बिहार : जरलाही पंचायत के लोगों को 18 सालों के बाद भी भूमि पर कब्जा नहीं - Live Aaryaavart

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गुरुवार, 13 सितंबर 2018

बिहार : जरलाही पंचायत के लोगों को 18 सालों के बाद भी भूमि पर कब्जा नहीं

  • सी.एम.नीतीश कुमार से भूमि संबंधी विवादों के शीघ्र समाधान के लिए त्वरित न्यायालय गठित करने की मांग की गई है

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कुर्सेला। इस प्रखंड में है जरलाही पंचायत. सड़क के किनारे 60  परिवार रहते हैं.यहां पर दो वार्ड है वार्ड नम्बर -4 और वार्ड नम्बर -5 . वार्ड नम्बर- 4 का वार्ड सदस्य दिलीप कुमार और वार्ड नम्बर-5 की वार्ड सदस्या अनिता देवी हैं. सभी परिवार महादलित हैं. बिहार सरकार ने 60 परिवारों की पहचान कर 2004 में 15 परिवारों को आवासीय भूमि दी.इन लोगों को तीन डिसमिल जमीन दी गयी.वहीं 20 अन्य परिवारों को एक एकड़ जमीन दी गई.इस जमीन पर घर व खेती करना है.बेचन राम व अवधेश राम को मुरादपुर मौजा में एक-एक एकड़ जमीन दी गयी.खाता सं.3786 और खेसरा सं.6113 है. सुरीता देवी, पुनम देवी, मनोरमा देवी,सेवरी देवी,सूरती देवी,फुलो देवी,मो.करोरवा देवी,जयमाल देवी,राधा देवी,बिजली देवी,रीना देवी,मखड़ी देवी, अनीता देवी,रानी देवी,मो.कुसमी देवी और तारा देवी को जरलाही मौजा में जमीन दी गई. खाता सं.1341 और खेसरा सं.2478/2507 है.सुबोध राम व प्रमोद राम को गोबराही मौजा में जमीन मिली है. खाता सं.708  और खेसरा संख्या 121/410 है. यह दुर्भाग्य है कि  सरकार ने भूमिहीनों को जमीन का पर्चा देकर जमीन का मालिक बना दिया. इन लोगों ने जमीन का दाखिल खारिज भी कराकर मालगुजारी का रसीद भी कटवा लिए. मगर जमीन पर कब्जा नहीं हो सका है.यह जमीन सिलिंग की है.जमीन मालिक कैलाशपति महतो का ही जमीन पर कब्जा बरकरार है.

जागरूकता बैठक में शामिल होने वालों ने कहा कि 2005 से ही पर्चा मेरे साथ और जमीन किसी और के हाथ से भूमि की लड़ाई लड़ रहे हैं.हाफ सेंचुरी बार कुर्सेला प्रखंड का द्येराव किया गया.कटिहार से पटना तक केस किया गया है.पटना हाई कोर्ट में कैलाशपति महतो ने बिहार सरकार पर मुकदमा ठोंक दिया है. पर्चाधारियों ने कटिहार में कटिहार कोर्ट में कैलाशपति महतो पर केस कर रखा है.गरीब लोग चंदा करके केस लड़ रहे हैं. बताते चले कि 18 सालों से कोर्ट का चक्कर लगाकर लोग थक गए हैं. आज एकता परिषद भारत के 17 राज्यों के 124 जिलों तक फैल चुका है. आज लगभग 1000 स्वैच्छिक  संगठनों का व्यापक गठबंधन है जिसका उद्देश्य वंचितों ,आदिवासियों,दलितों,खेतिहर मजदूरों, मछुआरों,चरवाहों, घुमंतु जातियों,शहरी गरीबों तथा किसानों को उनके जल,जंगल व जमीन पर अधिकारों के लिए अहिंसात्मक संघर्ष में शामिल हो गए हैं.  
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