उत्तराखंड में भारी बारिश का कहर जारी है। अब तक यहां बारिश और भूस्खलन से मरने वालों के संख्या 50 से ज्यादा हो गई है, जबकि 60 से ज्यादा लोग लापता है। वहीं 20 हजार से ज्यादा सैलानी चार धाम यात्रा के रास्ते में फंसे हुए हैं। बदरी−केदार और गंगोत्री घाटी के अलावा धारचूला तहसील में भी जानमाल का काफी नुकसान हुआ है। यही नहीं गोविंदघाट में एक हेलीकॉप्टर बह गया है।
तबाही इतनी ज्यादा है कि वायुसेना और सेना की मदद ली जा रही है। इन इलाकों में सशस्त्र सीमा बल यानी एसएसबी और आईटीबीपी पहले से ही राहत और बचाव के काम में जुटे हैं। यहां आपदा राहत दल की 12 टीमें भी बचाव का काम कर रही हैं।
उत्तराखंड जैसे ही हालात हिमाचल प्रदेश में बन गए हैं। भारी बारिश और भूस्खलन से अब तक यहां आठ लोगों की मौत हो चुकी है और मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह समेत एक हजार से ज्यादा सैलानी सांगला घाटी में फंसे हुए हैं। उधर, उत्तराखंड सरकार ने चार धाम की यात्रा को रोक दिया है। इसके अलावा कैलाश मानसरोवर की यात्रा को बूंदी के पास रोक दिया गया है, जिसके बाद से यहां तीस हजार से ज्यादा तीर्थयात्री और स्थानीय लोग फंसे हुए हैं।
उत्तराखंड की सभी नदियां खतरे के निशान से ऊपर हैं। कई जगह लोगों के घर, दुकान, होटल उफनती नदियों में बह गए हैं। उत्तरकाशी में भागीरथी नदी के खौफनाक बहाव से कई मकान−दुकान और होटल डूब गए। यही हाल गंगा की दूसरी सहायक नदी अलकनंदा का भी है। इसके अलवा सोमवार को भारी मूसलाधार बारिश से केदार घाटी में वासुकी ताल भी टूट गया। बद्रीनाथ और गंगोत्री जाने वाला नेशनल हाइवे कई जगह बह गया है। धारचूला खटीमा पानीपत नेशनल हाइवे भी बंद है। यहां बॉडर रोड ऑर्गेनाइजेशन यानी बीआरओ सड़क को खुलवाने की कोशिश में जुटा है, लेकिन बारिश की वजह से राहत के काम में बाधा आ रही है।
उत्तरकाशी में जोशी आरा धरासू इलाके में भगीरथी नदी के कहर से काफी नुकसान हुआ है। बद्रीनाथ में गोविंदघाट इलाके में 10 से ज्यादा इमारतें बह गई हैं। धारचुला के 45 गांवों में 400 से ज्यादा घर गंगा में समा गए हैं। उत्तराखंड में बीते दो दिनों में 270 मिलीमीटर बारिश हो चुकी है, जबकि जून महीने में अब तक यहां 340 मिलीमीटर तक बारिश होती रही है।
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