सीहोर (मध्यप्रदेश) की खबर 14 मई - Live Aaryaavart

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सोमवार, 14 मई 2018

सीहोर (मध्यप्रदेश) की खबर 14 मई

आदतन अपराधी जिला बदर

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सीहोर जिले में शांति एवं कानून व्यवस्था बनाये रखने के उद्देश्य से कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी श्री तरूण कुमार पिथोडे द्वारा एक आदतन अपराधी को छ: माह के लिए जिला बदर करने के आदेश प्रसारित किए हैं।कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी श्री तरूण कुमार पिथोडे  ने पुलिस अधीक्षक सीहोर से प्राप्त प्रतिवेदन से पूर्णत: संतुष्ट होकर मध्यप्रदेश राज्य सुरक्षा अधिनियम 1990 की धारा 5 (क) (ख) एवं 6 के अंतर्गत लक्ष्मीनारायण वल्द मिश्रीलाल उम्र 40 साल निवासी हैदरगंज थाना मंडी जिला सीहोर को जिला सीहोर एवं उसके सीमावर्ती जिले भोपाल, रायसेन, होशंगाबाद, हरदा, देवास, शाजापुर एवं राजगढ जिलों की राजस्व सीमाओं से छ: माह के लिए निष्कासित किया है। उल्लेखनीय है कि यह आदतन अपराधी क्षेत्र में कभी भी कोई अप्रिय घटना घटित कर सकता है। इनका समाज में इतना आतंक है कि लोग इसके विरूद्ध रिपोर्ट लिखवाने एवं गवाही देने से कतराते हैं। इन्ही सब बिन्दुओं को दृष्टिगत रखते हुए कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी श्री तरूण कुमार पिथोडे ने जिला बदर की कार्यवाही की है।  

जिला स्तरीय शिक्षक समस्या निवारण शिविर 18 को

जिला शिक्षा अधिकारी सीहोर ने बताया कि जिला स्तरीय शिक्षक समस्या निवारण शिविर का आयोजन 18 मई,2018 को कार्यालय समय में शासकीय उत्कृष्ट उच्चतर माध्यमिक विद्यालय सीहोर किया जाएगा। इस सिलसिले में जिले के समस्त विकासखंड शिक्षा अधिकारियों तथा समस्त प्राचार्य संकुल केन्द्र शासकीय हाई स्कूल / उ.मा.वि. को निर्देशित किया गया है कि शिविर में जिला परियोजना समन्वयक, जिला शिक्षा केन्द्र सीहोर, समस्त विकासखंड शिक्षा अधिकारी, समस्त संकुल केन्द्र प्राचार्य एवं समस्त विकासखंड स्त्रोत समन्वयक जनपद शिक्षा केन्द्र अनिवार्य रूप से उपस्थित रहना सुनिश्चित करें। शिविर में विकासखंड शिक्षा अधिकारी उनके विकास खंड से संबंधित समस्याओं का पंजीयन करेंगे तथा प्राप्त समस्याओं के परीक्षण उपरांत अपनी टीप अंकित करेंगे। इस तरह संकुल केन्द्र प्राचार्यो को निर्देशित किया गया है कि वे शिविर के आयोजन की सूचना समस्त शिक्षक / अध्यापक संवर्गीय कर्मचारियों को देना सुनिश्चित करें तथा विकासखंड स्तरीय समस्या निवारण शिविर में प्राप्त आवेदन पत्रों के निराकरण का पालन प्रतिवेदन प्रस्तुत करेंगे। 

भारतीय झण्डा संहिता 2002 तथा  राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम 1971 में अंतर्विष्‍ट उपबंधों का कडाई से अनुपालन करने के निर्देश

भारत सरकार के गृह मंत्रालय के संज्ञान में लाया गया है कि महत्वपूर्ण राष्ट्रीय, सांस्कृतिक और खेलकूद के अवसर पर कागज के झंडों के स्थान पर प्लास्टिक के झंडों का प्रयोग भी किया जा रहा है। चूंकि प्लास्टिक से बने झंडे कागज के समान जैविक रूप से अपव्यय नहीं होते है, वे लंबे समय तक नष्ट नहीं होते है और प्लास्टिक से बने राष्ट्रीय झंडों का सम्मानपूर्वक निपटान सुनिश्चित करना भी एक व्यवहारिक समस्या है। इस सिलसिले में कलेक्टर श्री तरूण कुमार पिथोडे ने जिले के समस्त कार्यालय प्रमुखों को निर्देशित किया है कि महत्वपूर्ण राष्ट्रीय, सांस्कृतिक और खेलकूद के अवसरों पर भारतीय झंडा संहित 2002 के प्रावधान के अनुरूप जनता व्दारा केवल कागज से बने झंडों का ही प्रयोग किया जाए तथा समारोह के पूरा होने के पश्चात ऐसे कागज के झंडों को न तो विकृत किया जाए और न ही जमीन पर फेंका जाए। ऐसे झंडों का निपटान उनकी मर्यादा के अनुरूप एकांत में किया जाए। स्मरण रहे कि राष्ट्रीय ध्वज हमारे देश के लोगों की आशाओं एवं आकांक्षाओं का प्रतिनिधित्व करता है और इसलिए इसे सम्मान की स्थिति मिलनी चाहिए। राष्ट्रीय ध्वज के लिए एक सार्वभौमिक लगाव और आदर तथा वफादारी होती है। 
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