यह तो कादर खान - शक्ति कपूर का कुनबा है......!! - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

Breaking

प्रबिसि नगर कीजै सब काजा । हृदय राखि कौशलपुर राजा।। -- मंगल भवन अमंगल हारी। द्रवहु सुदसरथ अजिर बिहारी ।। -- सब नर करहिं परस्पर प्रीति । चलहिं स्वधर्म निरत श्रुतिनीति ।। -- तेहि अवसर सुनि शिव धनु भंगा । आयउ भृगुकुल कमल पतंगा।। -- राजिव नयन धरैधनु सायक । भगत विपत्ति भंजनु सुखदायक।। -- अनुचित बहुत कहेउं अग्याता । छमहु क्षमा मंदिर दोउ भ्राता।। -- हरि अनन्त हरि कथा अनन्ता। कहहि सुनहि बहुविधि सब संता। -- साधक नाम जपहिं लय लाएं। होहिं सिद्ध अनिमादिक पाएं।। -- अतिथि पूज्य प्रियतम पुरारि के । कामद धन दारिद्र दवारिके।।

शुक्रवार, 11 अक्टूबर 2013

यह तो कादर खान - शक्ति कपूर का कुनबा है......!!

asaram and sonमैं एक ऐसे नेता को जानता हूं, जो अपने भ्रष्टाचार के लिए कुख्यात था। उसी के संगठन के विरोधी तमाम कोशिशों के बावजूद उस पर लगाम लगा पाने में नाकाम हो रहे थे। थक - हार कर उन लोगों ने उसकी शिकायत राजधानी में रहने वाले एक  बड़े नेता  से करने की ठानी और घंटों का सफर कर उसके पास राजधानी पहुंच भी गए। नेता की शिकायत करते हुए उन लोगों ने राजधानी के बड़े नेता से कहा कि  भ्रष्टचार की हदें पार करते हुए उसने हाल में पद व संगठन का दुरुपयोग कर करीब एक दर्जन लोगों को नौकरी पर रखवाया है। अप्रत्याशित रूप से इस पर लाल - पीला होने के बजाय उस बड़े नेता ने हैरत भरे स्वर में कहा - क्या कहा, एक दर्जन लोगों को नौकरी पर रखवाया है। तब तो मानना पड़ेगा कि वह महागुरू है। 

मैं इतना बड़ा नेता होकर एक को नौकरी पर नहीं रखवा पा रहा हूं। उसने यदि इतने लोगों को नौकरी दिलवाई है, तो मानना पड़ेगा कि उसमें कुछ दम है। कुछ ऐसी ही प्रतिक्रिया मेरी आसाराम बापू से जुड़ी घटनाओं पर है। मुझे आश्चर्य इस पर नहीं कि कभी संत कहलाने वाले आसाराम और उनके परिजन इतने घिनौने आरोपों से घिरे हैं। महाआश्चर्य इस बात   का है कि ऐसा व्यक्ति आखिर इतने दिनों तक लोगों को किस प्रकार अपने सम्मोहन में जकड़े रहा। मैं आस्तिक न नास्तिक टाइप आदमी हूं। बाबाओं में कभी मेरी विशेष श्रद्धा नहीं रही। लेकिन अश्रद्धा जैसी कोई बात भी कभी मेरे में नहीं आई। ऐसे बाबाओं को देख कर मैं यही सोचता था कि आदमी जब भरसक प्रयास करके भी अपने परिवार के सदस्यों को ही खुश - संतुष्ट नहीं रख पाता, ऐसे में कोई यदि सैकड़ों - हजारों या लाखों लोगों को अपना मुरीद बनाए हैं, तो जरूर उसमें कोई बात होगी। लेकिन आसाराम से जुड़े ताजा घटनाक्रम  मार्केंडय काटजू वाले विवादित बयान को ही तो सही साबित नहीं कर रहे। घोर आश्चर्य कि भंडाफोड़ होने तक लाखों लोग आस्था के सागर में डूबकी लगाते रहे। कहीं कोई चू - चपड़ नहीं। और एक मामले का खुलासा होते ही गंभीर आरोपों की झड़ी।  

आरोपों के मद्देनजर ऐसा लगता है मानो हम  80 के दशक के चर्चित फिल्मी खलनायक कादर खान व शक्तिकपूर की कुख्यात जोड़ी वाली कोई फिल्म देख रहे हों।  





तारकेश कुमार ओझा, 
खड़गपुर ( प शिचम बंगाल) 
संपर्कः 09434453934
लेखक दैनिक जागरण से जुड़े हैं। 

कोई टिप्पणी नहीं: