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बुधवार, 7 फ़रवरी 2018

विशेष आलेख : बजट में जमीन से आसमान तक के विकास का सपना

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केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने वर्ष 2018 का केंद्रीय बजट पेश कर एक बार फिर साबित किया कि वे वित्तीय मामलों के बड़े फनकार हैं। जिस उस्तादी के साथ उन्होंने जमीन से आसमान तक अपने बजट में विकास की छलांग लगाई है, उसने उनके विरोधियों को झटका तो दिया ही है। सबको खुश करने की यह उनकी कोशिश ही है कि विपक्ष भी कुछ खास टिप्पणी कर पाने की स्थिति में नहीं है। सिवा यह कहने के कि यह एक साल पहले पेश किया गया 2019 का चुनावी बजट है।  सच तो यह है कि इस बजट में गांव, गरीब, किसान, उद्योग से जुड़े लोगों और आदिवासियों के विकास का तो ध्यान रखा ही गया है,देश की वाजिब जरूरतों को भी समझने की कोशिश की गई है। देश की परिवहन चिंताओं का भी समाधान तलाशा गया है। बजट में देश की जरूरतों और सम्यक विकास पर न केवल ध्यान रखा गया है बल्कि बेरोजगार हाथों को काम देने की ठोस आश्वस्ति भी इस बजट का प्राणतत्व बनी है। जेटली ने अपने बजट में गांवों और किसानों की बेहतरी तथा वरिष्ठ नागरिकों के हितों का ही नहीं, राजनेताओं के हितों का भी पूरा ध्यान रखा है। सांसदों का वेतन तय करने के लिए नया कानून बनाने की बात की गई है जिसके तहत हर 5 साल में सांसदों के वेतन और भत्ते की समीक्षा की जानी है। 1 अप्रैल, 2018 से यह व्यवस्था आरंभ होगी। राष्ट्रपति को 5 लाख, उपराष्ट्रपति को 4 लाख और राज्यपाल को मिलेगी 3 लाख रुपये बतौर वेतन मिलेंगे। 

मोदी सरकार में भारत के दुनिया की सातवीं बड़ी अर्थव्यवस्था बनने पर भी उन्होंने अपनी पीठ थपथपाई है। उनके इस बयान को कांग्रेस के पूर्व वित्तमंत्री प्रणव मुखर्जी के हालिया बयान का प्रतिवाद भी कहा जा सकता है जिसमें उन्होंने कहा था कि देश की अर्थव्यवस्था को आगे ले जाने में कांग्रेस के वित्तमंत्रियों की बड़ी भूमिका रही है। जेटली का मौजूदा बयान समझदार को ईशारा काफी वाला ही है। उन्होंने कहा है कि देश की अर्थव्यवस्था लगभग 6 प्रतिशत है। 2018-19 में अर्थव्यवस्था के 7.2 से 7.5 के बीच प्रतिशत रहने का अनुमान है। जिन कंपनियों का वार्षिक टर्नओवर 250 करोड़ है उन्हें भी कॉर्पोरेट टैक्स में 25 प्रतिशत टैक्स देना होगा। इससे देश के  99 फीसद लघु, सूक्ष्म और मध्यम उद्योगों को लाभ मिलेगा। आयकर में किसी तरह की छूट न मिलने से नौकरीपेशा लोगों को जरूर झटका लगा हैै। गरीबों को जेटली का बड़ा तोहफा हो सकती है नेशनल हेल्थ स्कीम। इसके तहत हर जरूरतमंद गरीब परिवार को 5 लाख रुपए प्रतिवर्ष इलाज के लिए मदद मिलेगी। इसके लिए केंद्र सरकार ने 1200 करोड़ का कोष निर्धारित किया है। दुनिया भर में यह अपनी तरह का पहला कोष है। इस कोष से देश के 10 करोड़ परिवार लाभान्वित होंगे। सरकार का दावा है कि वह 50 करोड़ लोगों का स्वास्थ्य बीमा करवाएगी। 24 नए मेडिकल कॉलेज खोलेगी। टीबी मरीजों को हर माह 500 रुपये की मदद देगी। गरीबों के प्रति सरकार की यह चिंता यह बताती है कि सरकार गरीबों का दर्द और उनकी चिंताओं को समझती भी है और उनके हर सुख-दुख में उनके साथ खड़ी भी है। 

