सीहोर (मध्यप्रदेश) की खबर 21 जून - Live Aaryaavart

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शनिवार, 22 जून 2019

सीहोर (मध्यप्रदेश) की खबर 21 जून

योग कर मनाया कर्मचारियों ने योग दिवस

jhabua news
सीहोर। अंतरराष्ट्रिय योग दिवस के मौके पर ग्राम पिपलिया मीरा स्थित फैक्ट्री जयश्री गायत्री फुड प्रोडक्ट्स प्रा. लि. में सभी कर्मचारीयों के लिए एक विशेष योग शिविर का आयोजन किया गया। इस शिविर में योगाचार्य श्री कमल बकबैया एवं श्री दिपेश राठौर द्वारा सभी कर्मचारियों को योग के लाभों की जानकारी प्रदान की गई तथा योग के महत्वों को समझाया गया। इसमें सभी कर्मचारियों ने योगाचार्यो के मार्गदर्शन में साथ मिलकर योग किया। इस मौके पर कम्पनी के डारेक्टर श्री राजेन्द्र प्रसाद मोदी जी ने सभी कर्मचारियों को बताया की अपनी  दिनचर्या में योग को शामिल कर महत्वपूर्ण स्थान देना चाहिए जिससें कभी किसी को कोई भी बिमारी नही होगी और वे सदैव स्वस्थ बने रहेगें। उन्होंने बताया कि अब योग केवल भारत तक ही सिमित नही है अपितु सम्पूर्ण विश्व में फैल चुका है। कार्यक्रम में मुख्य रूप से जी.ऍम. श्री सुनील कुमार त्रिपाठी, श्री दीपचन्द बघेल, श्री ओमप्रकाश सिकरवार, श्री अमित कुक्लोद, श्री अखिलेश राठौर, आदि उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन एवं आभार एच.आर. श्री जगजीत सिंह ने किया ।

अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर जिले में सामूहिक योग कार्यक्रम आयोजित   

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पांचवे अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के इस अवसर पर जिला मुख्यालय सहित जिले के समस्त विकासखण्डों, पंचायत स्तर एवं शाला स्तर पर सामूहिक योग प्रदर्शन कार्यक्रम आयोजित किए गए। पूरे जिले में लगभग 5 हजार लोगों ने योगाभ्यास किया। जिला मुख्यालय स्थित चन्द्रशेखर आजाद महाविद्यालय में आयोजित जिला स्तरीय सामूहिक योग कार्यक्रम में कलेक्टर श्री अजय गुप्ता, पुलिस अधीक्षक श्री शशीन्द्र चौहान, मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत श्री अरुण कुमार विश्वकर्मा, अनुविभागीय अधिकारी श्री वरुण अवस्थी सहित बड़ी संख्या में अधिकारी/कर्मचारी एवं विद्यार्थी उपस्थित थे।   योग हमें प्रकृति से जोड़ता है और जीने की कला सिखाता है। योग को नियमित दिनचर्या में शामिल करना चाहिए। जो लोग नियमित योग करते हैं वे शारीरिक, मानसिक रूप से स्वस्थ्य रहते हैं और उनका व्यक्तित्व भी रचनात्मक होता है। सामूहिक योग प्रदर्शन के दौरान उपस्थितजनों ने वक्रासन, मुकरासन, भुजंगासन, मुक्तासन, शवासन, कपालभाति, प्रणायाम, अनुलोम विलोम सहित अन्य आसन किए। 

