पूर्णिया : 1957 में हुए सर्वे के बाद हुआ था नहर का निर्माण, 10 वर्षों से नहीं मिल रहा किसानों को इसका लाभ - Live Aaryaavart

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बुधवार, 26 जून 2019

पूर्णिया : 1957 में हुए सर्वे के बाद हुआ था नहर का निर्माण, 10 वर्षों से नहीं मिल रहा किसानों को इसका लाभ

  • - किसान समय पर नहर सिंचाई विभाग को लगान भी भर रहे थे लेकिन पिछले 10 वर्षों से सरकार की यह महत्वपूर्ण योजना धूल फांकती नजर आ रही है


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पूर्णिया (आर्यावर्त संवाददाता)  : 1957 में हुए सर्वे के बाद भीमनगर से कटिहार सब डिवीजन तक बड़ी नहर का निर्माण करोड़ों रूपए की लागत से कराया गया। सरकार द्वारा चलाई जा रही सिंचाई योजना अच्छी तरह से चल रही थी और किसानों को इसका समुचित लाभ भी मिल रहा था। किसान समय पर नहर सिंचाई विभाग को लगान भी भर रहे थे लेकिन पिछले 10 वर्षों से सरकार की यह महत्वपूर्ण योजना धूल फांकती नजर आ रही है। समय पर नहर में पानी नहीं छोड़े जाने के कारण किसानों को पंपसेट के माध्यम से फसलों में पटवन करना पड़ता है। जिससे किसानों को फसल उत्पाद में ज्यादा लागत पड़ती है। मालूम हो कि पूर्णिया पूर्व प्रखंड क्षेत्र के लगभग 200 हेक्टेयर जमीन में नहर के पानी से सिंचाई की जाती थी। लेकिन विभागीय कुव्यवस्था के कारण किसानों को पटवन में काफी परेशानी झेलनी पड़ रही है।

...सात वर्ष पूर्व नहर को किया गया था दुरूस्त :
सात वर्ष पूर्व नहर की सफाई कर दुरुस्त करने का कार्य किया गया था लेकिन उसके बाद भी नहर में पानी छोड़े जाने के बाद दो तीन बार मेढ़ टूट चुकी है। हालांकि मेढ़ के टूटने के बाद तुरंत ही विभाग के द्वारा उसे दुरुस्त किया गया। नहर से पानी पटवन के लिए छोटे छोटे चैनल भी छहर के रूप में निकाले गए थे। जिसके माध्यम से किसान अपने अपने खेतों में पानी पटवन करते थे। देखरेख के अभाव में चैनल भी ध्वस्त हो गया। जिसके फलस्वरुप नहर में पानी रहने के बावजूद भी किसान उसका लाभ नहीं उठा सकते हैं। बेलौरी सतासी चौक के पास बड़ी नहर से छोटी छोटी नहर का निर्माण कराया गया है लेकिन बदहाली की वजह से उसमें भी पानी नहीं छोड़ा जाता है। जिससे किसानों को समय पर लाभ नहीं मिलता है। किसान भैरव मेहता बताते हैं कि पहले हम लोग नहर के माध्यम से ही खेतों में सिंचाई करते थे अब समय पर नहर में पानी नहीं आने के कारण हमलोगों को बोरिंग द्वारा पंपिंग सेट के माध्यम से पटवन है। जो कि काफी महंगा साबित होता है। वहीं किसान अवधेश मेहता, संतोष मेहता बताते हैं कि हमलोगों का ज्यादा खेत नहर के समीप ही पड़ता है अगर समय पर नहर में पानी दिया जाए एवं चैनल का निर्माण कर दिया जाए तो बेशक क्षेत्र के किसानों को काफी लाभ मिलेगा। फसल उत्पाद में लागत भी कम आएगी आैर उत्पादकता में बढ़ोत्तरी होगी। वहीं किसान अनिल ठाकुर बताते हैं कि विभाग की लापरवाही की वजह से आज नहर बदहाली के दौर से गुजर रही है। समय समय पर समुचित देखरेख नहीं होने से सभी चैनल ध्वस्त हो गए और सरकार की यह योजना समाप्ति की कगार पर है।

...नहर में केले की फसल लगा रहे किसान :
नहर की बदहाली का आलम यह है कि नहर में पानी नहीं छोड़े जाने के कारण अब किसान नहर की जमीन को भी किसानी के तौर पर इस्तेमाल कर रहे हैं। तस्वीर में स्पष्ट रूप से दिख रहा है कि नहर के मेढ़ तक केले की फसल लहलहा रही है। किसानों का कहना है कि जब नहर में पानी ही नहीं है तो हम इस जमीन को इस्तेमाल में क्यों न लाएं।

...नए सिरे से बनाई जाएगी योजना :
नहर को दुरूस्त करने के लिए जिस कांट्रेक्टर को कार्य सौंपा गया था वह काम पूरा नहीं कर पाया। लिहाजा, विभाग द्वारा नए सिरे से कार्ययोजना तैयार की जाएगी और नए कांट्रेक्टर को कार्य सौंपा जाएगा। उम्मीद है इसी माह के अंत तक नहर में पानी छोड़ा जाएगा।  : शैलेश सिंह, एसडीओ नहर विभाग, कटिहार सब डिवीजन।

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