बिहार : भाकपा-माले से संबद्ध खेग्रामस का छठा राष्ट्रीय सम्मेलन 19-20 नवबंर को जहानाबाद में - Live Aaryaavart

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शनिवार, 10 नवंबर 2018

बिहार : भाकपा-माले से संबद्ध खेग्रामस का छठा राष्ट्रीय सम्मेलन 19-20 नवबंर को जहानाबाद में

  • सम्मेलन के अवसर पर 19 नवंबर को जहानाबाद में भाजपा भगाओ-गरीब बचाओ रैली का होगा आयोजन.
  • माले महासचिव काॅ. दीपंकर भट्टाचार्य रैली को करेंगे संबोधित
  • पटना मे आज हुई खेग्रामस की राज्य कार्यकारिणी की बैठक.
  • ‘मजदूर-किसानों ने ठाना है, लुटेरी मोदी सरकार को भगाना है’ के केंद्रीय नारे के साथ हो रहा है सम्मेलन.
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पटना 10 नवंबर 2018, भाकपा-माले से संबद्ध अखिल भारतीय खेत व ग्रामीण मजदूर सभा (खेग्रामस) का छठा राष्ट्रीय सम्मेलन आगामी 19-20 नवंबर को जहानाबाद में होगा. आज पटना में संगठन की बिहार राज्य कार्यकारिणी की बैठक के बाद खेग्रामस के राष्ट्रीय महासचिव का. धीरेन्द्र झा ने बयान जारी कहा कि यह सम्मेलन ‘मजदूर-किसानों ने ठाना है, लुटेरी मोदी सरकार को भगाना है’ के केंद्रीय नारे के साथ हो रहा है. सम्मेलन के अवसर पर जहानाबाद के गांधी मैदान में भाजपा भगाओ-गरीब बचाओ रैली भी आयोजित होगी, जिसे भाकपा-माले के महासचिव काॅ. दीपंकर भट्टाचार्य मुख्य वक्ता के बतौर संबोधित करेंगे. सम्मेलन में प्रख्यात अर्थशास्त्री ज्यां ड्रेज, एएन सिन्हा के पूर्व निदेशक डीएम दिवाकर, आशीष रंजन आदि अर्थशास्त्री भी शिरकत करेंगे.

खेग्रामस की राज्य कार्यकारिणी की बैठक में भाकपा-माले के राज्य सचिव काॅ. कुणाल और पोलित ब्यूरो के सदस्य व मगध जोन के पार्टी प्रभारी काॅ. अमर, पूर्व सांसद व संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष काॅ. रामेश्वर प्रसाद, खेग्रामस के बिहार के राज्य अध्यक्ष वीरेन्द्र प्रसाद गुप्ता, खेग्रामस के बिहार राज्य सचिव गोपाल रविदास, विधायक सत्येदव राम सहित अन्य लोगो ने भाग लिया. माले राज्य सचिव ने बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि खेत व ग्रामीण मजदूरों का यह राष्ट्रीय सम्मेलन जहानाबाद में हो रहा है जो खेतिहर मजदूरों व गरीब किसानों के क्रांतिकारी आंदोलन की धरती रही है. इस सम्मेलन से उस आंदोलन को और बल मिलेगा.

का. धीरेन्द्र झा ने आगे कहा कि  मोदी राज में गांव व गरीबों की स्थिति बद से बदतर हुई है. नोटबंदी ने कृषि मजदूरों व गरीब किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर काफी नकारात्मक असर डाला है. बेरोजगारी आज चरम पर है. एक बार फिर भूख से हो रही मौतों का भूगोल विस्तृत हुआ है. बगल के राज्य भाजपा शासित झारखंड में अब तक कई भूख से मौतों का उदाहरण हमारे सामने है. देश को लूटने वाले विदेश भाग जा रहे हैं और भगोड़ों को सरकारी संरक्षण देने का खेल चल रहा हे. इन संकटों का बोझ गांव, गरीबों और मजदूर-किसानों पर लाद दिया गया है. बिहार में आज गरीबों को वास-चास की जमीन देने की बजाए भाजपा-जदयू राज में हर जगह से उजाड़ा जा रहा है. जैसे कोई गरीब उजाड़ो अभियान चल रहा हो. ये सब हमारे राष्ट्रीय सम्मेलन के मुद्दे होंगे.

सम्मेलन में इन मुद्दों के अलावा देश-परदेश में मजदूरों की सुरक्षा व सम्मान की गारंटी हेतु केंद्रीय कानून बनाने, सबों के लिए राशन-रोजगार व पेंशन की गारंटी करने, बच्चे-बच्चियों के लिए समान व गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की व्यवस्था करने आदि मांगों को भी प्रमुखता से उठाया जाएगा. अंत मे ंकहा कि सम्मेलन व रैली से केंद्र की मोदी सरकार व बिहार की भाजपा-जदयू सरकार के खिलाफ निर्णायक संघर्ष का ऐलान होगा. सांप्रदायिक उन्माद के खिलाफ संविधान, लोकतंत्र व जनाधिकारों की रक्षा के लिए इस अभियान में बिहार की जनता से सहयोग व समर्थन अपेक्षित है.
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