आनंद सम्मेलन के संबंध में बैठक आज

मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत श्री अरुण कुमार विश्चकर्मा ने जानकारी देते हुए बताया कि राज्य आनंद संस्थान द्वारा जिला स्तरीय आनंद सम्मेलन का आयोजन 27 जून को प्रात:10 बजे जिला पंचायत सभाकक्ष में किया जाएगा। आनंद सम्मेलन के संबंध में 22 जून को प्रात: 11:30 बजे कलेक्ट्रेट कार्यालय के कक्ष क्रमांक 13 (NIC) में बैठक आयोजित की जाएगी। आनंद सम्मेलन के आयोजन के लिए जिला सूचना विज्ञान अधिकारी श्री संजय जोशी एन.आई.सी. जिला नोडल अधिकारी रहेंगे। कलेक्टर श्री गुप्ता द्वारा जिला आयुष अधिकारी डॉ रामप्रताप सिंह, शासकीय आवासीय खेलकूद संस्थान प्राचार्य श्री आलोक शर्मा, जिला शहरी विकास अभिकरण सहायक परियोजना अधिकारी श्री कमलेश शर्मा को आनंद सम्मेलन के सफलतापूर्वक आयोजन दायित्व सौंपे गये हैं।

सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री श्री थावर चंद गेहलोत 23 जून को सीहोर आएंगे   

सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री श्री थावरचंद गेहलोत 23 जून को सीहोर आएंगे। जारी दौरा कार्यक्रम अनुसार सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री श्री थावरचंद गेहलोत 23 जून को दोपहर 2 बजे भोपाल से प्रस्थान कर 2:30 बजे सीहोर आएंगे। सीहोर में सेकड़ाखेड़ी जोड़ के पास मानसिक पुर्नवास केन्द्र के निर्माण स्थल का अवलोकन करेंगे। तत्पश्चात अपरान्ह 3 बजे सीहोर से देवास के लिए प्रस्थान करेंगे। 

26 जून को मनाया जाएगा अंतर्राष्ट्रीय नशा निवारण दिवस  

26 जून को नशीले पदार्थों के दुरुपयोग और अवैध व्यापार के विरुद्ध अंतर्राष्ट्रीय नशा निवारण दिवस के रूप में मनाया जाएगा। इसका उद्देश्य उन प्रभावों को सशक्त करना है, जिससे नशीले पदार्थों व नशीली दवाईयों से मुक्त समाज का निर्माण किया जा सके।  सामाजिक न्याय एवं नि:शक्तजन कल्याण उपसंचालक द्वारा जिला शिक्षा अधिकारी, परियोजना अधिकारी शिक्षा केन्द्र, जिला चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, जिला खेज एवं युवा कल्याण समिति, समस्त नगरपालिका एवं जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों, प्राचार्य महिला पॉलिटेक्निक महाविद्यालय, शासकीय महिला आईटीआई अधीक्षक, डीन आरएके महाविद्यालय, समन्वय जन अभियान परिषद सीहोर एवं गायत्री शक्तिपीठ प्रभारी को निर्देशित किया गया है कि जिला जनपद पंचायत, नगरीय निकाय, ग्राम पंचायत स्तर पर नशामुक्ति वातावरण बनाने के लिए रैली/दौड़ का आयोजन किया जाए। रैली/दौड़ शहर के अलग-अलग स्थानों से निकालकर एक मुख्य सभास्थल पर समाप्त की जाए। विद्यालय और महाविद्यलयों में विभिन्न प्रतियोगिताएं, सेमीनार तथा जागरुकता कार्यक्रम का आयोजन किया जाए। नशीले पदार्थों के दुष्परिणामों पर आधारित प्रदर्शनी का आयोजन किया जाए। व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए। नशे से पीड़ितजनों का उपचार, परामर्श के लिए स्वास्थ्य शिविरों का आयोजन किया जाए। कलापथक दल/सांस्कृतिक कलामंडिलियों द्वारा नाटक, गीत आदि सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाए।

स्कूल चलें हम अभियान के संबंध में मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने दिए निर्देश  

