प्रदेश सरकार आपदा प्रबंधन और राहत कार्याें में हुई फेल!
- प्रमुख सचिव की डांट से जिलाधिकारी को पड़ा दिल का दौरा
- कितने स्थानीय और कितने यात्री गायब, प्रदेश सरकार को नहीं मालूम
- मुख्यमंत्री का प्रभावित क्षेत्रों में हुआ विरोध, हवाई दौरों तक सिमटे कांग्रेसी नेता
देहरादून, 19 जून। ‘‘तीन दिन चले अढ़ाई कोस‘‘ यह कहावत उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री और उनके अधिकारियों पर सटीक बैठती है। प्रदेश में आई भीषण आपदा के चार दिन बीत जाने के बाद भी प्रदेश सरकार 72 हजार से अधिक लोगों में से कुल 1200 लोगों को देहरादून व ऋषिकेश पहुंचा पाई है। जिलाधिकारियों के पास आपदा और राहत से निपटने के लिए पैसे की कमी है, जो जिलाधिकारी पैसे की कमी का रोना रो रहा है, उसे मुख्यमंत्री के मुंह लगे अधिकारी धमका रहे हैं। परिणाम स्वरूप एक जिलाधिकारी को प्रमुख सचिव की डांट के चलते दिल का दौरा पड़ गया और वह अस्पताल में भर्ती है। इसे उत्तराखण्ड का दुर्भाग्य ही कहा जाएगा कि आपदा प्रबंधन पर बड़े-बड़े दावे करनी वाली प्रदेश सरकार आपदा प्रबंधन के मामले में फेल साबित हुई है। दुर्घटना के तीन दिन बीत जाने के बाद भी अभी तक राहत और बचाव दल उन तक नहीं पहुंच पाया है। केदारनाथ में प्रभातम हैली सर्विस चलाने वाली कंपनी के चार कर्मचारियों सहित सैकड़ों लापता हैं, वहीं बद्रीनाथ में ठंड से पांच लोगों ने दम तोड़ दिया। प्रदेश सरकार के आपदा प्रबंधन के दावे हवा में हो रहे हैं। बुधवार को मुख्यमंत्री ने केदारनाथ, गुप्तकाशी, फाटा और गौचर रहित रूद्रप्रयाग के हवाई दौरे किए। रूद्रप्रयाग में मुख्यमंत्री का हैलीकाप्टर उतरने ही वाला था कि लोगों ने मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा, आपदा मंत्री यशपाल आर्य और कृषि मंत्री का स्थानीय लोगों ने इनका घेराव कर जबरदस्त विरोध किया। यहां के लोगों का आरोप था कि बीते साल उत्तरकाशी में आई आपदा के दौरान मुख्यमंत्री ने उन्हें कहा था कि वे भजन करें, अब उन्होंने मुख्यमंत्री से सवाल कि अब वे क्या करें। वहीं लोगों ने प्रशासन पर लापरवाही के आरोप भी लगाए व उनके खिलाफ जमकर नारेबाजी हुई। लोगों का आरोप है कि प्रशासन ने यहां के लोगों को भगवान भरोसे छोड़ दिया और वीआईपी लोगों के आवाभगत में जुट गए हैं। विरोध को देखते हुए मुख्यमंत्री सीधे दिल्ली रवाना हो गए, जहां की वह सप्ताह में तीन दिन विश्राम करते हैं। एक जानकारी के अनुसार सुषमा स्वराज ने प्रधानमंत्री से बात कर उनको उत्तराखण्ड में आई विनाशलीला से निपटने के लिए एक हजार करोड़ रूपये की आर्थिक मदद दिए जाने की बात कही थी। प्रधानमंत्री ने भी उनको भरोसा दिलाया है। वहीं कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने प्रभावित क्षेत्रों का हवाई दौरा किया।
आपदा प्रबंधन में फेल हुए चुकी प्रदेश सरकार की वर्तमान में गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री के केशु भाई पटेल जैसी हालत हो गई है। गौरतलब हो कि भंुज में आए विनाशकारी भूकंप के दौरान आपदा और राहत कार्याें में असफल होने के बाद भाजपा सरकार ने केशु भाई को हटाकर गुजरात की कमान नरेन्द्र मोदी के हाथ सौंपी थी। तब से अब तक गुजरात में नरेंद्र मोदी का राज है। राजनैतिक जानकारों का कहना है कि उत्तराखण्ड के हालात भी ठीक इसी तरह के हो गए हैं, मुख्यमंत्री और उनकी टीम आपदा राहत एवं बचाव कार्याें में असफल साबित हुई है। घटना के चार दिन बीत जाने के बाद भी सरकार को ठीक से यह भी पता नहीं है कि इस विनाशलीला की भेंट कितने लोग चढ़ गए। सरकार के पास यह भी आंकड़ा नहीं है कि इस विनाशलीला में कितने स्थानीय और कितने यात्री काल कलवित हो गए। आपदा प्रभावित जिलों उत्तरकाशी, रूद्रप्रयाग, चमोली, पिथौरागढ़, बागेश्वर और चम्पावत के जिलाधिकारी पर्याप्त पैसे के न होने के चलते हतोत्साहित हैं। सरकार इन जिलाधिकारियों को केवल निर्देश देने तक सीमित रह गई है। आपदा प्रभावित लोगों को खाने का सामान, त्रिपाल, टैंट आदि की व्यवस्था की जाएगी इन सबको लेकर जिलाधिकारी खासे