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बुधवार, 14 मार्च 2018

हंगामे, बहिर्गमन के बीच आम बजट को लोकसभा की मंजूरी

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नयी दिल्ली 14 मार्च, अलग-अलग मुद्दों पर विभिन्न दलों के हंगामे और कुछ दलों के सदस्यों के बहिर्गमन के बीच लोकसभा ने सभी मंत्रालयों तथा विभागों की अनुदान मांगें (गिलेटिन), संबंधित विनियोग विधेयक तथा वित्त विधेयक 2018 को आज बिना चर्चा के ध्वनिमत से पारित कर दिया। इसके साथ ही 2018-19 के आम बजट को सदन की मंजूरी मिल गयी। हाल के वर्षों में यह पहला मौका है जब किसी भी मंत्रालय की अनुदान मांगों और वित्त विधेयक को बिना चर्चा के पारित किया गया है। आम बजट पर बजट सत्र के पहले चरण के दौरान चर्चा हुई थी, लेकिन इस बार किसी भी मंत्रालय की अनुदान मांगों पर अलग से चर्चा नहीं हो पायी। बजट सत्र का दूसरा चरण गत पांच मार्च को शुरू होने के बाद से सात दिन से सदन में विपक्षी सदस्यों तथा सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) की सहयोगी तेलुगूदेशम पार्टी के हंगामे के कारण कोई कामकाज नहीं हो पा रहा था। वित्त विधेयक अब राज्य सभा में जाना है, वहां हंगामे के कारण अब तक कोई कामकाज नहीं हो पाया है। ऊपरी सदन यदि वित्त विधेयक को 14 दिनों के भीतर मंजूरी देकर लोकसभा को वापस नहीं लौटाता है तो इसे स्वत: पारित मान लिया जायेगा। कुछ मंत्रालयों की अनुदान मांगें, वित्त विधेयक तथा गिलेटिन पारित कराने के लिए कल लोकसभा की कार्यसूची में शामिल थे, लेकिन हंगामे के कारण कोई चर्चा नहीं हो पायी थी। आज की कार्यसूची में, विभिन्न मंत्रालयों और विभागों की अनुदान मांगें एकसाथ (गिलेटिन) शाम पांच बजे पारित करायी जानी थी, लेकिन संसदीय कार्य मंत्री अनंत कुमार ने सुबह कार्यवाही शुरू होने पर विपक्ष के हंगामे के बीच लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन से अनुरोध किया कि सभी अनुदान मांगें तथा वित्त विधेयक 2018 और चालू वित्त वर्ष की अनुपूरक अनुदान मांगें एवं संबंधित विनियोग विधेयक दोपहर 12 बजे के बाद ही पारित कर दिये जायें। अध्यक्ष ने उनका अनुरोध स्वीकार करते हुए सदन की कार्यवाही 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दी। 


कार्यवाही पुन: शुरू होने पर वित्त मंत्री अरुण जेटली ने सभी मंत्रालयों और विभागों की अनुदान मांगें (गिलेटिन), उनसे संबंधित विनियोग विधेयक पारित कराने के लिए पेश किया, जिसे सदन ने हंगामे के बीच ध्वनिमत से पारित कर दिया।इसके बाद उन्होंने वित्त विधेयक 2018 को 21 संशोधनों के साथ पारित कराने के लिए पेश किया, उसे भी सदन ने बिना चर्चा के ध्वनिमत से पारित कर दिया। इसी दौरान कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के सदस्य सदन से बहिर्गमन कर गये। चालू वित्त वर्ष की पूरक मांगें और संबंधित विनियोग विधेयक भी बिना चर्चा के पारित किये गये।  विपक्षी दलों ने इस तरह अनुदान मांगें और वित्त विधेयक बिना चर्चा के पारित कराये जाने को ‘लोकतंत्र की हत्या’ करार दिया। हंगामे के बीच कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस के सदस्य ‘लोकतंत्र की हत्या बंद करो’ के नारे लगा रहे थे और उन्होंने सदन से बहिर्गमन भी किया। बजट सत्र के दूसरे चरण के शुरू होने के दिन से ही विपक्षी दलों तथा राजग की सहयोगी तेलुगूदेशम पार्टी के सदस्य विभिन्न मुद्दों पर भारी हंगामा कर रहे हैं, जिससे सदन में पिछले सात दिनों तक कोई कामकाज नहीं हो सका। मुख्य विपक्षी कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस के सदस्य जहां सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में हजारों करोड़ रुपये के घोटाले को लेकर हंगामा कर रहे हैं, वहीं वाईएसआर कांग्रेस और तेलुगूदेशम पार्टी के सदस्य आंध्र प्रदेश को विशेष राज्य का दर्जा देने की मांग कर रहे हैं। अन्नाद्रमुक सदस्य कावेरी प्रबंधन बोर्ड गठित करने तथा तेलंगाना राष्ट्र समिति के सदस्य तेलंगाना में आरक्षण का कोटा बढ़ाये जाने की मांग को लेकर हंगामा कर रहे हैं। मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी, आम आदमी पार्टी के सदस्य भी अपनी सीटों पर खड़े होकर नारेबाजी करते रहे हैं। सदन में आज भी हंगामे की स्थिति बनी रही और सरकार ने वित्त विधेयक और अनुदान मांगों को पारित कराने का फैसला किया। इन्हें पारित करने के बाद सदन की कार्यवाही दिन भर के लिए स्थगित कर दी गयी। 


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