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ प्रभाकर तिवारी द्वारा सिविल सर्जन सह मुख्य अस्पताल अधीक्षक जिला चिकित्सालय, खंड चिकित्सा अधिकारी, सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र बुदनी, नसरुल्लागंज, इछावर, आष्टा एवं श्यामपुर, प्रभारी चिकित्सा अधिकारी सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र रेहटी, जावर, बिलकिसगंज, दोराहा, लाड़कुई, प्रभारी चिकित्सा अधिकारी प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र बकतरा, मरदानपुर, नीनौर, शाहंगज, अमलाहा, दीपड़िया, रामनगर, भाउखेड़ी, वीरपुर डेम, मैना, कोठरी, सिद्दीकगंज, अहमदपुर, बमूलिया, इटावा इटारसी, वाईभोरी, गोपालपुर एवं चकल्दी को निर्देशित किया है कि जिले के समस्त प्राथमिक एवं माध्यमिक शालाओं में शत प्रतिशत नामांकन एवं ठहराव का लक्ष्य प्राप्त करने के लिए स्कूल चलें हम अभियान द्वितीय चरण संचालित किया जाएगा। लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग द्वारा नवीन शिक्षा सत्र 2019-20 के दौरान आशा कार्यकर्ता, एएनएम एवं अन्य मैदानी कर्मचारी प्रेरक के रूप में करेंगे। समस्त अधिकारी/कर्मचारी अपने अधीन्स्थ अमले को निर्देशित कर जिम्मेदारियों का निर्वहन पूर्ण रूप से कराकर स्कूल शिक्षा विभाग के कार्यक्रम को सफल बनाएं।

कृषि विभाग ने दी खरीफ कृषि मौसम पर आधारित कृषकों को सलाह   

किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग उपसंचालक श्री अवनीश चतुर्वेदी द्वारा जिले के किसानों को सलाह दी गई है कि मौसम पूर्वानुमान के अनुसार आसमान में बादल छाये रहेंगे। हवाओं की गति सामान्य से अधिक गति से चलने का अनुमान है। तेज हवाओं के साथ हल्की बारिश हाने का अनमान है। खरीफ में जरुरत के आदानों जैसे खाद-बीज का प्रबंध क्षेत्रीयता के अनुसार फसल चक्र एवं सिंचाई की उपलब्धता के अनुसार उन्नत किस्मों को चयन करें। श्री चतुर्वेदी ने जानकारी दी कि आगामी मौसम को देखते हुए 22 जून के लगभग मौसमी वर्षा के आगमन का पूर्वानुमान है। सोयाबीन की उन्नत जातियां जैसे आर.व्ही.एस 14 (90 से 95 दिन), आर.व्ही.एस 24 (80 से 85 दिन) एवं आर.व्ही.एस 18 (80 से 85 दिन) J.S.20-34, J.S.20-39, J.S.20-98, J.S.93-05, J.S.95-60, J.S.97-52 आदि के बीजों की बुवाई के लिए अग्रिम व्यवस्था करें। बीज को पीएसबी एवं राईजोबियम कल्चर से उपचारित कर बोयें। बीज उपचार के लिए अनुशंसित फफूंदनाशक जैसे पेनफ्लूफेन+ट्रायफ्लोक्सीस्ट्रोबीन अथवा थायरम + कार्बोक्सीन अथवा थायरम+कार्बेन्डाजिम उपयोग के लिए उपलब्धता सुनिश्चत करें। साथ ही जैविक कल्चर ब्रेडीराइझोबियम जपोनिकम एवं स्फूर घोलक जीवाणु दोनों प्रत्येक 5 ग्राम/कि.ग्रा.बीज की दर से उपयोग करें। अरहर की उन्नत जातियां जैसे टी.जे.टी-501, जवाहर अरहर-4 आशा, जे.के.एम-7 एवं 189 आदि बोएं। दलहनी फसलों के बीज को राइजोबियम एवं पीएसबी कल्चर से उपचारित करें। धान की उन्नतशील जातियां शीघ्र पकने वाली जैसे जे.आर.345, जे.आर.201 पुर्णिमा तथा मध्यम अवधि की आईआर 64, आईआर 54, माधुरी, क्रान्ति, महामाया, पूसा बासमती आदि का रोपा डालें। जितने क्षेत्र में रापण करना हो उसके बीसवां भाग में रोपणी/नर्सरी बनायें। गन्ना बुवाई के इच्छुक किसान जवाहर 86141, को जवाहर 86572, को 86032 आदि किस्मों को बुवाई के लिए चयनित करें। खरीफ फसलों के बीच की बुवाई से पहले मृता में 8 इंच गहराई तक नमी होना अनिवार्य है अर्थात इस नमी पर ही बुवाई करें।

