नयी दिल्ली, 22 नवम्बर, अल्पसंख्यक मामलों के राज्यमंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा है कि तेल संसाधनों पर कब्जे की होड़ में कुछ पश्चिमी देशों ने बगदादी जैसी शैतानी ताकतों को पालने-पोसने में मदद की है जो आज इंसानियत और विश्वशांति के सबसे बड़े दुश्मन हैं, श्री नकवी ने अपने एक ब्लॉग में लिखा कि आतंकवाद के पीछे सबसे बड़ा कारण बढ़ता कट्टरवाद भी है। कट्टरवाद के कारण कई देशों के युवा इस्लामिक स्टेट (आईएस) की "मजहबी अफीम" के नशे में दुनिया भर में खून-खराबों का हिस्सा बन रहे हैं। आईएस और अल-क़ायदा जैसे आतंकवादी संगठन कट्टरवाद और शैतानियत का सबसे भयानक रूप हैं। ये आतंकवादी संगठन हिंसा के बल पर अपना राज कायम करने का सब्जबाग़ मुसलमानों को दिखा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि तेल संसाधनों पर कब्जे की होड़ में कुछ पश्चिमी देशों ने भी जाने-अनजाने में बगदादी और लादेन जैसी शैतानी ताकतों को पालने-पोसने में मदद की है। अब वक़्त आ गया है कि आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक स्तर पर लड़ाई शुरू की जाए। आतंकवाद तथा कट्टरवाद की इस समस्या को ख़त्म करने के प्रयास में संपूर्ण विश्व, इस्लाम जगत, धर्म गुरुओं और विद्वानों को एकजुट होना होगा क्योंकि यह चुनौती इंसानियत के साथ-साथ इस्लाम के लिए भी उतनी ही गंभीर है। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि हाल में पेरिस और बमाको में हुए आतंकवादी हमले तथा दुनिया में लगातार बढ़ रहा आतंकवाद का खतरा, भारत द्वारा लम्बे समय से कही जा रही इस बात को मजबूती देता है कि आतंकवाद अब किसी एक देश या क्षेत्र की समस्या नहीं रह गया है बल्कि आतंकवाद के दानव ने समस्त विश्व में अपने पैर पसार लिए हैं और यह पूरी दुनिया में शांति, स्थिरता और अर्थव्यवस्था के लिए सबसे बड़ा खतरा बन गया है। दुनिया को समझ लेना चाहिए कि आतंकवाद और कट्टरवाद के खिलाफ सभी देशों को एकजुट होना होगा।
आतंकवाद पर दोहरा मापदंड ठीक नहीं क्योंकि आतंकवाद और कट्टरवाद अपने हर रूप में इंसानियत और विश्वशांति के सबसे बड़े दुश्मन हैं । उन्होंने कहा कि आतंकवादियों की इंसानियत को झकझोरने वाली हरकतें इस्लाम के मूल सिद्धांतों के विपरीत ही नहीं हैं बल्कि उसकी धज्जियां उड़ा रही है। इन शैतानी हरकतों को मीडिया और दुनिया “इस्लामी आतंकवाद, जिहादी आतंकवाद” नाम दे रही है। यह सच है कि जब ऐसे हमले इस्लाम को सुरक्षा कवच बना कर अल-कायदा या आईएस करते हैं, तो पूरी दुनिया के शांतिप्रिय मुसलमान सहम जाते हैं। उन्हें लगता है कि इन शैतानी ताकतों की हरकतों का असर हम पर भी पड़ेगा और वे दुआ करते हैं कि "खुदा खैर करे", और ऐसी आतंकी ताकतों का खात्मा हो। इसीलिए जब लादेन जैसा आतंकी मारा जाता है, बगदादी के ठिकाने ध्वस्त होते हैं तो दुनिया का शान्तिप्रिय मुसलमान सुकून का एहसास करता है।
