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बुधवार, 9 मई 2018

स्वास्थ्य : यदि करते हो पत्नी से प्यार तो होम्योपैथिक प्रसव सुरक्षा चक्रसे क्यों इनकार?

हर वर्ष की भांति, इस वर्ष भी हजारों-लाखों युवक-युवती दाम्पत्य जीवन की शुरूआत कर चुके हैं या करने जा रहे हैं। सभी को मुझ डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश' की ओर से हार्दिक बधाई तथा सुखद, स्वस्थ एवं सफल दाम्पत्य जीवन की अनंत शुभकामनाएं। विवाह के बाद आप सभी नव दम्पत्ती रंगीन सपनों की दुनियां में बिल्कुल नये जीवन से सुखद अहसास से मुखातिब हो रहे हैं। इस नयी भूमिका में आप सभी के सामने रोमांचकारी चुनौतियां तथा अनेक जिम्मेदारियां भी हैं। जीवन के इस महत्वपूर्ण पड़ाव पर एक अति महत्वपूर्ण विषय पर ध्यान आकर्षित करना चाहता हूँ।  नवदम्पत्तियों (newly married) को भी प्रकृति के अनुक्रम को आगे बढाने के लिये निकट भविष्य में सन्तान सुख की प्राप्ति होनी है। जिसकी भावात्मक अनुभूति का अहसास क्या होता है, इसे सन्तान पाकर ही समझ सकेंगे।

एक लड़की, पत्नी से मां बनकर सम्पूर्ण नारी बनती है। जैसा कि हम सभी जानते हैं कि सन्तान को जन्म देकर स्त्री को पुनर्जन्म मिलता है। प्रसव पीड़ा और प्रसव के बाद की सुखानुभूति क्या होती है, इसे सिर्फ एक माँ ही समझ सकती है। विज्ञान ने हमारे जीवन को आसान बनाया है। इसके उपरांत भी आंकड़े बताते हैं, कि शहरों में 40% तक प्रसव सिजेरियन होने लगे हैं। गांवों में यह आंकड़ा कुछ कम है। आंकड़े यह भी बतलाते हैं कि जिन माताओं के सिजेरियन प्रसव होते हैं, उनमें से 70% से अधिक गैर-जरूरी होते हैं। जिसके मूलत: तीन बड़े कारण बताए जाते हैं:- 

1-नवयुवतियों में सामान्य प्रसव को लेकर भ्रांत धारणा तथा युवावस्था की दहलीज पर कदम रखने के साथ ही आसन्न प्रसव (impending delivery or childbirth) की काल्पनिक पीड़ा (fictional pain) का असहनीय दर्दनाक अहसास अवचेतन मन (subconscious mind) में स्थापित कर लेना। जो उनके दिलों-दिमांग पर फोबिया (phobia) बनकर कब्जा कर लेता है।
2-लालची डॉक्टर्स की कभी न तृप्त होने वाली धन की भूख, जिसके कारण सामान्य हो सकने वाले प्रसव को भी सिजेरियन प्रसव बना दिया जाता है। और
3-प्रकृतिदत्त पेचीदगियां। जिनमें जच्चा और बच्चा में से किसी एक या दोनों की जान बचाने के लिए सिजेरियन प्रसव जरूरी हो जाता है।

उपरोक्त हालातों में असामान्य तरीके से मां बनने वाली माताओं का प्रसव के बाद का जीवन जहां शारीरिक एवं मानसिक रूप से अनंत अनचाही पीड़ाओं (unwanted infinite pain) का कारण बन जाता है। वहीं सिजेरियन प्रसव शारीरिक कुरूपता को भी जन्म देता है। जिसका स्त्री के मन पर गहरा नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। सी-सेक्शन प्रसव के बाद भी बहुत सारी महिलाएं आसानी से यौन-सम्बन्ध नहीं बना पाती है। उनके जीवन में यौन-सम्बन्ध पीड़ादायक अहसास बन जाता है। जिससे ऐसे जोड़ों का दाम्पत्य जीवन बिखराव के कगार पर पहुंच जाता है। जिसके कारण अनेक मामलों में विवाहेत्तर यौन सम्बन्धों (extramarital sexual relations) का जन्म होता है। ऐसे हालात परिवारों के बिखराव, तलाक तथा सामाजिक विकृतियों के लिये उत्तरदायी होते हैं।