दर्शन, विज्ञान और कर्म का समुच्चय है योग   

योग शब्द का जिक्र वेदों, उपनिषदों, गीता एवं पुराणों में पुरातन काल से होता आया है। भारतीय दर्शन में योग एक महत्वपूर्ण शब्द है। आत्म-दर्शन एवं समाधि से लेकर कर्म क्षेत्र तक योग का व्यापक व्यवहार हमारे शास्त्रों में हुआ है। 'योग दर्शन' के उपदेष्टा महर्षि पतंजलि योग शब्द का अर्थ 'वृत्ति निरोध' करते हैं- "योगश्चित्तवृत्ति निरोध:'' अर्थात ऐसी अवस्था जिसमें चित्त की वृत्तियों का निरोध हो जाये, वह योग है। आत्मा का परमात्मा के साथ योग कर समाधि का आनंद लेना 'योग' है। ऋषियों के अनुसार योग का तात्पर्य स्व-चेतना और चेतना के मुख्य केन्द्र परम् चैतन्य प्रभु के साथ संयुक्त हो जाना है। भारतीय संस्कृति में गीता का महत्वपूर्ण स्थान है। भारतीय सन्तों ने तो गीता के योग का प्रचार विश्वभर में किया है। गीता में योगेश्वर श्री कृष्ण योग को विभिन्न अर्थों में प्रयुक्त करते हैं। अनुकूलता-प्रतिकूलता, सिद्धि-असिद्धि, सफलता-विफलता, जय-पराजय इन समस्त भावों में आत्मस्थ रहते हुए सम रहने को योग कहते हैं।

"योगस्थ: कुरु कर्माणि संग त्यक्तवा धन\जय।
सिद्धयसिद्धयो: समौभूत्वा समत्वं योग उच्यते॥

असंख्य भाव में दृष्टा बनकर अंतर की विश्व प्रेरणा से प्रेरित होकर कुशलता से कर्म करना गीता में योग माना गया है।- 'योग: कर्मसु कौशलम्'' जैनाचार्यों के अनुसार जिन साधनों से आत्मा की सिद्धि और मोक्ष की प्राप्ति होती है, वह योग है। अन्यत्र जैन दर्शन में मन, वाणी एवं शरीर की शक्तियों को भी कर्मयोग कहा गया है। योगी श्री अरविंद के अनुसार परमदेव के साथ एकत्व की प्राप्ति के लिये प्रयत्न तथा इसे प्राप्त करना ही सब योगों का स्वरूप है। इस प्रकार कह सकते हैं कि मन को एकाग्र कर संयमपूर्वक साधना करते हुए आत्मा का परमात्मा के साथ योग कर (जोड़ कर) समाधि का आनंद लेना योग है। योग का अर्थ है, अपनी चेतना/अस्तित्व का बोध होना। अपने अंदर निहित शक्तियों को विकसित कर आत्मा का साक्षात्कार एवं पूर्ण आनंद की प्राप्ति करना योग है। इन यौगिक प्रक्रिया में विविध प्रकार की क्रियाओं का विधान हमारे ऋषि-मुनियों ने किया है। मुख्य रूप से अष्टांग योग (यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारण, ध्यान एवं समाधि) से मानव पूर्ण स्वस्थ रह सकता है। योग से रक्त परिभ्रमण सुचारु रूप से होने लगता है। शरीर विज्ञान के सिद्धांत अनुसार शरीर के मंत्रोचन एवं विमोचन होने से शक्ति का विकास होता है तथा रोगों से छुटकारा मिलता है। आसन एवं प्राणायामों द्वारा शरीर की ग्रंथियों तथा माँसपेशियों में कर्षण-अपकर्षण, आकुंचन-प्रसारण तथा शिथिलीकरण की क्रियाएँ आरोग्य बनाती हैं। रक्त प्रदाय करने वाली धमनियाँ एवं शिराएँ भी स्वस्थ एवं सक्रिय हो जाती हैं। आसन एवं यौगिक क्रिया से पेन्क्रियाज एक्टिव होकर इन्स्युलिन ठीक मात्रा में बनाने लगता है, जिससे डायबिटीज आदि रोग दूर होते हैं। पाचन-तंत्र पर पूरे शरीर का स्वास्थ्य निर्भर करता है। सभी बीमारियों का मूल पाचन-तंत्र की अस्वस्थता है। योग से पाचन-तंत्र पूर्ण स्वस्थ हो जाता है, जिसमें शरीर स्वस्थ एवं स्फूर्तिदायक बन जाता है। योग से ह्रदय रोग जैसी गंभीर बीमारी से भी छुटकारा पाया जा सकता है। फेफड़ों में पूर्ण स्वस्थ वायु के प्रवेश से फेफड़े स्वस्थ होते हैं तथा दमा, श्वास, एलर्जी आदि से छुटकारा मिलता है। फेफड़ों में स्वस्थ वायु जाने से ह्रदय को भी बल मिलता है। यौगिक क्रियाओं से शरीर का भार कम होने पर, वह स्वस्थ, सुडौल एवं सुंदर बनता है। योग से इंद्रियों एवं मन का विग्रह होता है। सु-स्वास्थ्य ही सम्पूर्ण सुखों का आधार है। स्वास्थ्य है तो जहान है, नहीं तो श्‍मशान है। ऋषियों ने "स्वस्थ'' शब्द की बहुत ही व्यापक एवं वैज्ञानिक परिभाषा की है। स्वस्थ कौन है? आयुर्वेद के प्रसिद्ध ग्रंथ सुश्रुत में ऋषि लिखते हैं-