सदमे में हैं। बीते दिन जब एक जिलाधिकारी ने प्रदेश के प्रमुख सचिव राकेश शर्मा के सामने अपनी समस्या रखी तो राकेश शर्मा ने उसे राहत कार्याें में सुझाव देने के बजाए लताड़ लगा दी, परिणाम स्वरूप जिलाधिकारी को दिल का दौरा पड़ गया और उन्हें देहरादून के एक अस्पताल में दाखिल कराया गया है। वहां उनका ईलाज चल रहा है। ऐसे में यह समझा जा सकता है कि प्रदेश में आपदा प्रबंधन और राहत कार्याें की क्या स्थिति होगी। वहीं एक जानकारी के अनुसार केदारनाथ क्षेत्र में हैलीकाप्टर सेवा चलाने वाली प्रभातम हैली सर्विस के चार कर्मचारी उन सैकड़ों लोगों के साथ बह गए, जिनका केदारनाथ हादसे में कोई अता पता नहीं है, वहीं बद्रीनाथ क्षेत्र में बढ़ रही ठंड से पांच लोगों की मरने की खबर है।
केदारनाथ में राहत और बचाव कार्य जारी
देहरादून, 19 जून। शनिवार से लगातार हो रही मूसलधार बारिश ने गढ़वाल में भी भयंकर तबाही मचाई है। इस तबाही के बाद अब सेना और आपदा प्रबंधन की टीम बुधवार सुबह से ही राहत कार्य में जुट गई है। मौसम साफ होने के चलते सेना को केदारनाथ में फंसे सभी लोगों को हेलीकाप्टर से सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने में मदद मिल रही है। बताया जा रहा है कि केदारनाथ को पूरा खाली करा दिया गया है। वहीं इस क्षेत्र में हजारों लोगों के मरने की संभावना व्यक्त की जा रही है। गौरतलब है कि मंगलवार से शुरू हुई इस मुहिम के तहत केदारनाथ से अब तक करीब डेढ़ हजार से अधिक लोगों को निकाल लिया गया है। रेस्क्यू के लिए सेना के हवाले किए गए केदारनाथ घाटी क्षेत्र में पहले केदारनाथ में फंसे लोगों को ही सुरक्षित निकालने की अभियान चलाया गया। इसके बाद आसपास के क्षेत्रों में फंसे लोगों को निकाला जाना है। साथ ही विभिन्न स्थानों पर बंद पड़े रास्तों को खोलने की कवायद भी शुरू हो गई है। शासन के अनुसार पूरे प्रदेश में अब तक आपदा से मरने वालों का आंकड़ा 54 पर पहुंच गया है। हालांकि अभी केदारनाथ, रामबाड़ा आदि स्थानों में लापता लोगों की तलाश का काम शुरू नहीं किया गया। माना जा रहा है कि मरने वालों की संख्या हजारों तक हो सकती है। उत्तरकाशी में गंगोत्री व यमुनोत्री मार्ग पर फंसे यात्रियों की मदद के लिए भी रेस्क्यू शुरू कर दिया गया है। साथ ही चमोली में भी जोशीमठ से लेकर बदरीनाथ तक व गोविंदघाट से लेकर घांघरिया तक फंसे करीब दस हजार लोगों को खाद्य सामग्री पहुंचाने का काम शुरू हो चुका है। शासन का दावा है कि दोपहर तक चारधाम यात्रा मार्ग पर फंसे करीब 19 हजार लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा दिया गया है।
शनिवार से हुई बारिश ने गढ़वाल में रुद्रप्रयाग के केदारनाथ, रामबाड़ा, चमोली, टिहरी व उत्तरकाशी जनपद में भारी तबाही मचाई। इस तबाही का सही आंकलन जिला प्रशासन के पास भी नहीं था। रविवार की देर रात तक यही सूचना थी कि रुद्रप्रयाग-केदारनाथ मार्ग,चमोली में चमोली से लेकर बदरीनाथ तक,उत्तरकाशी में गंगोत्री व यमुनोत्री मार्ग में सैकड़ों स्थानों पर सड़कें ध्वस्त हो गई हैं। कई पुलिया व मकान टूटने से चार धाम के रास्तों में करीब तीस हजार यात्री फंसे हुए हैं। इस दिन केदारनाथ में मलबे में दबकर दो लोगों की मौत व एक व्यक्ति के बरसाती नाले में बहने की सूचना थी। देहरादून में एक मकान के ढहने से एक ही परिवार के तीन लोग के मरने, हरिद्वार में गंगा के खतरे के निशान पर होने, हेमकुंड साहिब में ग्लेशियर टूटने, उत्तरकाशी में बाढ़ जैसे हालात व रुद्रप्रयाग से केदारनाथ तक मंदाकनी व बदरीनाथ से लेकर देवप्रयाग तक अलकनंदा के उफान पर होने की सूचना थी। कुमाऊं में पिथौरागढ़ में भी बारिश से सड़कें ध्वस्त हो गई थी। आपदा से रुद्रप्रयाग में 11, देहरादून में सात, टिहरी में नौ, उत्तरकाशी में दो व चमोली में एक और कुमाऊं के अल्मोड़ा जिले में पांच लोगों के मरने की सूचना सोमवार की देर रात तक थी। तब तक केदारनाथ में 11 शव निकाल लिए गए थे। रामबाड़ा में 50 से अधिक लोगों के लापता होने की आशंका जताई जा रही थी। गौरीकुंड से केदारनाथ के 14 