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मंगलवार, 1 अगस्त 2017

उज्जैन में प्रजा को दर्शन देने नगर भ्रमण पर ठाट-बाट से निकले भगवान महाकाल

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उज्जैन 31 जुलाई, मध्यप्रदेश की धार्मिक नगरी उज्जैन के राजाधिराज भगवान महाकालेश्वर आज श्रावण माह के चौथे सोमवार को राजसी ठाट-बाट के साथ अपनी प्रजा को दर्शन देने के लिए नगर भ्रमण पर निकले। इस अवसर पर इंद्रदेव ने भी वर्षा कर भगवान की बौछारें से अभिषेक किया। भगवान महाकाल ने आज अपनी प्रजा को चार रूपों में दर्शन दिये। भव्यमयी सवारी निकलने के पहले श्री महाकालेश्वर मंदिर के सभामंडप में प्रदेश के ऊर्जा मंत्री पारस जैन ने भगवान महाकाल का पूजन-अर्चना की। इस विधाान के बाद भगवान महाकाल की पालकी नगर भ्रमण के लिये रवाना किया गया। इस मौके पर विधायक डॉ.मोहन यादव, माखनसिंह, प्रदीप पाण्डे, अखिल भारतीय अखाडा परिषद के महामंत्री महंत श्री हरिगिरी, लोकायुक्त डी.जी.पी. अनिल कुमार श्रीवास्तव, डी.आई.जी. डॉ.रमणसिंह सिकरवार, इन्दौर अपर आयुक्त आनंद शर्मा सहित जिले के वरिष्ठ अधिकारी एवं जनप्रतिनिधि आदि उपस्थित थे। चौथी सवारी में भगवान महाकाल उमामहेश स्वरूप में भक्तों को दर्शन दिये तथा रजतजडित पालकी में भगवान श्री चन्द्रमोलेश्वर विराजित थे और हाथी पर श्री मनमहेश, गरूड रथ पर श्री शिव तांडव की प्रतिमा और नंदी रथ पर श्री उमामहेश विराजित थे। महाकाल मंदिर से जैसे ही पालकी मंदिर के मुख्य द्वार पर पहुंची वैसे ही सशस्त्र पुलिस बल के जवानों के द्वारा सलामी दी गई। पालकी के आगे घुडसवार दल, सशस्त्र पुलिस बल के जवान आदि की टुकडियां मार्च पास्ट करते हुए चल रही थीं। सवारी के समय हजारों भक्त भगवान शिव का गुणगान करते हुए और विभिन्न भजन मंडलियां झांझ-मंजीरे, डमरू बजाते हुए चल रहे थे। सवारी के साथ बैण्ड-बाजों, हाथी-घोड़ों एवं कड़ाबीन के धमाके के साथ पालकी के दर्शन करने के लिये रामघाट, दत्त अखाड़ा घाट, रामानुकोट से रामघाट तक हजारों श्रद्धालु भक्तिभाव से खड़े थे। जैसे ही पालकी घाट पर पहुंची, ‘जय महाकाल’ के उद्घोष से घाट गुंजायमान हो गया। पुलिस बैण्ड द्वारा मधुर भजनों के धुनों की प्रस्तुति से श्रद्धालु भावविभोर हो गये। रामघाट पर विश्राम देकर पालकी में विराजित उमामहेश की मूर्ति का पूजन-अर्चन कर पुरोहितों द्वारा आरती की गई। मुख्य सवारी मार्ग के दोनों तरफ हजारों श्रद्धालु भगवान चन्द्रमोलेश्वर के दर्शन के लिए खडे थे। जैसे ही पालकी उनके सामने से निकली वैसे ही भगवान के गुणगान एवं पुष्प वर्षा की गई। सवारी के रामघाट पहुंचने पर क्षिप्रा के जल से भगवान महाकाल का अभिषेक कर पूजा-अर्चना की गई। इसके पश्चात सवारी अपने निर्धारित मार्ग से होते हुए पुनः महाकाल मंदिर को रवाना हुई। पवित्र क्षिप्रा नदी के रामघाट पर इस बार सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किये गये थे। श्रद्धालुओं को सुगमता से पालकी के दर्शन हो सकें, इस हेतु बैरिकेटिंग लगाकर व्यवस्था की गई थी। सवारी मार्ग एवं रामघाट पर पुलिस द्वारा पर्याप्त संख्या में बल लगाकर सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की गई। होमगार्ड द्वारा निरन्तर शिप्रा नदी में बोट द्वारा पेट्रोलिंग की गई जिसस कि किसी भी आकस्मिक घटना को रोका जा सके।

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