पूर्णिया : जिले में बेरोकटोक बिना निबंधन के चल रहे मेडिकल स्टोर - Live Aaryaavart

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रविवार, 9 जून 2019

पूर्णिया : जिले में बेरोकटोक बिना निबंधन के चल रहे मेडिकल स्टोर

- निबंधित है 2500 व संचालित है 10 हजार से अधिक दवा दुकान- जिले की दवा दुकान खुलेआम उड़ा रही है नियमों की धज्ज्जियां
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पूर्णिया (आर्यावर्त संवाददाता) : दवा के थोक या खुदरा कारोबार के लिए सहायक औषधि नियंत्रक कार्यालय में निबंधन कराना अनिवार्य है। बिना निबंधन और मानक के विपरित दवा दुकान किसी भी प्रकार से चलाना कानूनन जुर्म है। लेकिन शहर से लेकर गांव तक खुलेआम बिना निबंधन और मानक को ताक पर रख कर दवा का कारोबार किया जा रहा है। लेकिन इस बात की भनक अधिकारियों को नहीं है। जिला सहायक औषधि नियंत्रक कार्यालय की माने तो जिले में करीब 2500 थोक व खुदरा दवा दुकान, एजेंसी निबंधित हैं। लेकिन हकीकत में इससे कई गुणा ज्यादा दवा दुकान संचालित हैं। जानकारों की मानें तो जिले में करीब 10 हजार दवा दुकान संचालित है। पूर्णिया शहर में मात्र सात हजार से अधिक दवा दुकान है। यानी 7500 दवा दुकान बिना निबंधन और मानक विहिन हैं। 

...खुलेआम उड़ रही नियमों की धज्ज्जियां :
दवा का थोक या खुदरा में खरीद, बिक्री या कारोबार करने के लिए निबंधन के साथ मानक का भी पालन करना पड़ता है। जिसमें थोक कारोबार के लिए कम से कम 150 स्क्वायर फिट जगह होनी चाहिए। वहीं खुदरा विक्रेता के लिए कम से कम 120 स्क्वायर फीट जगह होनी चाहीए। अपना मकान है तो उसका दस्तावेज या किराए पर है तो मकान मालिक का किराये का एग्रीमेंट चाहिए। साथ ही दुकान में दवा का बिक्री करने वाले एक प्रशिक्षित कर्मी चाहिए। लेकिन जिले में संचालित निबंधित या बिना निबंधित अधिकतर दवा दुकानों में इस तरह का कोई भी मापदंड का पालन नहीं किया जा रहा है। एक ऐसा ही मामला लाइन बाजार शिव मंदिर रोड स्थित एक दवा दुकान में आया है। मां मेडिकल हॉल नामक दुकान है। बताया जा रहा है कि यह दवा दुकान वर्ष 1994 में निबंधित हुई थी और गौरी देवी के मकान में संचालित है। लेकिन मकान मालिक और दवा दुकानदार के बीच अनबन होने के कारण एग्रीमेंट रद्द हो गया। लेकिन उसके बाद भी सहायक औषधि नियंत्रक कार्यालय में दुकान का रिन्यूवल हो चुका है। जबकि बिना एग्रीमेंट के लाइसेंस रिन्यूवल होना संभव नहीं है। दुकानदार बिना एग्रीमेंट के ही जबरन घर में कब्जा कर नियम के खिलाफ दवा दुकान चला रहे हैं।

...बिना फार्मासिस्ट के ही संचालित है कई दवा दुकान :
दवा दुकान संचालन के लिए एक फार्मासिस्ट का होना अनिवार्य है। लेकिन शहर से लेकर गांव तक संचालित अधिकतर दवा दुकानों में बिना फार्मासिस्ट के संचालन किया जा रहा है। जानकार बताते है कि ऐसे लोग कुछ दिन दवा दुकान में काम करते हैं फिर फार्मासिस्ट बन कर लोगों को चूना लगाते हैं। ऐसे लोग ही अधिक कमाने की लालच में प्रतिबंधित दवा भी बेचते हैं। यदि जांच की जाए तो इस बात का बड़ा खुलासा हो सकता है। 

...बिना निबंधन के दवा का कारोबार करना कानूनन अपराध है : 
बिना निबंधन के दवा का कारोबार करना कानूनन अपराध है। साथ ही दुवा दुकान संचालन के लिए एक फार्मासिस्ट का होना जरूरी है। बिना निबंधन और फार्मासिस्ट के दवा दुकान संचालित होने की शिकायत नहीं मिली है। शिकायत मिलने पर कार्रवाई की जाएगी। मां मेडिकल हॉल के मालिक और मकान मालिक के बीच घर किराया को लेकर कोर्ट में मामला चल रहा है। दवा दुकान का चालान जमा कर देने से लाइसेंस को रिन्यूवल कर दिया गया है। साथ ही नए नियम के अनुसार लाईसेंस रिन्यूवल के लिए एग्रीमेंट होना जरूरी नहीं है। : पंकज कुमार, ड्रग्स इंस्पेक्टर, पूर्णिया।

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