किलोमीटर के पैदल मार्ग के बीच में पड़ने वाले रामबाड़ा का कोई निशान तक नहीं मिल पा रहा था, लेकिन वहां की पुख्ता जानकारी प्रशासन के पास थी नहीं थी। रुद्रप्रयाग में मंदाकनी नदी के उफान से जिले के सोनप्रयाग, चंद्रापुरी, अगस्त्यमुनि का बड़ा भाग जलमग्न हो गया। यात्रा का अहम पड़ाव गौरीकुंड का निचला हिस्सा भी जलमग्न हो गया था। रविवार की रात ही प्रशासन ने प्रभावित स्थानों को खाली कराकर करीब बीस हजार से ज्यादा लोगों को सुरक्षित ठिकानों पर पहुंचा दिया। रुद्रप्रयाग के एक दर्जन से ज्यादा झूला पुल और तीन मोटर पुल बहने से ज्यादातर इलाके अलग-थलग पड़ गए।
केदारनाथ मंदिर के पुरोहित दिनेश बगवाड़ी ने बात की और बाढ़ के मंजर को बयान किया. बाढ़ में दिनेश के परिवार के पांच लोग लापता हैं. उनका 17 साल का बेटा अभी भी केदारनाथ में फंसा हुआ है. पढ़िये उन्होंने क्या बताया- रविवार की रात भारी बारिश हुई थी जिससे केदारनाथ में इमारतों को काफ़ी नुकसान हुआ था, हालांकि लोग सलामत थे. लेकिन सोमवार की सुबह केदारनाथ में प्रलय बनकर आई. सुबह 6 बजे से ही केदारनाथ पर बाढ़ का खतरा मंडरा रहा था. लोग भारी बारिश से हुए नुकसान का जायजा ले रहे थे. सुबह आठ बजे के करीब मैं मंदिर के प्रांगड़ में था और लोगों का हौसला बढ़ा रहा था. यहीं मेरी मुलाकात सर्किल ऑफिसर से हुई. वह बाढ़ में बहते-बहते बचे थे. बाढ़ के खतरे के बारे में उन्होंने अपने वरिष्ठ अधिकारियों को अवगत करा दिया था. आठ बजकर दस मिनट के करीब एक धमाके की आवाज आई. केदारनाथ से करीब तीन किलोमीटर ऊपर स्थित गांधी सरोवर फट गया और मलबा बहकर केदारनाथ आने लगा. सवा आठ बजे प्रलय सी आई. मलबे और पानी का प्रवाह इतना तेज था कि 15 मिनट में केदारनाथ तबाह हो गया. बड़े-बड़े पत्थर, रेत, कंक्रीट और पानी के प्रवाह ने केदारनाथ को बर्बाद कर दिया. चारों ओर हाहाकार मच गया. दो घंटे बाद तबाही का मंजर नजर आने लगा. उन्होने बताया कि केदारनाथ के चारों ओर लाशें ही लाशें पड़ीं थी. मेरे अपने परिवार के पांच लोग लापता हैं. छत्तीसगढ़ से आ कर होटल में रुके एक परिवार के 11 सदस्य भी लापता हो गए. एकमात्र बचे व्यक्ति को हमने ढांढस बंधाने की कोशिश की।
उनका कहना है कि पीढ़ितों तक कोई मदद नहीं पहुंच रही थी. सरकार को इस तरह की बाढ़ का पहले से ही अंदेशा था. स्थानीय प्रशासन ने सुबह 6 बजे ही वरिष्ठ अधिकारियों को खतरे के बारे में अवगत करा दिया था. लेकिन केदारनाथ तक किसी भी प्रकार की मदद नहीं पुहंची. आईटीबीपी या कोई अन्य सैन्य दल हम तक नहीं पहुंचा। बाढ़ और तबाही के बाद हम 36 घंटे केदारनाथ में फंसे रहे. यहां देशभर से आए लोग सहमे हुए थे. हमारे पास न खाने के लिए कुछ था और न ही पीने के लिए पानी. लोगों ने 36 घंटे बिना साफ़ पानी के बिताए। उन्होने कहा कि मैंने हज़ारों की तादाद में लोगों को फंसे हुए देखा. ज्यादा तबाही पानी के साथ आए मलबे और पत्थरों से हुई. बह जाने से ज्यादा संभावना लोगों के मरने की है। उन्होने कहा कि फ़िलहाल जैसे-तैसे मैं सुरक्षित स्थान पर पहुंच गया हूं. मेरे परिवार की हालत खराब है. पांच लोग अभी भी लापता हैं. आर्थिक नुकसान का हिसाब अभी हमने नहीं लगाया है. बस किसी भी तरह हम अपने बेटे को सुरक्षित वापस लाने की जुगत में लगे हैं. प्राप्त जानकारी केदारनाथ, रामबाड़ा और गौरीकुंड कस्बे पूरी तरह तबाह हो गए हैं। इसे चमत्कार ही कहा जाएगा कि केदारनाथ में सब कुछ तबाह हो गया है, लेकिन बारहवें ज्योतिर्लिंग में से एक और केदार नाथ मंदिर का सदियों पुराना गुंबद अभी भी सुरक्षित है। आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि मंदिर के गर्भगृह में पानी के साथ बहकर मलबा घुस गया है। लगातार बारिश और पानी के तेज बहाव से मंदिर के आसपास के ज्यादातर भवन जमींदोज हो गए हैं। सिर्फ केदारनाथ में 50 से ज्यादा लाशें मिलने की बात कही जा रही है। पानी निकलने के बाद मंदिर परिसर में कई शव बिखरे पड़े थे। गौरीकुंड-केदारनाथ पैदल मार्ग पर गौरीकुंड से 7 किलोमीटर दूर रामबाड़ा का तो वजूद ही समाप्त हो गया है। शासन ने भी इसकी पुष्टि कर दी है। 