पूंजीपतियों को भरपायी के लिए भी तैयार रहना चाहिए: राजन - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

Breaking

प्रबिसि नगर कीजै सब काजा । हृदय राखि कौशलपुर राजा।। -- मंगल भवन अमंगल हारी। द्रवहु सुदसरथ अजिर बिहारी ।। -- सब नर करहिं परस्पर प्रीति । चलहिं स्वधर्म निरत श्रुतिनीति ।। -- तेहि अवसर सुनि शिव धनु भंगा । आयउ भृगुकुल कमल पतंगा।। -- राजिव नयन धरैधनु सायक । भगत विपत्ति भंजनु सुखदायक।। -- अनुचित बहुत कहेउं अग्याता । छमहु क्षमा मंदिर दोउ भ्राता।। -- हरि अनन्त हरि कथा अनन्ता। कहहि सुनहि बहुविधि सब संता। -- साधक नाम जपहिं लय लाएं। होहिं सिद्ध अनिमादिक पाएं।। -- अतिथि पूज्य प्रियतम पुरारि के । कामद धन दारिद्र दवारिके।।

शनिवार, 17 जनवरी 2015

पूंजीपतियों को भरपायी के लिए भी तैयार रहना चाहिए: राजन

रिजर्व बैंक (आरबीआई)  के गवर्नर रघुराम राजन का कहना है कि यदि कारोबार अच्छा चलने पर मुनाफा पूंजीपतियों की जेब में जाता है तो उसके विफल होने पर नुकसान की भरपाई के लिए भी उन्हें तैयार रहना चाहिये, न कि इसका बोझ बैंकों पर डाल दिया जाना चाहिये। न्यूयॉर्क टाइम्स में प्रकाशित एक साक्षात्कार में राजन ने कहा कि पूंजीवाद से जुड़ी एक चिंता यह है कि जब सब अच्छा चल रहा होता है तो उसका फायदा पूंजीपति को मिलता है, लेकिन जब स्थिति विपरीत होती है तो नुकसान सिस्टम को उठाना पड़ता है और पूँजीपति हमेशा सही सलामत रहता है। 

आरबीआई गवर्नर ने कहा कि हमें निस्संदेह ऐसे लोग चाहिये जो जोखिम ले सकें। लेकिन यदि वे जोखिम लेते हैं तो उन्हें इसकी कीमत भी अदा करनी चाहिये,  बजाय इसके कि सिर्फ जोखिम का फायदा वे उठायें और जब फायदा न हो तो कोई और भरे। राजन ने कहा कि पिछले कुछ महीनों में इस बात पर फोकस किया गया है कि कैसे बड़े प्रवर्तकों से नुकसान की भरपायी करायी जाये और बैंकों पर इसका बोझ नहीं पड़ने दिया जाये। उन्होंने कहा कि पैमाना सभी के लिए एक होना चाहिये ताकि बड़े लोग भी ऋण चुकायें और यदि वे नहीं चुका सकते तो ऋणदाता के पास वसूली के सशक्त अधिकार हों। वैश्विक स्तर पर आर्थिक असहयोग के बारे में राजन ने कहा कि मेरा मानना है कि औद्योगिक राष्ट्र सिर्फ अपना हित देख रहे हैं। इस कदर कि सिर पर मंडरा रहे संकट के अलावा किसी और मुद्दे पर अंतर्राष्ट्रीय सहयोग की सिर्फ कामना ही की जा सकती है।  

कोई टिप्पणी नहीं: