किसी भी राष्ट्र के विकास को मापने का उत्तम मानक वहां का स्वस्थ समाज होता है। नागरिकों की स्वास्थ्य का सीधा असर उनके कार्य-शक्ति पर पड़ता है। नागरिक कार्य-शक्ति का सीधा संबंध राष्ट्रीय उत्पादन-शक्ति से है। जिस देश की उत्पादन शक्ति मजबूत है वह वैश्विक स्तर पर विकास के नए-नए मानक गढ़ने में सफल होता रहा है। इस संदर्भ में यह स्पष्ट हो जाता है कि किसी भी राष्ट्र के विकास में वहां के नागरिक-स्वास्थ्य का बेहतर होना बहुत ही जरूरी है। शायद यही कारण है कि अमेरिका जैसे वैभवशाली राष्ट्र की राजनीतिक हलचल में स्वास्थ्य का मसला अपना अहम स्थान पाता है। दरअसल किसी भी राष्ट्र के लिए अपने नागरिकों की स्वास्थ्य की रक्षा करना पहला धर्म होता है। उपरोक्त बातें स्वस्थ भारत अभियान के राष्ट्रीय संयोजक आशुतोष कुमार सिंह ने कही। दिल्ली के बदरपुर में स्वास्थ्य और स्वच्छता विषय पर आयोजित परिचर्चा में वो बोल रहे थे।
महात्मा गांधी के स्वास्थ्य दर्शन से लोगों को परिचित कराते हुए श्री आशुतोष ने अपने संबोधन के अंत में कहा कि क्या हम गणतंत्र दिवस के इस पावन अवसर पर स्वास्थ्य व स्वच्छता के प्रति एक आत्म संविधान बनाने का संकल्प ले सकते हैं। परिचर्चा को आगे बढ़ाते हुए नागरिक अधिकारों के प्रति लोगों को जागरूक करने वाले आरटीआई कार्यकर्ता अफरोज आलम साहिल ने कहा कि हमें सरकार द्वारा चलाई जा रही योजनाओं पर भी कड़ी नज़र रखनी चाहिए। स्वास्थ्य व स्वच्छता को तकनीक से कैसे जोड़ा जाए इस संदर्भ को सोशल मीडिया एक्टिविस्ट कनिष्क कश्यप ने बखूबी समझाया। डॉ.के.के तिवारी ने अस्वच्छता से फैल रही बीमारोयों के प्रति लोगों को सचेत किया। परिचर्चा की शुरूआत जानी-मानी लोकगायिका सीमा तिवारी के स्वागत गान से हुआ। धन्यवाद ज्ञापन सिम्पैथी के निदेशक डॉ. रंजीत कांत ने दिया। परिचर्चा का संचालन पत्रकार ऋतेश पाठक ने किया।

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