100-150 दुकानों वाले रामबाड़ा बाजार में आमतौर पर यात्रा के दौरान 500-600 लोग हमेशा मौजूद रहते थे। यहां कितने लोग हताहत हुए हैं, इसका पता अभी तक नहीं चल पाया। तबाही के करीब 36 घंटे बाद मंगलवार सुबह मौसम साफ होने पर बचाव और राहत कार्य शुरू हुआ। केदारनाथ घाटी में दो दिन से फंसे करीब 400 लोगों को हेलिकाप्टरों के जरिए गुप्तकाशी पहुंचाया गया, जबकि घांघरिया के आसपास फंसे करीब 3000 यात्रियों को गोविंदघाट पहुंचाया। प्रभावित क्षेत्रों में फंसे लोगों के लिए दस हजार फूड पैकेट्स, ग्लूकोज, पानी, कंबल, टैंट आदि भेजे गए हैं, जिन्हें हेलिकॉप्टरों से गिराया जा रहा है।
छः सदस्यीय चिकित्सकों का दल आपदाग्रस्त क्षेत्रों के लिए रवाना
देहरादून, 19 जून, । आपदा में घायल एवं बीमार लांेगों का निशुल्क चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना प्रदेश सरकार की प्राथमिकता हैं। प्रदेश के पर्वतीय जनपदों में चिकित्सकों की भारी कमी को देखते हुए जन सेवा के लिए आईएमए द्वारा भी पहल की गयी है। इस बावत आयोजित बैठक में चिकित्सा एवं स्वास्थ्य एवं सुरेन्द्र सिंह नेगी ने बताया कि प्रदेश सरकार एवं आईएमए के संयुक्त प्रयासों से आईएमए के छः सदस्यीय चिकित्सकों का दल पाटा के लिए वायु सेवा द्वारा रवाना कर दिया गया है। ये दल रामबाडा, गौरीकुण्ड क्षेत्र में दैवीय आपदा से प्रभावित घायलों एवं बीमारों का निःशुल्क ईलाज करेगा। दल द्वारा भेजे गये बीमारों का देहरादून के हिमालयन इंस्टीट्यूट, सीएमआई, सिनर्जी, कोरोनेशन, इन्दरेश तथा दून चिकित्सालयों में उच्च स्तरीय इलाज किया जायेगा। मानव जीवन को सुरक्षित करने के लिए आईएमए का अन्य दल कुमाऊं के धारचूला एवं मुनस्यारी क्षेत्रों में भी भेजा जा रहा है। नेगी ने बताया कि आपदा में प्रभावित जनसाधारण तीर्थ यात्रियों का निःशुल्क ईलाज किया जायेगा तथा ईलाज पर होने वाले सम्पूर्ण व्यय का वहन प्रदेश सरकार करेगी। उन्होने बताया कि मौसम साफ हो गया है ऐसे में दवाईयों की खेप हेलीकॉप्टरों के माध्यम से प्रभावित क्षेत्रों को भेजी जा रही है। उन्होने कहा कि चमोली, उत्तरकाशी, रूद्रप्रयाग, पिथौरागढ़ जो कि सबसे ज्यादा प्रभावित क्षेत्र हैं, के मुख्य चिकित्साधिकारियों को आदेशित किया गया है, कि वे भेजे जा रहे चिकित्सक दलों के साथ समन्वय कर युद्व स्तर पर चिकित्सा सुविधायें उपलब्ध करायें। आज आईएमए द्वारा भेजे गये चिकित्सकों के दल में डॉ. हरीश कोहली, डॉ. मंयक जैन, डॉ. राकेश कालरा, डॉ. गुलशन मल्होत्रा, डॉ. राजन जैन, डॉ. सुधीर त्यागी, डॉ. राकेश कोहली, डॉ. विजय त्यागी तथा डॉ. आलोक आहूजा शामिल हैं। बैठक में प्रमुख सचिव स्वास्थ्य एस रामास्वामी, के अलावा आईएमए के सदस्य एवं स्वास्थ्य महकमें के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।
विधानसभा अध्यक्ष ने आपदा में काल कलवित लोगों को अपनी श्रद्धांजली अर्पित की
देहरादून, 19 जून, । बीते दिनों उत्तराखण्ड में दैवीय आपदा से हुई व्यापक क्षति एवं जनहानि से विधानसभा अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल काफी द्रवित हैं। उन्होने इस दैवीय आपदा में काल कल्वित लोगों को अपनी श्रद्धांजली अर्पित की है। कुंजवाल ने प्रदेश में दैवीय आपदा से हुई गढ़वाल मण्डल में व्यापक तबाही के साथ ही पिथौरागढ़ में बादल फटने, अल्मोडा जनपद में बस दुर्घटना व दैवीय आपदा में अन्य दिवंगत लोगों के प्रति प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष मा. गोविन्द सिंह कुंजवाल ने गहरा दुःख व्यक्त किया है। उन्होने ऐसे परिवारों के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त की है तथा घायलों के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना की है। कुंजवाल ने कहा है कि दैवीय आपदा में प्रदेश सरकार, शासन प्रशासन बचाव व राहत कार्य में जुटा है। मौसम साफ होने से सरकारी प्रयासों में तेजी आयी है। उन्होने प्रदेश सरकार को प्रभावित क्षेत्रों में प्राथमिकता के आधार पर खाद्यान एवं स्वास्थ्य सेवायें उपलब्ध कराने को कहा है। उन्होने आपदा की इस घड़ी में सभी सरकारी, गैर सरकारी संगठनों से आपदा प्रभावितों की सहायता हेतु आगे आने का आह्वान करते हुए प्रदेश सरकार से आपदा प्रभावित लोगों को शीघ्र सहायता मुहय्या कराने तथा केदारनाथ सहित अन्य स्थानों पर फंसे तीर्थ यात्रियों, पर्यटकों को सुरक्षित स्थानों पर पहंुचाने तथा आपदा से प्रभावित परिवारों के पुर्नवास की शीघ्र व्यवस्था करने को कहा हैै। अध्यक्ष के सूचनाधिकारी राजेन्द्र सिंह रावत ने बताया है, कि अध्यक्ष कुंजवाल शीघ्र ही आपदा प्रभावित क्षेत्रों का मौका मुआयना करेंगे।
सीएम ने किया आपदाग्रस्त क्षेत्रों का दौरा
देहरादून, 19 जून, । मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने बुधवार को केदारनाथ, गुप्तकाशी, फाटा, गौचर और कई आपदाग्रस्त क्षेत्रों का दौरा कर अतिवृष्टि व बादल फटने से हुए नुकसान का जायजा लिया। उनके साथ आपदा प्रबन्धन मंत्री यशपाल आर्य, मुख्य सचिव सुभाष कुमार, प्रमुख सचिव राकेश शर्मा भी थे।
दो करोड़ का चेक मुख्यमंत्री आपदा राहत कोष के लिए के लिए सौंपा
देहरादून, 19 जून, । राजस्थान सरकार के आपदा राहत मंत्री बृजेन्द्र ओला ने बुधवार को मुख्यमंत्री आपदा राहत कोष के लिए दो करोड़ रुपये का चेक मुख्यमंत्री की अनुपस्थिति में उनके प्रमुख सचिव एसएस संधू को सौंपा। साथ ही आपदा राहत कार्यो में राजस्थान सरकार के पूरा सहयोग का आश्वासन दिया।
सेना के सामने श्रद्धालुओ को सुरक्षित निकालने की चुनौती
देहरादून, 19 जून, । गोविंदघाट व हेमकुंड साहिब मार्ग पर हुई भीषण तबाही व बदरीनाथ मार्ग कई स्थानों पर क्षतिग्रस्त होने के बाद सेना के लिए घांघरिया व बदरीनाथ से श्रद्धालुओं को सुरक्षित निकालने की चुनौती सामने आ गई है। सेना व आईटीबीपी द्वारा अब तक पांच हजार से अधिक श्रद्धालुओं को सकुशल जोशीमठ पंहुचा जा चुका है। गोविंदघाट मे हुई भीषण तबाही के बाद वहां फंसे हजारों श्रद्धालुओं को सुरक्षित पंहुचाने के लिए सेना व आईटीबीपी पूरी मुस्तैदी के साथ जुटी है। अब तक सेना पांच हजार से अधिक श्रद्धालुओं को सुरक्षित जोशीमठ पंहुचा चुका है। यहां सेना, आईटीबीपी, गुरूद्वारा, शंकराचार्य स्वामी माधवाश्रम जी महाराज के आश्रम के अलावा विभिन्न कालेजों मे श्रद्धालुओं को ठहराया गया है। श्रद्धालुओं को रस्सियों के सहारे चटटानी मार्ग से जान जोखिम मे डालकर निकाला जा रहा है। जोशीमठ से गोविंदघाट तक के लिए भी सड़क मार्ग अवरूद्ध होने के कारण रेस्क्यू मे भी भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। सेना के स्थानीय ब्रिगेड के कमांडर ब्रिगेडियर अक्षत अरोड़ा ने बताया कि सेना ने घांघरिया व श्री बदरीनाथ मे फंसे श्रद्धालुओं को सुरक्षित बाहर निकालने को सेना ने चुनौती के रूप मे स्वीकार किया है। बताया गया कि गोविंदघाट से हेमकुंड साहिब को जोड़ने वाले एक मात्र पुल के बह जाने के बाद सेना ने अब नदी के ऊपर ट्राली लगाने की योजना बनाई है। जिससे अगले दो दिनों के अंदर ट्राली से आवाजाही शुरू हो सकेगी। उन्होने बताया कि हेमकुंड साहिब मार्ग पर पुलना गांव व भ्यंूडार गांव व मे फंसे ग्रामीणों व श्रद्धालुओं को चापर द्वारा खाद्य सामग्री ड्राप की जा रही है। उन्होंने बताया कि सेना के जवान केदारनाथ व उत्तरकाशी क्षेत्र मे भी आपदा राहत कार्यो मे जुटे है। इसके अलावा कांलदी खाल ट्रैक मार्ग पर अरवाताल के पास फंसे 40 पर्यटकों को सुरक्षित निकालने का कार्य भी सेना ने शुरू कर दिया है। कमांडर ने जानकारी दी कि सेना मेडिकल का टोल फं्री नं0 1800180558 तथा 8009833388 है। इधर आपदा व राहत कार्यो का जायजा लेने चमोली के जिलाधिकारी एसए मुरूगेषन व पुलिस कप्तान अजय जोशी जोशीमठ पंहुचे। उन्होने पुलना व भ्यूंडार वैली मे खाद्यान्न व दवाईयां व कपड़े चापर द्वारा भिजवाए। जोशीमठ ब्यापार सभा द्वारा श्रद्धालुओं के लिए कंबल व गर्म कपड़ो की ब्यवस्था की गई। जोशीेमठ नगर पालिकाध्यक्ष रोहणी रावत ने भी मार्ग अवरूद्ध स्थल पर पंहुचकर श्रद्धालुओं को जोशीमठ तक पंहुचाने के लिए विभिन्न कंपनियों के वाहन उपलब्ध कराए। टैक्सी यूनियन, ब्यापार सभा, सेना व नगर पालिका, व शंकराचार्य स्वामी माधवाश्रम जी महाराज द्वारा भी भंडारे का आयेाजन किया जा रहा है।
