वक्त से पहले आया मॉनसून आफत साबित हो रहा है। पहाड़ों में जहां मॉनसून की बारिश ने तबाही मचा दी है, तो दिल्ली में भी अब तक की सबसे बड़ी बाढ़ का खतरा पैदा हो गया है। हथिनीकुंड बैराज से छोड़ा गया 8 लाख 60 हजार क्यूसेक पानी तेजी से दिल्ली की ओर बढ़ रहा है। प्रशासन के मुताबिक कुछ ही घंटों में यमुना का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर पहुंच जाएगा। आशंकाओं की मानें तो ये 100 साल में दिल्ली पर सबसे बड़ा खतरा है।
घबराई दिल्ली में एक बार फिर आपात बैठकों का दौर शुरू हो गया है। लोगों को चेतावनी जारी कर दी गई है। सुबह तकरीबन 11 बजे यमुना का जलस्तर खतरे के निशान से काफी नीचे था। इससे पहले 2010 में हरियाणा के हथिनी कुंड से 7 लाख 44 हजार क्यूसेक पानी छोड़ा गया था। इसकी वजह से दिल्ली के कई इलाकों में पानी भर गया था और यमुना के किनारे के कई इलाके डूब गए थे। इस बार पानी में डूबने का खतरा दिल्ली के कई इलाकों समेत नोएडा के कुछ इलाकों पर भी मंडरा रहा है।
बाढ़ विभाग के सूत्रों की मानें तो मंगलवार से पानी बढ़ना शुरू हो जाएगा। बुधवार तक स्थिति गंभीर हो जाएगी। आशंका है कि यमुना का जलस्तर 208 मीटर तक पहुंच सकता है। ये खतरे के निशान से तकरीबन चार मीटर ऊपर होगा। जानकारों के मुताबिक आज तक राजधानी में यमुना का स्तर इतना ऊपर कभी नहीं गया है। मौसम विभाग की भविष्यवाणी के मुताबिक उत्तर भारत में अगले 24 घंटों में बारिश होगी यानि स्थिति और बिगड़ सकती है। असल में लगातार बारिश से हरियाणा में भी स्थिति गंभीर हो चुकी है। यमुनानगर में भारी बारिश की वजह दो दर्जन से ज्यादा गांव बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। यमुनानगर और उत्तर प्रदेश के सहारनपुर सीमा पर बने यमुना पुल पर पानी आने की वजह से एनएच 73 पर आवागमन बंद हो गया था। हजारों लोग अलग-अलग गांवों में फंसे हुए थे। लोगों को बचाने के लिए एनडीआरएफ की टीम और सेना के हेलीकॉप्टर को लगाना पड़ा। रात भर चले बचाव कार्य में यमुनानगर के एक गांव से 53 लोगों की जान बचाई गई।
मजबूरन प्रशासन ने हथिनीकुंड बैराज से आठ लाख क्यूसेक पानी छोड़ा। इस पानी ने करनाल में काफी तबाही मचाई है। यमुना के किनारे के कई गांव डूब गए। उनका संपर्क बाकी इलाकों से टूट गया है। यहां पानी में डूबकर एक बच्चे की मौत हो गई जबकि यमुना से सटे नाबियाबाद गुरुद्वारे में तकरीबन पांच सौ लोग फंस गए। अब यही पानी दिल्ली की तरफ आ रहा है। 100 सालों में ऐसा पहली बार हुआ है कि हथिनी कुंड से इतना ज्यादा पानी छोड़ा गया है। हथिनी कुंड में 80 हजार क्यूसेक से ज्यादा पानी नहीं रखा जा सकता है। जाहिर है लगातार बारिश बार-बार पानी छोड़े जाने का खतरा बढ़ा रही है। अगर यही हालत रही तो दिल्ली में स्थिति गंभीर होती नजर आ रही है। दिल्ली में 1978 में यमुना 207.29 के स्तर पर पहुंची थी। ये खतरे के निशान से तीन मीटर ऊपर था। लेकिन इस बार खतरा और बड़ा है।
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