योजना आयोग से चालू वित्त वर्ष के लिए 59,000 करोड़ रुपये की वार्षिक योजना की मंजूरी हासिल करने के बाद गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने राज्य में सामाजिक विकास में खामी को लेकर केंद्र की आलोचना को मंगलवार को खारिज किया। मोदी ने योजना आयोग के इस आकलन से असहमति जताई कि उनके प्रदेश में सामाजिक क्षेत्र में अभी बहुत कुछ किए जाने की जरूरत है।
भाजपा की राष्ट्रीय चुनाव अभियान समिति का प्रमुख बनने के बाद पहली बार राष्ट्रीय राजधानी आए मोदी को वार्षिक योजना व्यय के रूप में 59,000 करोड़ रुपये की मंजूरी मिली। यह 2012-13 के मुकाबले 15.7 प्रतिशत अधिक है। राज्य 2013-14 के लिए 61,000 करोड़ रुपये की वार्षिक योजना चाहता था।
योजना आयोग के उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह अहलूवालिया ने मोदी की उपस्थिति में संवाददाताओं से कहा कि गुजरात को सामाजिक क्षेत्रों में अभी काफी कुछ करने की जरूरत है। मोदी के साथ बैठक के बाद उन्होंने कहा कि सामाजिक क्षेत्र के बारे में काफी चर्चा हुई। आमतौर पर हमारा विचार है कि गुजरात को आर्थिक आकार के हिसाब से सामाजिक क्षेत्र के विकास के लिए इस क्षेत्र में विशेष ध्यान देने की जरूरत है। जब मोदी की बारी आई तो उन्होंने पलटवार करते हुए कहा कि राज्य सबका साथ, सबका विकास के लक्ष्य के साथ अपने बजट का 42 प्रतिशत सामाजिक क्षेत्र पर खर्च करता है। नरेंद्र मोदी ने कहा कि कोष से अनुसूचित जाति, पिछड़े, शोषित तथा जनजातीय समुदाय समेत समाज के सभी तबकों के उत्थान में मदद मिलेगी। हम चाहते हैं कि समाज के सभी तबकों को वृद्धि का लाभ मिले।
अहलूवालिया की बातों के जवाब में मुख्यमंत्री ने गुजरात के विकास का हवाला देते हुए कहा कि गुजरात ने भारत के विकास में महत्वपूर्ण और बड़ी भूमिका निभाई है। जीडीपी के संदर्भ में हम उन राज्यों में शामिल हैं जिनका योगदान काफी ज्यादा है। अहलूवालिया ने कहा कि गुजरात बेहतर प्रदर्शन करने वाले राज्यों में शामिल है। आर्थिक वृद्धि के संदर्भ में हमने पाया है कि गुजरात का प्रदर्शन बेहतर है।
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