रेलवे के विकास को लेकर भी वित्त मंत्री ने बड़ी घोषणाएं की हैं। उन्होंने न केवल इस निमित्त 1.48 लाख करोड़ का प्रावधान किया है बल्कि समूचे रेल नेटवर्क को ब्राॅडगेज में तब्दील करने का वादा भी किया है। इससे न केवल रेल पटरियां नई हो जाएंगी बल्कि रेल हादसों की तादाद में भी कमी आएगी। मुंबई लोकल का 90 किमी तक विस्तार, 25 हजार से ज्यादा यात्रियों वाले सभी रेलवे स्टेशन पर एस्केलेटर्स बनाने, सभी रेलवे स्टेशनों पर वाईफाई और सीसीटीवी कैमरे लगाने, 600 बड़े रेलवे स्टेशनों के आधुनिकीकरण और 36 हजार किमी. की नई रेल लाइनें बिछाए जाने का प्रावधान इस बात का संकेत तो है ही कि केंद्र सरकार रेलवे महकमे को रामभरोसे छोड़ने के पक्ष में नहीं है। हवाई यातायात को लेकर भी वित्तमंत्री की चिंता बजट में मुखरता से साथ झलकी है। उन्होंने हवाई यातायात को सस्ता और सुगम बनाने की बात कही है। हवाई अड्डों की संख्या में पांच गुना इजापफा करने की उनकी घोषणा को कमोवेश इसी रूप में लिया जा सकता है। सरकार की योजना 56 बेकार पड़े एयरपोर्ट और 31 हेलीपेड्स का भी उपयोग करने की है। एयरपोर्ट अथॉरिटी के पास संप्रति 124 हवाई अड्डे हैं। सरकार का प्रयास हवाई यातायात को एक अरब करने का है। 

वित्त मंत्री ने देश को यह बताया है कि काले धन पर अंकुश लगाने के उसके प्रयासों के तहत देश में आयकर संग्रह 90 हजार करोड़ रुपये बढ़ा है। 19.25 लाख नए करदाता बढ़े हैं। डायरेक्ट टैक्स कलेक्शन 12.6 प्रतिशत बढ़ा है। अगले साल जीडीपी घाटा 3.3 प्रतिशत रहने का अनुमान है। किसान उत्पाद कंपनियों को 100 करोड़ के टर्नओवर पर शत प्रतिशत आयकर में छूट देने का प्रावधान भी सराहनीय है। कुल मिलाकर इस बजट का पूरा फोकस ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर है। गांवों के विकास उसकी योजना के केंद्र में है। वित्तमंत्री ने एक बार फिर किसानों के कल्याण के लिए सरकार की प्रतिबद्ध दोहराई है। 2022 तक किसानों की आय दोगुना करने का संकल्प दोहराते हुए उन्होंने 2 हजार करोड़ की लागत से कृषि बाजार बनाने खरीफ फसलों का समर्थन मूल्य उत्पादन मूल्य से डेढ़ गुना करने का ऐलान भी किया है। ऑपरेशन ग्रीन शुरू करने, पशुपालकों और मछली पालकों को भी किसान क्रेडिट कार्ड देने, आलू, टमाटर और प्याज के लिए 500 करोड़ का प्रावधान करने और  42 मेगा फूड पार्क बनाने के प्रस्ताव को किसानों के लिए बेहत हितकारी तो कहा ही जा सकता है।  बांस को वन क्षेत्र से अलग कर वित्तमंत्री ने बंसपफोर समुदाय को प्रकारांतर से पार्टी लाइन से जोड़ने की भी कोशिश की है। बांस लगाने वाले किसान भी इससे सीधे तौर पर लाभान्वित होंगे। 1290 करोड़ की लागत के राष्ट्रीय बांस मिशन, मछली और पशुपालन के लिए दो नए फंड का प्रावधान बंसफोर समुदाय और मल्लाहों के लिए संजीवनी का काम कर सकता है। कृषि ऋण के लिए 11 लाख करोड़ का प्रस्ताव सुखद है और यह संकेत देता है कि सोहनलाल द्विवेदी का भारत की आत्मा कहलाने वाला गांव अब उपेक्षित नहीं रहा। 

दिल्ली एनसीआर में प्रदूषण घटाने के लिए नई योजना का ऐलान उन्होंने नया ऐलान किया। अपनेबजट में उन्होंने खेतों में पराली जलाने से होने वाले प्रदूषण से निपटने के तज्ञेर-तरीके भी बताए। इससे उन्होंने यह जताने की कोशिश की कि सरकार समस्याओं को लटकाने में नहीं, सुलझाने में रुचि रखती है। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत ग्रामीण इलाकों में 52 लाख गरीबों को घर देने, 8 करोड़ ग्रामीण महिलाओं को मुफ्त एलपीजी कनेक्शन देने, 4 करोड़ गरीब घरों को सौभाग्य योजना के तहत बिजली कनेक्शन देने का प्रावधान तथा गांवों में 2 करोड़ नए शौचालय बनाने का बजट प्रस्ताव कर उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विकास योजनाओं को ही विस्तार दिया है।  बजट में शिक्षा व्यवस्था की सुद्ढ़ता का भी विशेष ध्यान रखा गया है। प्री-नर्सरी से लेकर 12वीं तक के लिए नई शिक्षा योजना लाने के वादे को इसी रूप में देखा जा सकता है। बड़ोदरा में रेलवे यूनिवर्सिटी बनाने और नवोदय स्कूल की तर्ज पर आदिवासियों के लिए एकलव्य स्कूल खेले जाने के सरकार के बजट प्रस्ताव को इसी आलोक में देखना ज्यादा मुफीद होगा। वित्त मंत्री ने बजट में व्यापार शुरू करने के लिए मुद्रा योजना के तहत 3 लाख करोड़ मुद्रा योजना के तहत दिए जाने और छोटे उद्योगों के लिए 3794 करोड़ खर्च करने की बात कही है। इसे युवाओं को रोजगार देने के लिए शुरू की गई स्टार्ट अप योजना को विस्तार देने के क्रम में ही देखा जा रहा है। सरकार ने नए कर्मचारियों के ईपीएफ में 12 प्रतिशत योगदान देने और ईपीएफ में महिलाओं का योगदान 12 से 8 प्रतिशत करने तथा 70 लाख नई नौकरियां पैदा करने की बात कहकर नौकरीपेशा लोगों, महिलाओं और युवाओं को अपने खेमे में लाने की भी कोशिश की है। 