निशंक ने पीएम को दी हालात की जानकारी
देहरादून, 19 जून, । उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री डॉ रमेश पोखरियाल निशंक फाटा और गुप्तकाशी के सघन भ्रमण के बाद बुधवार को उत्तरकाशी के भ्रमण पर हैं। साथ में भाजपा नेता सुरेश जोशी, बलराज पासी व आशा नौटियाल हैं। बुधवार सुबह डॉ निशंक ने फाटा से प्रधानमंत्री से मनमोहन सिंह से फोन पर बात की और आपदाग्रस्त क्षेत्रों के हालात के बारे में जानकारी दी। इस दौरान डॉ निशंक ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से आग्रह किया की सेना के 20 और हेलीकाप्टर आपदाग्रस्त इलाकों में भेजे जाएँ। साथ ही समय पर रातहत सामग्री तथा भोजन के पैकेटों की व्यवस्था की जाये। डॉ, निशंक ने इसके बाद राज्य के मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा जी से भी फोन पर इस सम्बन्ध में वार्ता की।
अगवा किया गया युवक आठ माह बाद लौटा
रूद्रपुर/देहरादून, 19 जून, । गत वर्ष अक्टूबर माह में बदमाशों द्वारा अगवा कर लिया गया युवक विगत दिवस किसी तरह बदमाशों के चंगुल से छूटकर घर वापस लौट आया। उसे देख परिजनों की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। युवक ने मंगलवार को अपने पिता के साथ एसएसपी कार्यालय पहुंचकर पूरा घटनाक्रम बयां किया। ग्राम अलखदेवी गदरपुर निवासी सालिक राम का पुत्र रामलखन यहां सिडकुल स्थित एटीवी प्लाईवुड फैक्ट्री में काम करता था और फैक्ट्री परिसर में ही रहता था। रामलखन ने बताया कि गत 24 अक्टूबर को वह फैक्ट्री परिसर में आराम कर रहा था कि तभी ग्राम नबदिया थाना कुटार शाहजहांपुर निवासी आनंद पुत्र बागेश्वर लाल, दिनेश पुत्र रामेश्वर, पवन पुत्र जगदीश प्रसादव जमुना प्रसाद उसके कमरे में आ घुसे और उसका मुंह बांध दिया। रामलखन का आरोप है कि उक्त सभी उसे अगवा कर ले गये तथा सहारनपुर में अनजान जगह पर उसे बंधक बना लिया। उक्त लोग उससे रोज मारपीट करते थे और डराते व धमकाते थे। रामलखन का कहना है कि उसे पानीपत ले जाया गया जहां नमितो ने सोनीपत निवासी किसी व्यक्ति को बेच दिया तथा उसके पास से पांच हजार रूपए नकद व मोबाइल छीन लिया। रामलखन ने बताया कि गत 13 जून को किसी तरह वह बदमाशों के चंगुल से भाग निकला नहीं तो वह उसे जान से मार देते। किसी तरह वह लोगों की मदद लेता हुआ घर वापस लौटा। रामलखन ने एसएसपी को आरोपियों के खिलाफ कार्यवाही करने की मांग को लेकर तहरीर भी सौंपी। एसएसपी ने रामलखन व उसके पिता सालिगराम को भरोसा दिलाया कि वह इस मामले को गंभीरता से लेंगी और दोषियों को बख्शा नहीं जायेगा।
महिला की बाथरूम में संदिग्ध मौत
रूद्रपुर/देहरादून, 19 जून, । मोहल्ला विवेक नगर में सिडकुल में कार्यरत एक महिला की मंगलवार की प्रातः बाथरूम में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। उसका पति रामपुर में फौज में तैनात है। सूचना मिलने पर ट्रांजिट कैम्प चौकी पुलिस मौके पर पहुंची और उसने भवन स्वामी से घटना की जानकारी ली। बताया जाता है कि मूलरूप से ग्राम भुवनेश्वर थाना बेरीनाग पिथौरागढ़ निवासी 36 वर्षीय नीमा यहां सिडकुल में स्थित फैक्ट्री में काम करती थी और उसका पति रामपुर फौज में तैनात है। नीमा मोहल्ला विवेकनगर में हरप्रसाद के भवन में किरायेदार के रूप में रहती थी। मंगलवार की प्रातः वह नहाने के लिये बाथरूम गई। जब काफी देर तक वह बाहर नहीं निकली तो भवन स्वामी के परिजनों ने बाथरूम का दरवाजा खटखटाया भीतर से कोई आवाज न आने पर परिजनों ने इसकी जानकारी हर प्रसाद को दी। उन्होंने मंडी से घर आकर किसी तरह जब बाथरूम का दरवाजा खोला तो भीतर नीमा बेसुध पड़ी हुई थी। उन्होंने इसकी सूचना ट्रांजिट कैम्प चौकी पुलिस को दी। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहंुची और उसने नीमा को मृत पाया। घटना की सूचना मृतका के पति को दे दी गई है।
तीन साल लग सकते हैं केदारनाथ यात्रा के सुचारू होने में!