समदोषा: समग्निश्च समधातुमलक्रिय:
प्रसन्नात्मेन्द्रियमन: स्वस्थ इत्यभिधीयते॥

जिनके तीन दोष वात, पित्त एवं कफ सम हों, जठराग्नि सम हो, शरीर को धारण करने वाली सप्त धातुएँ रस, रक्त, मास, मेद, अस्थि, मज्जा तथा वीर्य उचित अनुपात में हो, मल-मूत्र की क्रिया सम्यक प्रकार से होती हो और दस इंद्रियों (कान, नाक, आँख, त्वचा, रसना, गुदा, उपस्थ, हाथ, पैर और जिह्वा), मन एवं इनकी स्वामी आत्मा भी प्रसन्न हो तो ऐसे व्यक्ति को स्वस्थ कहा जाता है। अच्छे स्वास्थ्य की प्राप्ति के लिये आहार, निज एवं ब्रह्मचर्य तीन स्तम्भ हैं। इनके ऊपर यह शरीर टिका हुआ है। भगवद् गीता में योगेश्वर श्री कृष्ण कहते हैं-

युक्ताहारविहारस्य युक्तचेष्टस्य कर्मसु।
युक्तस्वप्नावाबोधस्य योगो भवति दु:खहा॥

जिनके आहार, विहार, विचार एवं व्यवहार संतुलित एवं संयमित हैं। जिनके कार्यों में दिव्यता, मन में सदा पवित्रता एवं शुभ के प्रति अभीप्सा है, जिनका शयन एवं जागरण अर्थपूर्ण है, वही सच्चा योगी है। आजकल देश-विदेशों में सर्वत्र योग की चर्चा है। व्यापकता तथा अलौकिक शक्ति देने वाली विद्या होने से लोग योग की ओर आकर्षित हो रहे हैं।

