बिहार के पूर्व वित्त मंत्री सुशील कुमार मोदी ने प्रस्तावित वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) प्रणाली लागू करने के मामलों को देख रही राज्यों के वित्त मंत्रियों की अधिकार प्राप्त समिति के चेयरमैन पद से सोमवार को इस्तीफा दे दिया।
जदयू और भाजपा का गठबंधन टूटने के बाद बिहार की नीतीश सरकार में शामिल भाजपा के सभी मंत्री हटा दिए गए हैं। वित्त मंत्री पी चिदंबरम को लिखे पत्र में मोदी ने कहा है कि मैंने बिहार के उपमुख्यमंत्री एवं वित्त मंत्री का पद छोड़ दिया है। इसके साथ ही मैंने राज्यों के वित्त मंत्रियों की अधिकार प्राप्त समिति से भी इस्तीफा दे दिया है। पत्र में मोदी ने राज्यों को केंद्रीय बिक्री कर संबंधी मुआवजे जल्द से जल्द दिए जाने का आग्रह किया है, ताकि राज्यों और केंद्र के बीच भरोसा बढ़ सके और जीएसटी को जल्द से जल्द क्रियान्वित किया जा सके।
मोदी के इस्तीफे के बाद जीएसटी के क्रियान्वयन में विलम्ब हो सकता है। नए चेयरमैन को राज्यों के बीच सहमति बनाने के लिए नए सिरे से प्रयास करना होगा। वर्ष 2011 में मोदी को पश्चिम बंगाल के पूर्व वित्त मंत्री असीम दासगुप्ता की जगह जीएसटी समिति का चेयरमैन बनाया गया था। पश्चिम बंगाल में वाम मोर्चा सरकार की हार के बाद दासगुप्ता ने समिति के प्रमुख पद से इस्तीफा दे दिया था। जीएसटी विधेयक को संसद में 2010 में पेश किया गया था। फिलहाल वित्त पर स्थायी समिति इसकी जांच कर रही है। समिति द्वारा रिपोर्ट दिए जाने के बाद राज्य और केंद्र मसौदे को अंतिम रूप देंगे और इसे संसद को भेजा जाएगा।
मोदी ने पूर्व में कहा था कि इस विधेयक पर 80 प्रतिशत सहमति बन चुकी है। जीएसटी से वस्तुओं और सेवाओं के लिए एक समान कर व्यवस्था अस्तित्व में आएगी। इसके क्रियान्वयन के बाद ज्यादातर अप्रत्यक्ष कर समाप्त हो जाएंगे। राज्यों और केंद्र के बीच जीएसटी ढांचे तथा केंद्रीय बिक्रीकर मुआवजे को लेकर जारी मतभेदों की वजह से जीएसटी का क्रियान्वयन कई बार टल चुका है। परंपरागत रूप से जीएसटी समिति के चेयरमैन का पद किसी विपक्षी वित्त मंत्री के पास रहता है। ऐसे में अब भाजपा शासित किसी राज्य या पंजाब अथवा ओड़िशा के वित्त मंत्री को इस समिति का प्रमुख बनने की संभावना है।
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