देहरादून, 19 जून। उत्तराखण्ड के चार धामों की स्थिति अतिवृष्टि के चलते बद से बदतर हो गई है। इन धामों तक पहुंचने के सभी मार्ग बुरी तरह ध्वस्त हो गए हैं, लेकिन सबसे ज्यादा तबाही केदारनाथ मार्ग की हुई है। एक जानकारी के अनुसार केदारनाथ यात्रा को शुरू करने के लिए कम से कम दो से तीन साल तक लग सकते हैं। यमुनोत्री, गंगोत्री और बद्रीनाथ मार्गों की हालत 10-12 दिनों से एक माह तक मामूली चलने लायक हो जाएगी, ऐसा सरकारी सूत्रों का कहना है, लेकिन केदारनाथ की यात्रा सुचारू रूप से चलने के लिए और इस मार्ग को दुरूस्त करने में दो से तीन वर्ष का समय लग सकता है, क्यांेकि रूद्रप्रयाग से गौरीकुण्ड तक जाने वाला मोटर मार्ग कई स्थानों पर या तो बुरी तरह टूट गया है या मंदाकिनी नदी उसे अपने साथ बहा ले गई है। सौनप्रयाग से गौरीकुण्ड तक के सात किलोमीटर लंबे मोटर मार्ग का तो कहीं अता-पता ही नहीं है, यह मार्ग जहां एक ओर वाहनों की पार्किंग के लिए प्रयोग होता था, तो वहीं इस मार्ग का दूसरा छोर वाहनों के गौरीकुण्ड तक आवागमन के लिए प्रयोग किया जाता था, क्योंकि गौरीकुण्ड और सौनप्रयाग के मध्य सीमित संख्या में वाहनों के खड़े करने का स्थान था। वहीं गौरीकुण्ड से केदारनाथ वाला पैदल मार्ग बुरी तरह क्षतिग्रस्त हुआ है। रामबाड़ा से गुरूड़चट्टी तक के मार्ग का तो कहीं अता-पता तक नहीं है। रामबाड़ा तो पूरी तरह नेस्तनाबूत हो चुका है। केदारनाथ में मंदिर की चाहर दिवारी तक बह गई है, न वहां अब धर्मशालाएं दिखाई दे रही हैं, न बाजार और न दुकानें, सब कुछ तबाह हो गया है। सरकारी सूत्रों के अनुसार सौनप्रयाग से केदारनाथ के आस-पास तक कई ऐसे गांव हैं जहंा राहत और बचाव टीम को पहुंचने में अभी भी दो-तीन हफ्ते लग सकते हैं, इनमें से कई गांव तो भीषण बाढ़ में बह गए हैं। इन गांवों में कितनी तबाही हुई है, इसकी जानकारी में अभी समय लग सकता है। वहीं केदारनाथ मंदिर के उपर गांधी सरोवर के आस-पास तपस्या करने वाले साधु-संतो का भी कोई पता नहीं है। इनमें से कई साधु-संत तो वर्ष भर यहां तप में लीन रहते थे, लेकिन कई साधु-संत यात्रा काल में इन क्षेत्रों में तपस्या करने आते थे। वहीं मदमहेश्वर, त्रियुगीनारायण और कालीमठ जाने वाला मार्ग भी बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया है, इनके दुरूस्त होने में कितना समय लगेगा यह कहा नहीं जा सकता, लेकिन एक बात तो जरूर है कि इन मार्गों की दशा और दुशा सुधरने में कम से कम तीन साल का वक्त लगेगा। जहंा तक पाण्डुकेश्वर से फूलों की घाटी और हेमकुण्ड वाले मार्ग की बात की जाए तो भ्यूंडार नदी के तेज बहाव के कारण यह मार्ग भी बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया है। पाण्डुकेश्वर के पास स्थिति लोकपाल को हेमकुण्ड मार्ग पर जोड़ने वाला पुल बह गया है। यहां गुरूद्वारे के कई भवनों को बुरी तरह क्षति पहुंची है। वहीं सैकड़ों मोटर साईकिल और कारों की भी बहने की जानकारी मिली है। कुल मिलाकर पर्वतीय क्षेत्र के चार धामों के मार्गों की व्यवस्था सुचारू होने में जहां लम्बा वक्त लगेगा, वहीं भवनों के पुनर्निमाण में भी काफी समय लगने की उम्मीद है। आपदाग्रस्त इस उत्तर हिमालयी क्षेत्र में स्थानीय लोगों सहित जिला प्रशासन को नदी तटों से काफी दूर निर्माण कार्य कराने होंगे, ताकि इस तरह के हादसों से भविष्य में बचा जा सके।
फंसे यात्री निकालने में गौचर हवाई अड्डे का प्रयोग करे सरकार: महाराज
देहरादून, 19 जून, । गढ़वाल सांसद सतपाल महाराज ने सरकार से अनुरोध किया कि वे फंसे हुए श्रद्धालुओं एवं पर्यटकों को निकालने के लिए गौचर हवाई अड्डे का प्रयोग करें। उन्होंने कहा कि फिक्स टविन प्लेन द्वारा जोषीमठ, बद्रीनाथ में फंसे यात्रियों को इससे आसानी से निकाल सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा सकता है। सांसद महाराज ने कहा कि कर्णप्रयाग, ग्वालदम और गैरसैंण की तरफ के रास्ते से भी फंसे हुए यात्रियों को निकाला जा सकता है। उन्होंने कहा कि आपदा में लोग संयम से काम लें और प्रषासन उन्हें हरसंभव सहायता पहुंचाने के लिए पूरी तरह प्रयासरत है। उन्होंने कहा कि दैवीय आपदा से हुए नुकसान का षीघ्र आंकलन किया जाये साथ ही प्रभावितों को तत्काल दैनिक जरूरत की वस्तुओं की आपूर्ति की जाये, जिससे उन्हें दो वक्त का भोजन प्राप्त हो सके। उन्होंने आवष्यक दवाईयों व चिकित्सा के भी षीघ्र प्रबंध के लिए कहा है। उन्होंने बताया कि कल स्वयं उन्होंने अपने संसदीय क्षेत्र के अन्तर्गत मुनि की रेती में आपदा का जायजा लिया और साथ ही पीड़ित व्यक्तियों के दर्द को करीब से महसूस किया। उन्होंने मुख्यमंत्री से अनुरोध किया कि वह मुनि की रेती क्षेत्र में दयानन्द घाट से जलनिगम स्टोर तक पक्के पुस्ते का निर्माण करवायें जिससे वहां भविश्य में होने वाले नुकसान को रोका जा सके।
