बिहार : बच्चों को हांकने के बाद भी बच्चे स्कूल आते नहीं, क्लास रूम में रखते हैं जलावन - Live Aaryaavart

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शुक्रवार, 27 अप्रैल 2018

बिहार : बच्चों को हांकने के बाद भी बच्चे स्कूल आते नहीं, क्लास रूम में रखते हैं जलावन

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बकिया.बकिया ग्राम पंचायत में है कामास्थान.इसी जगह से संचालित है प्राथमिक विद्यालय,कामास्थान. इस विद्यालय में पांच कक्षा तक की पढ़ाई होती है. इसमें 400 बच्चों का नामांकन हुआ है.इन बच्चों को पढ़ाने के लिए केवल दो महिला शिक्षक बहाल हैं.उसमें एक प्रधानाध्यापिका और दूसरी बीओ हैं. दोनों कार्य निपटारा करने ऑफिस और फील्ड में आते जाते रहते हैं.इनकी परेशानियों को परिजन भापकर बच्चों को स्कूल भेजना ही बंद कर दिये हैं.इस उपकार को देखकर शिक्षक भी कर्तव्य निभा रहे हैं.मिड डे मील का भंडारा चला रहे हैं.खुद भी खाते हैं और स्कूल के बगल में रहने वाले पड़ोसियों को खिलाकर पड़ोसी प्रेम दिखा रहे हैं कि कोई जांच करने आये तो नकारात्मक बात सामने न जाए.

जी हां यही स्थिति व परिस्थिति कमोबेश है.सवाल यहां के 400 बच्चों का भविष्य से है? जिसे मोटी रजिस्टर पर अंकित कर बंद कर दिया है.भूले बिछड़े शिक्षा विभाग के अफसर आते हैं.डेली एटेडेंस व एडमिशन रजिस्टर देख खुश हो जाते है. कोई 15 तरह के रजिस्टर  स्कूल में है जिसे अद्यतन करके रखना पड़ता है.बहरहाल इस विद्यालय में  किसी भी बच्चे को पढ़ते व पढ़ाते नहीं देखा गया. क्लास रूम के द्वार किसी बच्चे ने बुक रखी है.यहां पर दो कुर्सी है.एक पर महिला टीचर बैठी है.दूसरी खाली है. प्रधानाध्यापिका बच्चों को हांककर लाने गयी हैं.उनके हांकने से भी बच्चे नहीं आये.दूसरी खाली कुर्सी पर बैठे देखकर तीसरी कुर्सी पर बैठ गयीं.  कुर्सी पर बैठकर प्रधानाध्यापिका कहती हैं कि यहां अनेक रूम हैं.इसके कारण एक रूम में लकड़ी रखवा रहे हैं.अलग से जलावन का   भंडारण करने का घर नहीं है.इसका उपयोग कर रहे हैं.मिड डे मील चलाना है.स्कूल चले या न चले. वार्ड नम्बर-12 के पूर्व वार्ड सदस्य रामलाल ऋषि कहते हैं कि स्कूल में पढ़ाई नहीं होती है.इस लिए बच्चे स्कूल नहीं जाते हैं.मिड डे मील पर सवाल उठाकर बंद कर देने पर बल दिया.
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