प्रमुख आसन
कुछ आसन हैं, जिसके करने से मनुष्य को लाभ प्राप्त होता है, वह स्वस्थ बना रहता है।
1.  'पद्मासन'- ध्यान के लिये उत्तम आसन है। मन की एकाग्रता तथा प्राणोत्थान में सहायक है। जठराग्नि को तीव्र करता है। वात-व्याधि में लाभदायक है।
2.   'मत्स्यासन'- पेट के लिये उत्तम है। आँतों को सक्रिय कर कब्ज को दूर करता है। थाइराइड, पेराथाइड एवं एड्रिनल को स्वस्थ बनाता है। सर्वाइकल पेन या ग्रीवा की पीछे की हड्डी बढ़ी होने पर लाभदायक है। फेफड़ों के रोग दमा, श्वास आदि की निवृत्ति करता है।
3.  'वज्रासन'- ध्यानात्मक आसन है। मन की चंचलता दूर करता है। घुटनों की पीड़ा दूर होती है। भोजन के बाद किया जाने वाला यह एकमात्र आसन है। इसके करने से अपचन, अम्ल पित्त, गैस, कब्ज से छुटकारा मिलता है। भोजन के बाद 5 से 15 मिनट तक करने से भोज्य का पाचन ठीक से हो जाता है।
4. 'मण्डूकासन'- अग्नाशय (पेन्क्रियाज) को सक्रिय करता है। इसलिये इन्स्युलिन अधिक मात्रा में बनने लगता है। अत: डायबिटीज को दूर करने में सहायक होता है। उदर रोगों में उपयोगी और ह्रदय के लिये लाभदायक है।
5.  'चक्रासन'- रीढ़ की हड्डी को लचीला बनाकर वृद्धावस्था नहीं आने देता। जठर एवं आँतों को सक्रिय करता है। शरीर में स्फूर्ति, शक्ति एवं तेज की वृद्धि करता है। कटि-पीड़ा, श्वांस रोग, सिर-दर्द, नेत्र विकारों, सर्वाइकल तथा स्पांडोलाइसिस में विशेष हितकारी है। हाथ-पैरों की माँसपेशियों को सबल बनाता है। महिलाओं के गर्भाशय के विकारों को दूर करता है।
6.  'मर्कटासन'- कमर-दर्द, सर्वाइकल स्पांडोलाइटिस, स्लिप-डिस्क एवं सायटिका में विशेष लाभकारी है। पेट-दर्द, दस्त, कब्ज एवं गैस को दूर कर पेट को हल्का बनाता है। नितम्ब, जोड़ के दर्द में विशेष लाभदायक है। मेरूदण्ड की सभी विकृतियों को दूर करता है।
7.   'भुजंगासन'- सर्वाइकल, स्पांडोलाइटिस एवं स्लिप-डिस्क, समस्त मेरू दण्ड रोगों के लिये अति-महत्वपूर्ण है।
8.  'धनुरासन'- मेरू दण्ड को लचीला एवं स्वस्थ बनाता है। सर्वाइकल स्पांडोलाइटिस, कमर-दर्द एवं उदर-रोगों में लाभदायक है। नाभिटलना दूर करता है। स्त्रियों की मासिक धर्म संबंधी विकृतियों में लाभदायक है। गुर्दों को पुष्ट कर मूत्र विकार को दूर करता है।
9.   'मकरासन'- स्लिप-डिस्क, सर्वाइकल आदि के लिये यह लाभकारी है। अस्थमा तथा फेफड़े संबंधी किसी भी विकार तथा घुटनों के दर्द के लिये विशेष गुणकारी है।
10.   'अर्धमत्स्येन्द्रासन'- मधुमेह एवं कमर-दर्द में लाभकारी है। पृष्ठ देश की सभी नस-नाड़ियों में रक्त संचार को सुचारु रूप से चलाता है। उदर विकारों को दूर कर आँतों को बल प्रदान करता है।

इन यौगिक क्रियाओं को करने से मानव पूर्ण रूप से स्वस्थ रहता है। योग ही ऐसी विद्या है जो प्राणी-मात्र को सफल जीवन की कला सिखाती है। अमृत्व से सत, मृत्यु से अमृत्व, अंधकार से प्रकार, दु:ख से परम-सुख, असफलता से सफलता की ओर अग्रसर करने के लिये योग ही एकमात्र विज्ञान है।

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