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शुक्रवार, 9 फ़रवरी 2018

खालिदा जिया को भ्रष्टाचार के मामले में पांच साल की कठोर कैद

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ढाका, आठ फरवरी, बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया को आज भ्रष्टाचार के एक मामले में पांच साल कठोर कैद की सजा सुनायी गयी। यह 72 वर्षीय मुख्य विपक्षी नेता के लिए एक झटका है क्योंकि उन्हें दिसंबर में होने वाला अगला आम चुनाव लड़ने से रोका जा सकता है। ढाका की विशेष अदालत ने तीन बार प्रधानमंत्री रहीं जिया को 2.1 करोड़ टका (250,000 डालर) के विदेशी चंदे के गबन के सिलसिले में यह सजा सुनायी। यह राशि जिया ओरफनेज ट्रस्ट के वास्ते थी। इस ट्रस्ट का नाम उसके दिवंगत पति जियाउर रहमान के नाम पर रखा गया था।  इसी फैसले में जिया के ‘भगोड़े’ बड़े बेटे और बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) के वरिष्ठ उपाध्यक्ष तारिक रहमान को भी सजा सुनायी गयी है, उन पर उनकी गैर मौजूदगी में मुकदमा चला। रहमान और चार अन्य को 10-10 साल कैद की सजा सुनायी गयी है। न्यायाधीश मोहम्मद अख्तरजुम्मा ने फैसला सुनाते हुए कहा, ‘‘आरोपियों के खिलाफ यह मामला बिना किसी संदेह के साबित हुआ। ’’  जिया अदालत में कड़ी सुरक्षा के बीच पेश हुईं। वह सफेद साड़ी में थीं। जिया को सश्रम कारावास की सजा सुनाते हुए न्यायाधीश ने कहा कि कम अवधि की कैद की सजा उनके स्वास्थ्य और सामाजिक दर्जे को ध्यान में रखकर सुनायी गयी है। उन्होंने 632 पन्ने के अपने फैसले का संक्षिप्त संस्करण पढ़कर सुनाया। उस वक्त अदालत में बीएनपी के कई नेता मौजूद थे।  अदालत ने यह भी कहा कि बचाव पक्ष ने सुनवाई में बाधा डालने का यथासंभव प्रयास किया और उसने 35 मौकों पर अदालत बदलने की मांग की।

अन्य मुजरिम पूर्व सांसद काजी सलीमुल हक कमाल, व्यापारी शरफुद्दीन अहमद , प्रधानमंत्री की पूर्व सचिव कमाल उद्दीन सिद्दिकी और उनके भतीजे मोमिनुर रहमान हैं। जिया पूर्व सैन्य तानाशाह से नेता बने एच एम इरशाद के बाद भ्रष्टाचार के मामले में दोषी ठहरायी गयी दूसरी शासनाध्यक्ष हैं। कानूनी विशेषज्ञों की राय है कि इस फैसले के बाद ऐसी आशंका है कि जिया को दिसंबर में होने वाला चुनाव नहीं लड़ने दिया जाएगा। यह फैसला जिया और अन्य को इस मामले में अभ्यारोपित किये जाने के चार साल बाद आया है। जिया के मुख्य वकील खोंडकर महबूब हुसैन ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘हम उच्च न्यायालय में इस फैसले को चुनौती देंगे। इंशा अल्लाह हमें वहां इंसाफ मिलेगा।’’  अदालत के फैसला सुनाये जाने के तत्काल बाद जिया को सुरक्षा कर्मी उन्हें जीप तक ले गये और फिर जीप से वह ढाका की केंद्रीय जेल रवाना हो गयीं। गृह मंत्री असदुज्जमां खान ने कहा, ‘‘उन्होंने तीन बार प्रधानमंत्री के तौर पर सेवा की और वह एक बड़े राजनीतिक दल की अध्यक्ष हैं....... उनकी उम्र और दर्जे को ध्यान में रखकर उन्हें सभी सुविधाएं उपलब्ध करायी जाएंगी जिनकी वह हकदार हैं। ’’ टेलीविजन पर दिखाया गया कि जिया बेहद मायूसी के आलम में खड़ी हैं। उनकी आंखों पर गहरे रंग का चश्मा था। सुरक्षा बल उन्हें सुरक्षा घेरे में वाहन तक ले गए जहां से उन्हें निकटवर्ती जेल ले जाया गया।  इससे पूर्व ढाका की सड़कों पर कड़े सुरक्षा इंतजाम के बीच जिया अपने आवास गुलशन से अदालत के लिए निकलीं। उस समय सशस्त्र पुलिस के अलावा उनके निजी सुरक्षा कर्मी भी उनके साथ थे। 

