशिशों को पत्रकारों के बीच साझा किया। इसी वर्ष राज्य में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। लिहाजा, आयोग ने मीडिया से अपेक्षित सहयोग व जमीनी हकीकत जानने के मकसद से कार्यशाला आयोजित की।

निर्वाचन आयोग के महानिदेशक अरुण राउत ने कहा कि मीडिया आयोग का सबसे अच्छा मित्र है, चुनाव प्रबंधन के काम में मीडिया महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। दूर-दराज के इलाकों में जहां उनके पर्यवेक्षक नहीं पहुंच पाते हैं, वहां की जानकारी उन तक मीडिया के माध्यम से ही पहुंचती है। आयोग की कोशिश निष्पक्ष मतदान कराने की होती है और उसमें मीडिया मददगार की भूमिका निभाता है। उन्होंने बताया कि पेड न्यूज को रोकने के लिए आयोग की ओर से राज्य और जिला स्तर पर नजर रखने के लिए मीडिया प्रमाणन एवं निगरानी समिति भी बनाई जाती है। पेड न्यूज के प्रमाणित होने पर तय दरों के मुताबिक उसे विज्ञापन की दर से प्रत्याशी के खर्च के हिसाब में जोड़ा जाता है। इसके अलावा टेलीविजन पर दिखाए जाने वाले विज्ञापनों का ब्यौरा भी तैयार किया जाता है।

राउत ने एक सवाल के जवाब में बताया कि टेलीविजन पर प्रसारित होने वाले पेड न्यूज पर नजर रखने के लिए आयोग विशेष व्यवस्था करने वाला है। इसके तहत तमाम टेलीविजन चैनलों पर प्रसारित होने वाले न्यूज पर आयोग की टीम चौबीसों घंटे नजर रखेगी। इस दौर में न्यूज मीडिया की भी भूमिका अहम हो गई है, जिस पर नजर रखना आसान नहीं है, फिर भी आयेाग इसको लेकर गंभीर है। उप चुनाव आयुक्त आलोक शुक्ला, मध्य प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी जयदीप गोविंद ने भी पेड न्यूज की रोकथाम व मतदाता जागरूकता अभियान के सिलसिले में अपने विचार रखे। 

इस मौके पर जनसंपर्क विभाग के अपर संचालक लाजपत आहूजा भी उपस्थित थे।

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