 कपड़ा उद्योगों को लिए 7148 करोड़ का प्रावधन, दलितों के कल्याण के लिए 56619 करोड़ और अनुसूचित जनजाति के कल्याण के लिए 39135 करोड़ का ऐलान कर जेटली ने एक तरह से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की वर्ष 2019 की चुनावी राह आसान कर दी है। स्मार्ट सिटी के लिए 99 शहरों का चयन, धार्मिक-पर्यटन वाले शहरों के लिए हेरिटेज सिटी योजना और 100 स्मारकों को आदर्श बनाने की घोषणा कर वित्तमंत्री ने विपक्ष से एकबारगी विरोध करने की ताकत छीन ली है। 500 शहरों में पेयजल के लिए अमृत योजना, 494 परियोजनाओं के लिए 19428 करोड़ का प्रावधान कर वित्तमंत्री ने सरकार की जनसापेक्ष नीति और नीयत का भी इजहार किया है। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने इस बार के बजट भाषण में परंपरा भी तोड़ी है। आजादी के बाद हिंदी में बजट भाषण करने वाले वे देश के पहले वित्त मंत्री बन गए हैं। 250 करोड़ तक के टर्नओवर वाली कंपनियों पर लगेगा 25 पर्सेंट कॉर्पोरेट टैक्स देना होगा। गांवों में इंटरनेट के विकास के लिए 10 हजार करोड़ रुपये सरकार देगी। ग्रामीण क्षेत्रों 5 लाख हॉटस्पॉट बनाए जाएंगे।। 99 प्रतिशत लघु एवं सीमांत उद्योगों को 25 प्रतिशत कर ही देना होगा। 250 करोड़ तक के टर्नओवर वाली कंपनियों पर 25 प्रतिशत कॉर्पोरेट टैक्स लगेगा। वित्तमंत्री ने यह तो कहा है कि नए करदाता बढ़े हैं लेकिन उन्होंने इस बात पर चिंता भी जाहिर की है कि देश में अभी भी बहुतेरे लोग हैं जो ईमानदारी के साथ कर नहीं दे रहे हैं। उन्होंने 5.95 लाख करोड़ रुपयेके सरकारी घाटे का बजट पेश किया है और वित्तीय वर्ष 2018-19 में  वित्तीय घाटा 3.3 प्रतिशत रहने की बात कही है। आभासी मुद्रा के इस्तेमाल पर रोक लगाने के लिए कदम उठाने का प्रस्ताव देश की जनता के लिए न केवल राहतकारी है बल्कि उसे धोखाधड़ी से बचाने वाला भी साबित होगा। सोने के लिए जल्दी ही नई नीति का ऐलान करने के भी वित्तमंत्री ने संकेत दिए हैं। इससे सोने को लाने और ले जाने में सहजता हो सकती है। 

 सरकारी कंपनियों के शेयरों को बेचकर 2018-19 में 80 हजार करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य जरूर विस्मयकारी है लेकिन सरकार अपनी आवष्यकताओं और विवशताओं को बेहतर जानती है। 14 सरकारी कंपनियों को शेयर बाजार में ले जाने का और क्या विकल्प हो सकता है, अगर इस पर सरकार पुनर्विचार करे तो ज्यादा उपयुक्त होगा। 2 सरकारी बीमा कंपनियां शेयर बाजार में आएंगी।  डिजिटल इंडिया प्रोग्राम के लिए 3037 करोड़ रुपये की राशि का आवंटन और गांवों में 22 हजार हाटों को कृषि बाजार में तब्दील करने का प्रस्ताव इस बात का प्रमाण है कि सरकार इस देश की विकास यात्रा को दूर तक ले जाने के लिए प्रतिबद्ध है। यह बजट जितना शहर के लिए उपयोगी है, उससे कहीं अधिक गांव के लिए उपयोगी है। आर्थिक समानता लाने के लिए देर-सवेर गांवों पर ध्यान तो देना ही था। यह नेक शुरुआत है। स्वागतव्य है। 





--सियाराम पांडेय ‘शांत’ --
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