चश्मदीदों के अनुसार जिया के सैंकड़ो समर्थक अदालत जाने वाली सड़कों पर चले आए और उनकी कई स्थानों पर पुलिस से झड़प हुई। ककरैल इलाके में पथराव कर रहे बीएनपी कार्यकर्ताओं को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने आसूंगैस के गोले दागे और रबड़ की गोलियां भी चलायीं। इससे पूर्व कल एक संवाददाता सम्मेलन में जिया ने सत्तारुढ़ (प्रधानमंत्री शेख हसीना की अगुवाई वाली बांग्लादेश आवामी लीग) पर आतंक का शासन कायम करने का आरोप लगाया और दावा किया कि उन्हें झूठे मामले में फंसाया गया है। इस बीच आवामी लीग के महासचिव और सड़क परिवहन मंत्री ओबैदुल कुआदर ने कहा कि पिछली सैन्य समर्थित अंतरिम सरकार ने 2008 में जिया के खिलाफ मामला दर्ज किया था और वर्तमान सरकार का इस प्रक्रिया से कोई लेना देना नहीं है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले के बाद जिया को शायद दिसंबर में होने वाला चुनाव नहीं लड़ने दिया जाएगा। राजनीतिक प्रेक्षकों का कहना है कि बीएनपी विभाजित हो सकता है क्योंकि कई वरिष्ठ नेता जिया से अपना नाता तोड़ सकते हैं और उसकी वजह है कि उनके बेटे और वरिष्ठ उपाध्यक्ष रहमान कद्दावर नेताओं की अनदेखी कर लंदन से पार्टी पर वर्चस्व बनाये हुए हैं। समझा जाता है कि रहमान ने कानून के कठघरे से बचने के लिए ब्रिटेन में शरण मांगी है । उन पर आवामी लीग की एक रैली पर हमले समेत कई आरोपों पर सुनवाई चल रही है। वर्ष 2004 में 21 अगस्त को रैली पर हमला हुआ था और उसमें 23 लोग मारे गये थे। हसीना बाल बाल बच गयी थीं।

भ्रष्टाचार के मामले में सुनवाई से बचने की जिया की अंतिम कोशिश भी 30 नवंबर, 2014 को तब नाकाम हो गई थी जब सुप्रीम कोर्ट ने उनके अभ्यारोपण को चुनौती देने वाली उनकी अपील को स्वीकार नहीं किया था और उनसे निचली अदालत में सुनवाई का सामना करने को कहा था। उससे पहले 19 मार्च, 2014 को हाईकोर्ट ने निचली अदालत में उस सुनवाई को सही ठहराया था। भ्रष्टाचार निरोधक आयोग (एसीसी) ने उन पर भ्रष्टाचार के दो आरोप लगाये थे। जिया और उनके खास सहयोगियों पर अकेले जिया चैरिटेबल ट्रस्ट से 400,000 डालर की हेराफेरी का आरोप है। उन पर अन्य 277,000 डालर के गबन में अपने सबसे बड़े बेटे समेत पांच लोगों की अगुवाई करने का आरोप है। बाद की धनराशि अनाथालय के वास्ते थी। उनके पति जियाउर सैन्य शासक से नेता बने थे और बीएनपी के संस्थापक थे । वर्ष 1981 में तख्तापलट में उनकी हत्या कर दी गयी थी।
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