श्री नकवी ने कहा कि दरअसल बढ़ रही वैश्विक अर्थव्यवस्था पर कब्जे की होड़ में ये ‘प्यादे’ आज ‘वजीर’ का रूप ले चुके हैं। तेल के कुँए से तेल की जगह धुआँ निकलने लगा है, इन कुओं का असर मुंबई से लेकर पेरिस, न्यूयॉर्क और दुनिया के हर हिस्से में देखा जा रहा है। यह धुआं इंसानियत की आत्मा को झकझोर रहा है। यह बड़ी आतंकी घटनाएँ इस बात की तस्दीक करती हैं कि इन आतंकी-शैतानी ताकतों को कहीं ना कहीं से हथियार और आर्थिक मदद मिल रही है, कुछ ताकतें इस शैतानी तमाशे का तमाशबीन बन चुकी हैं। वरना इन आतंकवादी ताकतों के पास बेहताशा दौलत और अत्याधुनिक हथियारों का जखीरा कहाँ से आ रहा है? उन्होंने कहा कि दुनिया की सभी ताकतों को "इंसानी जिहाद" छेड़ना होगा ताकि "इस्लामी जिहाद" के नाम पर पूरे विश्व को अपनी शैतानी हरकतों का शिकार बना रहे ये लोग ख़त्म किये जा सकें । ऐसे तत्व उन देशों के लिए भी खतरे की घंटी हैं जो जाने-अनजाने में इन शैतानी ताकतों के मददगार बने हुए हैं।
श्री नकवी ने कहा कि 14-15 नवंबर को मिस्र के लुक्सर में आतंकवाद और कट्टरवाद की वैश्विक चुनौतियों पर अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया गया था जिसमे लगभग 42 देशों के इमाम, धर्म गुरु, बुद्धिजीवी और मंत्री शामिल हुए। इस सम्मेलन में उन्हें भारत का प्रतिनिधित्व करने का मौका मिला। इस सम्मेलन में आतंकवाद और कट्टरवाद की गंभीर चुनौतियों पर विस्तृत चर्चा हुई, सभी देशों ने आतंकवाद और कट्टरवाद के खिलाफ एक स्वर में अपनी बात रखी और इस्लाम को सुरक्षा कवच बना कर कुछ ताकतों के खूनी खेल के खिलाफ लड़ाई का ऐलान किया। सम्मेलन में आतंकवाद की चुनौतियों को इस्लाम जगत के लिए बड़ी चुनौती बताया गया और आईएस जैसे संगठनों द्वारा पूरी दुनिया में अपनी हरकतों से इस्लाम को बदनाम करने पर भी गहरी चिंता जताई गई। इस्लाम जगत आज बहुत ही चुनौती भरे समय से गुजर रहा है और इसका मूल कारण है बढ़ता हुआ कट्टरवाद और कुछ आतंकी समूहों द्वारा धर्म का दुरूपयोग कर अपनी सत्ता स्थापित करने का प्रयास। ये समूह पवित्र कुरान की गलत व्याख्या अपने निजी स्वार्थ के लिए कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस्लाम शान्ति और भाईचारे का सन्देश देने वाला धर्म है। अधिकांश मुस्लिम शान्तिप्रिय हैं और हिंसा तथा आतंकवाद का विरोध करते हैं। हमें यह याद रखना चाहिए कि सातवीं शताब्दी में इस्लाम आधुनिकता में सबसे आगे था और यह सामाजिक न्याय, आर्थिक समानता, लैंगिक समानता और जनतांत्रिक मूल्यों पर आधारित था।
इस्लाम धर्म ने तो कई शताब्दियों तक विश्व के विभिन्न क्षेत्रों में शान्ति और स्थिरता स्थापित की। यह सिद्धांत अभी भी उतने ही मजबूत हैं। इन्हें और मजबूत और प्रभावशाली बनाने की जरुरत है जिससे अपने स्वार्थ के लिए धर्म का दुरूपयोग करने वाले तत्वों को पराजित और अलग थलग किया जा सके और ऐसे तत्वों से इस्लाम धर्म की छवि को विश्व व्यापी दुष्प्रभाव से बचाया जा सके। श्री नकवी ने कहा कि मजबूत सांस्कृतिक और सामाजिक एकता, जीवंत और सुदृढ़ प्रजातंत्र के कारण भारत में आतंकवाद अपनी जड़ें नहीं जमा पाया है। कट्टरवाद पर लगाम लगाने की भारत की नीति कारगर रही है। विभिन्न भाषाओँ, धर्मों, जातियों के बावजूद भारत की सांस्कृतिक और सामाजिक एकता, सौहार्द के कारण आतंकवादी गुट देश के युवाओं को भ्रमित करने में असफल रहे हैं। समाज, धर्म गुरुओं, मीडिया ने इसमें एक अहम भूमिका निभायी है । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विभिन्न अंतर्राष्ट्रीय मंचों से आतंकवाद के वित्तपोषण को ख़त्म करने का आह्वान किया है। इससे आतंकवादियों की क्षमताएं सीमित हो जाएँगी और उनकी कमर तोड़ी जा सकेगी।

कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें