पूर्णिया : ईश्वर भक्ति के लिए सच्ची श्रद्धा जरूरी : पूज्य भगीरथ बाबा - Live Aaryaavart

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शुक्रवार, 21 जून 2019

पूर्णिया : ईश्वर भक्ति के लिए सच्ची श्रद्धा जरूरी : पूज्य भगीरथ बाबा

- सच्चे गुरू अपने शिष्यों को अंधकार से प्रकाश में ले जाते हैं- केनगर में तीन दिवसीय संतमत सत्संग का हुआ समापन

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केनगर : ईश्वर भक्ति के लिए सच्ची श्रद्धा जरूरी है। अगर हमलोग गुरू पर पूर्ण विश्वास कर उनके बताए मार्ग पर चलते रहेंगे तो मनुष्य शरीर पाने की सार्थकता पूर्ण हो जाएगी। उक्त प्रवचन संतसदगुरू परमहंस जी महाराज के शिष्य पूज्य स्वामी भगीरथ जी महाराज केनगर में आयोजित त्रिदिवसीय संतमत सत्संग ध्यान यज्ञ अधिवेशन के समापन पर बोल रहे थे। उन्होंने नवधा भक्ति की चर्चा करते हुए कहा कि माता सबरी के गुरू मतंग ऋषि जब अपना शरीर छोड़ रहे थे तो उन्होंने सबरी को कहा था कि एक दिन भगवान राम इसी कुटिया में आएंगे और तुम्हें दर्शन देगें। माता सबरी ने 14 हजार वर्ष तक गुरू के बातों पर विश्वास कर मतंग ऋषि की कुटिया में रही और एक दिन भगवान राम वनवास के दौरान मतंग ऋषि की कुटिया में पहुंचकर माता सबरी को दर्शन दिया। भगवान राम ने माता सबरी को नौ प्रकार की भक्ति करने का उपदेश दिया। जिसमें प्रथम भक्ति संतों का संगा करना, दूसरी भक्ति ईश्वर की कथा में मन लगाना, तीसरी भक्ति गुरू के चरणों की सेवा करना, चौथी भक्ति ईश्वर के गुणों की चर्चा करना, पांचवी भक्ति मंत्र का जाप करना आदि है। माता सबरी ने अपने गुरू के वचनों पर इतनी दृढ थी कि उसे कोई डिगा नहीं सकता था और 14 हजार वर्षों तक मतंग ऋषि की कुटिया में इसलिए रही कि गुरू ने उन्हें बताया था कि एक न एक दिन भगवान राम अवश्य इसी कुटिया में आएंगे। कहने का अर्थ है कि अपने गुरू के बताए वचनों पर जो अडिग रहता है उसका कल्याण अवश्य होता है। जिस प्रकार सबरी माता का हुआ। पूज्य बाबा ने कहा कि लोगों को नियमित सत्संग व ध्यान करना चाहिए। सत्संग व ध्यान करने से मन का विकार दूर होता है और मन पवित्र होता है। जब मन पवित्र हो जायेगा तब ईश्वर की प्राप्त होगी। उन्होंने सत्संग में उपस्थित श्रद्धालुओं को अपने माता पिता व अग्रजों की सेवा गुरू की तरह करने को कहा। क्योंकि अगर अपने माता पिता की सेवा नहीं करेंगे तो कभी भी दूसरों के प्रति सेवाभाव पैदा नहीं होगा। इसलिए अपने माता पिता की सेवा सबसे पहले करनी चाहिए। माता पिता ही पहले भगवान होते हैं। इससे पूर्व महुआ बाजार से आये पूज्य अरविंद बाबा ने भी भक्ति की महिमा पर विस्तार से चर्चा की और लाेगों को मनोयोग से गुरू के बताए मार्ग पर चलने की अपील की। इस मौके पर स्वामी नरेशानंद बाबा, स्वामी परमानंद बाबा, पूज्य धीरेंद्र बाबा, पूज्य दशमू बाबा, पूज्य सुरेंद्र बाबा, पूज्य संजय बाबा, पूज्य नाथू बाबा, कृष्णा बाबा, संतदयाल बाबा सहित बड़ी संख्या में साधू संत व श्रद्धालु उपस्थित थे। तीन दिनों तक केनगर आश्रम की ओर से भंडारा प्रसाद का आयोजन किया गया। पूज्य सुरेंद्र बाबा ने इस तीन दिवसीय सत्संग के सफल समापन पर केनगर के श्रद्धालुओं सहित जिलेवासियों को साधुवाद दिया।

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