इस सब अनचाही स्थितियों से 95% से अधिक मामलों में बचा जा सकता है। बशर्ते-

* 1-गर्भिणी महिलाएं गर्भ के दौरान निठल्ली एवं निष्क्रिय बनकर सिजेरियन प्रसव होने के सपने देखना बंद कर दें और लालची डॉक्टरों के डराने से डरें नहीं। और
* 2-गर्भ धारण करते ही होम्योपैथी तथा बॉयोकैमी की दुष्प्रभाव रहित दवाईयों का नियमित सेवन करें।

होम्योपैथिक एवं बॉयोकैमिक दवाईयां गर्भावस्था एवं प्रसव को कैसे आसान बनाती हैं?

* 1-गर्भस्राव और गर्भपात को रोकती हैं।
* 2-गर्भकालीन अनचाही तकलीफों से मुक्ति दिलाती हैं।
* 3-असमय/समय पूर्व प्रसव (premature delivery) को रोकती हैं।
* 4-दर्दरहित और आसान प्रसव में सहयोग करती हैं।
* 5-शिशु के संरक्षण, विकास एवं पोषण में सहायक बनती हैं।


होम्योपैथिक एवं बॉयोकैमिक दवाईयों के सेवन के बाद सिजेरियन प्रसव की जरूरत क्यों नहीं पड़ती है?

होम्योपैथिक एवं बॉयोकैमिक दवाईयां स्त्री के प्रजनन संस्थान के तंत्रिका-तंत्र में ऐसा संतुलित लचीलापन (balanced flexibility) एवं संकोचन (Contraction) पैदा कर देती हैं। जिसके फलस्वरूप स्त्री का सम्पूर्ण प्रजनन संस्थान निर्धारित समय से पहले प्रसव होने नहीं देता और निर्धारित समय के बाद गर्भ का अतिरिक्त समय बढने नहीं देता। अर्थात न समय से पहले प्रसव (premature delivery), न समय के बाद (undue delay)। जिसे यों कह सकते हैं कि चित भी मेरी और पट भी मेरी। प्रसव के समय स्त्री के सम्पूर्ण प्रजनन संस्थान का तंत्रिका-तंत्र इतना कोमल और लचीला हो जाता है कि बिना किसी बाहरी एवं अप्राकृतिक हस्तक्षेप तथा विशेष दर्दनाक पीड़ा को झेले बिना ही शिशु बहुत ही आसानी से जन्म ले पाता है। इसी वजह से गर्भिणी को प्रसव पूर्व, झूठी प्रसव पीड़ा भी नहीं झेलनी पड़ती है। भविष्य में स्त्री को गर्भाशयच्युति (Uterus Collapse) की समस्या होने की संभावना नगण्य हो जाती है। प्रसव के बाद स्त्री के प्रजनन अंक सिकुड़कर लगभग पूर्ववत स्त्री में लौट आते हैं, जो भावी सुखद दाम्पत्य जीवन के लिये सुखद अहसास के आधार बनते हैं। अंतिम बात होम्योपैथिक एवं बॉयोकैमिक दवाईयों का सेवन बहुत आसान और तुलनात्मक रूप से बहुत कम खर्चीला होता है। मैं गत दो दशक से अधिक समय से प्रसव सुरक्षा चक्र (Pregnancy Safe-Guard-PSG) उपलब्ध करवाता रहा हूं और जिसके परिणामस्वरूप गर्भिणियों को आसानी से प्राकृतिक प्रसव होते रहे हैं। बशर्ते कि लालची डॉक्टर्स के डराने से डरें नहीं।


अत: माता-पिता बनने से पहले और अपनी पहली संतान को जन्म देने से पहले किसी होम्योपैथ की सलाह लेना नहीं भूलें। यह कदम गर्भिणी के लिये सौंदर्य रक्षक, आसान, पीड़ा रहित तथा सामान्य प्रसव का सुखद अहसास और आप दोनों के भावी दाम्पत्य जीवन में रोमांचकारी अनुभव का आधार बनेगा।


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(डॉ. पुरुषोत्तम लाल मीणा):
संपर्क : 85619-55619
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