छावनी परिषद क्षेत्र की बदहाल स्थिति पर भाजपा नाराज
- स्थिति न सुधरने पर अनशन करने की चेतावनी
देहरादून, 19 जून, । छावनी परिषद क्षेत्र की बदहाल स्थिति से खिन्न भाजपा ने परिषद के खिलाफ मोर्चा खोला दिया है। भाजपा ने साफ कहा कि यदि स्थिति में शीघ्र सुधार न आया, तो उन्हे मजबूरन अनशन करने पर विवश होना पड़ेगा। छावनी परिषद क्षेत्र की बदहाल स्थिति पर नाराजगी जताते हुए भाजपा श्रीदेव सुमन नगर मंडल के उपाध्यक्ष देवेन्द्र पाल सिह छावनी परिषद क्षेत्र की सफाई व्यवस्ता रखने मे पूर्ण रूप से विफल हो चुका है। नालियो की सफाई न होने के कारण जहां नालिया हमेशा चोक रहती है, वहीं बरसात मे गंदा पानी नालियो से बाहर आने के कारण स्थिति और विकराल हो जाती है। यही स्थिति सफाई व्यवस्था को लेकर भी है। परिषद अधिकारियों को स्थिति से बार-बार अवगत कराने के बावजूद कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। उन्होंने रोष जताते हुए कहा कि परिषद के द्वारा सफाई का जो ठेका दिया गया है, उनके द्वारा भी अपनी गतिविधियों को मूर्तरूप नहीं दिया जा रहा है। जबकि डोर-टू-डोर एवं सफाई के लिए प्रतिमाह परिषद की ओर से भुगतान किया जा रहा है। मौजूदा स्थिति को देखकर तो यही लगता है कि ठेकेदार बिना काम किये हुए बिल बनाकर पेमेन्ट लेने में लगा हुआ है। श्री सिंह का कहना था कि छावनियो के निरीक्षण मे पहुंचे निदेशक मध्यकमान लखनऊ टी एरोकीनाथन का घेराव भी जनता ने किया था, जिसके बाद स्वयं निदेशक को जनता के साथ नालो की दुर्दशा देखने पर विवश होना पड़ा था। इसके बाद भी नालो एवं सडको की सफाई के लिए ठेकेदार पर विभाग द्वारा कोई दबाव नही बनाया जा पा रहा है। उन्होंने बताया कि गढी कैन्ट चौक कोतवाली कैन्ट के पास ठेकेदार द्वारा कूडे का ढेर लगा रखा है, जिसे उठाने मे किसी प्रकार की कोई दिलचस्पी ठेकेदार द्वारा नहीं ली जा रही हैं। यही स्थिति क्षेत्र के अन्य हिस्सो की भी है। उन्होंने साफ कहा कि यदि परिषद द्वारा स्थिति में शीघ्र सुधार न किया, तो उन्हें मजबूरन अनशन करने पर विवश होना पड़ेगा।
दैवीय आपदा के मृतक आश्रितों को 20-20 लाख मुआवजा मिले
- यूकेडी कार्यकर्ताओं ने डीएम के जरिए सीएम को ज्ञापन भेजा
देहरादून, 19 जून, । उत्तराखंड क्रांति दल ने पूरे राज्य को आपदा पीड़ित क्षेत्र घोषित किए जाने की मांग को लेकर प्रदर्शन किया। यूकेडी का कहना है कि दैवीय आपदा के मृतकों के परिजनों को 20 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाए। दल ने इस संबंध में जिलाधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजा है। यूकेडी के कार्यकर्ताओं का कहना है कि आपदा प्रभावित क्षेत्रों में राहत एवं बचाव कार्य में तेजी लाई जाए। सड़कों के क्षतिग्रस्त होने से जो लोग यात्रा मार्गों में बीच में फंसे हुए हैं उन्हें सुरक्षित स्थानों पर निकाला जाए। आपदा में मारे गए लोगों के परिजनों को 20 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाए और उजड़े घरों को बनाने के लिए प्रभावित परिवारों को प्रर्याप्त मात्रा में धनराशि उपलब्ध कराई जाए। क्षतिग्रस्त पुलों और सड़कों को शीघ्र ठीक किया जाए, जिससे कि जन-जीवन सामान्य हो सकें। यूकेडी का कहना है कि देहरादून में दैवीय आपदा से 10 लोगों की मौत हुई है। इन परिवारों को शीघ्र उचित मुआवजा दिया जाए। कार्यकर्ताओं का कहना है कि बरसात के प्रारंभिक दौर में ही नगर निगम की नाकामियां सामने आ गई हैं। बाढ़ सुरक्षा कार्य जगह-जगह अधूरे पड़े हुए हैं। नदी और खालों के किनारे सुरक्षा दीवारें बनाई जाएं। नालियों की नियमित रूप से सफाई की जाए जिससे जलभराव की समस्या न बने। बारिश के पानी की निकासी न होने से शहर में अधिकांश इलाकों में जलभराव की समस्या बनी हुई है। जलभराव की समस्या के चलते लोगों को बारिश में खासा परेशानियों का सामना करना पड़ता है। डीएम को मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन सौंपने वालों में अशोक सिंह, मनोज कुमार, बासुदेव सती, शांति प्रसाद, लताफत हुसैन, फुरकान अहमद, प्रमिला रावत, नारायण सिंह रावत, विपिन रावत, हरजीत सिंह, सुलोचना बहुगुणा आदि शामिल रहे।
(राजेन्द्र जोशी)



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